30 September 2017

चीन ने स्टेल्थ जे-20 जेट को वायुसेना में शामिल किया

चीन ने 28 सितम्बर को स्टेल्थ जे-20 जेट को वायुसेना में शामिल करने की घोषणा की. ये लड़ाकू विमान रडार में दिखाई नहीं देता है. यही खासियत उसे दूसरे विमानों से अलग करती है. हालांकि ये पता नहीं चल सका है कि वायुसेना में कितने जेट शामिल किए गए हैं. जे-20 चीन की चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है. ये मध्यम व लंबी दूरी तक मार करने वाला विमान है. 2011 में ये पहली बार आकाश में देखा गया. जुहाई गुआंग्डोंग प्रांत में चीन के 11वें एयर शो के मौके पर लोगों को दिखाया गया. ये शो पिछले साल नवंबर माह में आयोजित किया गया था.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इसके वायुसेना में शामिल होने से चीन व भारत के लड़ाकू बेड़े के बीच संतुलन स्थापित हो सकेगा. दो इंजन वाले जेट को चेंगदू एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ने बनाया है. पाकिस्तान इस विमान को हासिल करने के लिए अपनी इच्छा जाहिर कर चुका है. उल्लेखनीय है कि अमेरिकी सेना एफ-22 राप्टर का इस्तेमाल करती है. ये पांचवी पीढ़ी का स्टेल्थ जेट है. 2014 में अमेरिका-चीन आर्थिक व रक्षा समीक्षा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जे-20 एशिया पेसिफिक देश में इस्तेमाल होने वाले विमानों की तुलना में ज्यादा सक्षम है. इसके होने से चीन की सेना की मारक क्षमता में बहुत ज्यादा इजाफा होता है.

भारत और नार्वे ने स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने हेतु आशय पत्र पर हस्ताक्षर किया

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 28 सितम्बर 2017 को नार्वे सरकार के विदेश मामले मंत्रालय के साथ नार्वे-भारत साझीदारी पहल (एनआईटीआई) के जरिये स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर सहयोग बढ़ाने हेतु एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किया. यह सहयोग वर्ष 2018 से आरम्भ होकर तीन वर्षों की अवधि के लिए होगा. इस पत्र के जरिये भारत और नार्वे के बीच सहयोग भारत सरकार के विकास लक्ष्यों के अनुकूल बना रहेगा, जैसा कि सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए इसकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में वर्णित है. यह सहयोग समान हितों के वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करेगा.

इस साझीदारी में प्रजनन, मातृत्व, नवजात, शिशु, किशोर स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण से संबंधित क्षेत्र भी शामिल हैं और यह एनआईपीआई चरण-1 और चरण-2 से प्राप्त अनुभवों से और मजबूत होगी. यह सहयोग नवप्रवर्तक, उत्प्रेरक और रणनीतिक समर्थन पर ध्यान केन्द्रित करना जारी रखेगा तथा आरम्भ बिन्दु के रूप में भारत में त्वरित मातृत्व एवं शिशु उत्तरजीविता के लिए भारत सरकार की सघनीकरणीय योजना का उपयोग करेगी.

भारत में 60 प्रतिशत तक एटीएम घटाये जायेंगे

कैशलेस बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाये जा रहे हैं, इसके तहत देशभर में एटीएम की संख्या कम करने पर भी विचार किया जा रहा है. एजेंसी रिपोर्ट्स के अनुसार देश के साठ प्रतिशत तक एटीएम कम हो जायेंगे. रिज़र्व बैंक द्वारा देश के साठ प्रतिशत एटीएम बंद किये जा सकते हैं. हालांकि इस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया गया है, लेकिन इसी सप्ताह बैंक मुख्यालयों ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को इसी वित्तीय वर्ष में 25 प्रतिशत तथा अगले वित्तीय वर्ष तक लगभग 60 प्रतिशत एटीएम कम करने का निर्देश दिया है.

वैसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नकदी का प्रचलन कम करने के लिए एटीएम से नकद निकासी की सीमा घटाने पर भी विचार किया जा रहा है. सामान्य बचत खातों में निकासी की अधिकतम सीमा 25 हजार रुपये हो सकती है. वर्तमान में यह सीमा 25 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक है. कैशलेस बैंकिंग की कवायद के लिए आरबीआई सिक्कों की संख्या में बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रहा है. इसी श्रृंखला में 100 रुपये के सिक्के जारी करने की घोषणा हो चुकी है तथा अन्य मुद्रा वर्ग में सिक्के जारी करने की योजना पर काम हो रहा है. आरबीआई इस वर्ष ही करीब दो हजार करोड़ रुपये के सिक्के जारी कर देगा.

श्रीनगर एवं रायपुर एयरपोर्ट को सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्ट सम्मान प्रदान किया गया




भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जम्मू-कश्मीर तथा स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर, छत्तीसगढ़ को संयुक्त रूप से प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2015-16 से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार 27 सितंबर 2017 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में “शेष भारत” श्रेणी के तहत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डे का पुरस्कार प्रदान किया. बता दे की भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन के व्यापक विकास के लिए प्रदर्शन के आधार पर सालाना यात्रा, पर्यटन और आतिथ्य उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार प्रदान किए. पहली बार संयुक्त रूप से दो हवाई अड्डों को उनके उत्कृष्ठ शैली के कार्य, पर्यावरण के अनुकूल और यात्रियों के लिए सुविधाजनक सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डों के रूप में चुना गया.

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत है. यह भारत के 126 तथा 11 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों का अनुरक्षण, प्रबन्धन व विमान यातायात सेवा प्रदान करता है. इसका निगमित मुख्यालय राजीव गाँधी भवन, सफदरजंग विमानक्षेत्र, नई दिल्ली में स्थित है.

विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया

पूरी दुनिया में 27 सितम्बर 2017 को पर्यटन दिवस मनाया गया. यह दिवस प्रत्येक वर्ष 27 सितम्बर को मनाया जाता है, इस दिवस का उद्देश्य लोगों को पर्यटन के महत्व के प्रति जागरूक करना है. पाठकों को बता दे की विश्व पर्यटन दिवस के लिए 27 सितंबर का दिन चुना गया, क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व पर्यटन संगठन का संविधान स्वीकार किया गया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा हर साल विश्व पर्यटन दिवस की विषय-वस्तु तय करती है. विश्व पर्यटन दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यटन के द्वारा अपने देश की आय को बढ़ाना है.

भारत विश्व के पाँच शीर्ष पर्यटक स्थलों में से एक है. विश्व पर्यटन संगठन और वर्ल्ड टूरिज्म एण्ड ट्रैवल काउन्सिल तथा पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणीय संगठनों ने भारतीय पर्यटन को सबसे ज़्यादा तेज़ी से विकसित हो रहे क्षेत्र के रूप में बताया है.

कांडला पोर्ट का नाम बदलकर ‘दीन दयाल पोर्ट’ रखा गया

हाजरानी मंत्रालय ने 26 सितम्बर 2017 को कांडला पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट करने से संबंधित आदेश जारी किया. नया नाम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. भारत के गुजरात प्रान्त में कच्छ जिले में स्थित कांडला पोर्ट ट्रस्ट देश के 12 सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है. मंत्रालय के आदेशानुसार, केंद्रीय सरकार ने भारतीय पोर्ट अधिनियम-1908 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों के आधार पर कांडला पोर्ट ट्रस्ट का नाम संशोधित कर दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट किया है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुझाव पर कांडला पोर्ट का नाम बदला गया है.

कांडला पोर्ट पर विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सुझाव दिया था कि कांडला पोर्ट का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय पोर्ट कर देना चाहिए. केंद्र सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म के शताब्दी वर्ष में पूरे वर्ष जन्मशती समारोह मनाने की घोषणा की थी.

वैश्विक समुद्र दिवस मनाया गया

विश्वभर में 28 सितंबर 2017 को वैश्विक समुद्र दिवस मनाया गया. इस दिवस का विषय ‘जहाजों, बंदरगाहों एवं लोगों को आपस में जोड़ना.’ इस विषय का उद्देश्य शिपिंग और लॉजिस्टिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को शामिल करके वैश्विक समुदाय का इस क्षेत्र की ओर ध्यान केन्द्रित करना है. पाठकों को बता दे की वर्ष 1948 में जिनेवा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में औपचारिक रूप से आईएमओ स्थापित करने के लिए प्रस्ताव स्वीकार किया गया. मूल रूप से इसका नाम अंतर-सरकारी समुद्री सलाहकार संगठन (आईएमसीओ) नामित किया गया था लेकिन नाम वर्ष 1982 में इसका नाम बदलकर आईएमओ किया गया.

डाबर ने ई कॉमर्स कम्पनी अमेजन के साथ समझौता किया

साबुन, तेल जैसे रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनी डाबर अपने कारोबार के अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर ध्यान दे रही है. कंपनी इसके लिए अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में अपने उपभोक्ताओं को करीब 30 उत्पादों को उपलब्ध कराने के मकसद से ई-वाणिज्य की प्रमुख कंपनी आमेजन के साथ साझेदारी की है. कंपनी को अपने राजस्व का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा खुदरा बिक्री वितरण नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय परिचालन से प्राप्त होता है. कंपनी की करीब 120 देशों में उपस्थिति है.

डाबर इंडिया के कार्यकारी निदेशक कृष्ण कुमार चुटानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयुर्वेदिक, रसायनमुक्त उत्पादों की भारी मांग है. हमारे व्यवसाय का करीब 30 प्रतिशत भाग अंतरराष्ट्रीय बाजार से आता है. आमेजन की व्यापक पहुंच है और यह हमें अपनी उपस्थिति का विस्तार करने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारतवंशियों के साथ साथ स्थानीय अमेरिकावासियों की मांग को पूरा करने में मदद करेगा. अमेजन के वैश्विक बिक्री कार्यक्रम के तहत आरंभ में डाबर अमेरिकी बाजार में वाटिका हेयर आयल, च्यवनप्राश और टूथपेस्ट जैसे अपने करीब 30 उत्पादों की पेशकश करेगी. उन्होंने कहा कि ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर हम अगली तिमाही में 80 और उत्पादों की पेशकश करेंगे.

पुलिस प्रशिक्षण हेतु भारत और अफगानिस्तान के मध्य तकनीकी सहयोग पर समझौता हुआ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 27 सितम्बर 2017 को पुलिस प्रशिक्षण एवं विकास में भारत और अफगानिस्तापन के बीच तकनीकी सहयोग पर द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर मंजूरी प्रदान कर दी है. यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेन्द्रर मोदी की अध्यीक्षता में हुई. इस समझौता ज्ञापन से अफगानिस्ताैन राष्ट्री य पुलिस के क्षमता निर्माण और क्षेत्र के सुरक्षा तंत्र में सुधार लाने में मदद मिलेगी. समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की तिथि से 5 वर्ष की अवधि के लिए इस शर्त पर मंजूरी प्रदान की गई है कि इसे आगे पांच वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा जिसमें आगे कोई परिवर्तन अथवा संशोधन नहीं किया जाएगा.

भारत और अफगानिस्ताधन के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और अफगानिस्ताएन राष्ट्री य पुलिस के पुलिस कार्मिक भारत के विभिन्न प्रशिक्षण संस्था्नों में प्रशिक्षण के लिए आते हैं. भारत और अफगानिस्तािन अक्टू बर 2011 में दोनों देशों के बीच ‘नीतिगत साझेदारी के लिए करार’ पर पहले ही हस्तातक्षर कर चुके हैं. आंतरिक मामलों के मंत्रालय, अफगानिस्तागन, संयुक्तर राष्ट्रल विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), अफगानिस्तांन और पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यू रो (बीपीआरडी) गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों के बीच अक्टूिबर 2016 में एक बैठक हुई थी.

अफगानिस्ताडन के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशिक्षण, पुलिस विकास, कानून प्रवर्तन, अफगानिस्ताान में कानून सम्मएत राज्यि को मजबूत करने तथा दीर्घकालिक सहयोग के निर्माण हेतु भारत से सहायता के लिए शिक्षा-इच्छान व्यगक्तत की थी. इस सहयोग को आगे बढ़ाने के दृष्टिगत राजनयिक माध्य मों से इस समझौता ज्ञापन पर संयुक्त रूप से सहमति बनी है.

बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में मिताली राज को मिली जगह

इसी साल इंग्लैंड में खेले गए आईसीसी महिला विश्व कप में भारतीय टीम को फाइनल में पहुंचाने वाली कप्तान मिताली राज को बीबीसी ने साल 2017 की सबसे प्रभावशाली 100 महिलाओं की सूची में शामिल किया है. साल 2017 की सबसे ज्यादा प्रभावशाली महिलाओं की सूची में मिताली के अलावा एम्बाइब कंपनी की सीईओ अदिति अवस्थी, लेखिका इरा त्रिवेदी और पिछले आठ साल से तिहाड़ जेल में बच्चों को पढ़ाने वाली शिक्षिका तुलिका किरण अन्य भारतीय महिलाएं हैं. 

बीबीसी 100 वोमेन 2017 नाम की इस सूची में बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मां मेहरुन्निसा सिद्दीकी को भी चुना गया है. इस सूची में इंजीनियरिंग से लेकर इंडस्ट्री, खेल से लेकर व्यवसाय सभी पेशे की महिलाओं को शामिल किया गया है. लेकिन, यह सूची इस पूरी कवायद का सिर्फ एक हिस्सा भर है.  यह सूची बीबीसी 100 महिला चैलेंज से प्रेरित है. इसमें एक कार्यक्रम के तहत प्रतिभाशाली महिलाओं की चार टीमें बनाई जाएंगी जिन्हें रोजमर्रा की मुसीबतों से निपटने की चुनौती दी जाएंगी. यह चैलेंज दिल्ली में नौ से 13 अक्टूबर के बीच आएगा. वहीं दुनिया के अलग-अलग कोने में भी इस तरह के चैलेंज आयोजित किए जाएंगे. जिन भारतीय महिलाओं को इस सूची में शामिल किया गया है, वह उन 60 महिलाओं की सूची का हिस्सा हैं जो अपने काम से दूसरों को प्ररेणा देती आ रही हैं.

भारत विश्व की 40 वीं सबसे प्रतिस्पर्धात्मक अर्थव्यवस्था है: विश्व आर्थिक मंच


विश्व आर्थिक मंच कीवैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक पर भारत को 40 वें सबसे अधिकप्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थान दिया गया है- पिछले साल की रैंकिंगसे एक जगह फिसलकर, जो कि स्विट्जरलैंड में सबसे ऊपर है. 137 अर्थव्यवस्थाओं कीसूची में, स्विट्जरलैंड के क्रमशः अमेरिका और सिंगापुरक्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. 27 सितम्बर को जारी की गईनवीनतम वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट में, भारत 39 वें स्थान से 40 डिग्री तक गिर गया है जबकि पड़ोसी चीन 27 वें स्थान पर है.  रिपोर्ट के मुताबिक, आईसीटी (सूचना औरसंचार प्रौद्योगिकी) के संकेतकों में भारत के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है, खासकर इंटरनेट पर बैंडविड्थ, मोबाइल फ़ोन औरब्रॉडबैंड सदस्यता और स्कूलों में इंटरनेट का उपयोग.

हालांकि, डब्ल्यूईएफ ने कहा कि निजी क्षेत्र अभी भी भ्रष्टाचार को भारत में कारोबार करने के लिए सबसे अधिकसमस्याग्रस्त कारक मानता है.  "भारत के लिए एक बड़ी चिंता यह है कि इसके अभिनव ताकत (2 9) और उसकी तकनीकी योग्यता (3 से 107) के बीच का संबंध है. जब तक यह अंतर बड़ा रहता है, भारत व्यापक अर्थव्यवस्था में अपनी तकनीकीशक्तियों का पूरी तरह से लाभ उठाने में सक्षम नहीं होगा, "यह नोट किया. "भारत इस साल पिछले दो सालों से बड़ा छलांग लगाने के बाद इस साल स्थिरता रखता है." रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिस्पर्धा केअधिकांश स्तंभों में यह स्कोर सुधार आया है. इसमें इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा (66 वां रैंक), उच्च शिक्षा औरप्रशिक्षण (75) और तकनीकी योग्यता (107) शामिल हैं, जो कि इन क्षेत्रों में हाल ही में सार्वजनिक निवेश को दर्शाती है.

29 September 2017

अपर्णा कुमार एशिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट मैनास्लु पर तिरंगा फहराने वाली प्रथम भारतीय महिला बनी

पर्वतारोहण के क्षेत्र में वर्ष 2002 बैच की आइपीएस अर्पणा ने दुनिया की आठवीं और एशिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट मैनास्लु पर तिरंगा फहराया।.इसके साथ ही यह सफलता पाने वाली अपर्णा कुमार पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बन गयी हैं. इससे पहले अपर्णा कुमार माउंट एवरेस्ट सहित दुनिया के सात महाद्वीपों में से छह की सबसे ऊंची चोटियों पर फतह हासिल कर चुकी हैं. पर्वतारोहण आइपीएस अपर्णा कुमार का जुनून है. माउंट एवरेस्ट पर उन्होंने पिछले वर्ष मई में फतह हासिल की. पर्वतारोहण में यह सफलता हासिल करने वाली वह भारतीय पुलिस सेवा (महिला व पुरुष दोनों) की पहली अधिकारी हैं. अपर्णा कुमार ने वर्ष 2013 में मनाली में पर्वतारोहण का बेसिक कोर्स किया था, तभी से वह महाद्वीपों की चोटियां फतह करने के अभियान में जुटी हैं.
 
बेंगलुरु में जन्मी और वर्तमान में लखनऊ में तैनात 2002 बैच यूपी कैडर की आइपीएस अपर्णा कुमार भारतीय पुलिस सेवा की पहली महिला अधिकारी हैं, जिन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया. माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर है. अपर्णा अफ्रीका की किलिमंजारो, आस्ट्रेलिया की कारस्टेंज पिरामिड, साउथ अमेरिका की माउंट अंकारागुआ, यूरोप की माउंट एलबस, अंटार्कटिका की विनसन मैसिफ और एशिया के माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल कर चुकी हैं.

नेपाल में स्थित माउंट मैनास्लु समुद्र तल से 26,781 फीट (8,163 मीटर) ऊंचाई पर स्थित है. अपर्णा ने 25 सितम्बर 2017 को सुबह दस बजे इस चोटी पर तिरंगा फहराया. इस चोटी को फतह करने वह नौ सितंबर को काठमांडू से रवाना हुई. नेपाल में स्थित मैनास्लु पर्वत की चढ़ाई उन्होंने 17 दिन में पूरी की.

मुकेश अंबानी के साथ पतंजलि के बालकृष्ण शीर्ष दस भारतीय अमीरों में शामिल

बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और डी-मार्ट के राधाकिशन दमनी का नाम इस साल भारत के अमीरों की सूची में शामिल हो गया है. उद्योगपति मुकेश अंबानी अब भी सबसे अमीर भारतीय बने हुए हैं. पिछले छह साल से अमीरों की सूची तैयार कर रही चीन की शोध इकाई हुरुन ने बयान में कहा, ‘एफएमसीजी कंपनी पतंजलि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बालकृष्ण अब देश के शीर्ष 10 अमीरों में शामिल हो गए हैं. रिटेल सेक्टर के नए सितारे दमनी सबसे लंबी छलांग लगाने वाले अमीर रहे. उनकी संपत्ति में 320 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ.’

एवेन्यू सुपरमार्ट्स की शानदार सूचीबद्धता से अमीरों की सूची में आठ नए लोगों को जगह मिली. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नोटबंदी के बाद से भारत ने 11 अरबपति खो दिए हैं. ई कॉमर्स क्षेत्र के जाने पहचाने नाम सचिन और बिन्नी बंसल अरबपतियों की सूची में अब शामिल नहीं हैं. बालकृष्ण पिछले साल 25वें स्थान पर थे जबकि इस बार वह 8वें स्थान पर पहुंच गए हैं. उनकी संपत्ति 173 प्रतिशत बढ़कर 70 हज़ार करोड़ रुपये हो गई है. पिछले वित्त वर्ष में पतंजलि का कारोबार 10,561 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वह कई विदेशी ब्रांडों को टक्कर दे रही है.

132 लोगों की इस सूची में मुकेश अंबानी लगातार छठे साल सबसे अमीर भारतीय बने रहे. वैश्विक स्तर पर वह पहली बार शीर्ष 15 में जगह बनाने में कामयाब रहे. शेयर बाजार में आए उछाल से रिलायंस के शेयर बढ़ गए. इससे अंबानी की संपत्ति 58 प्रतिशत बढ़कर 2570 अरब रुपये पर पहुंच गई है. उनकी यह संपत्ति यमन देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से 50 प्रतिशत अधिक है. इस सूची में सबसे कम उम्र के अरबपति के रूप में मीडिया डॉट नेट के 34 वर्षीय दिव्यांक तुरखिया ने अपना स्थान पक्का किया है. वहीं महिलाओं में सबसे कम उम्र की अरबपति बनी हैं बेंगलुरु की 42 वर्षीय अंबिगा सुब्रमण्यम. इस साल सूची में 51 महिलाओं ने जगह बनाई है. शहरों के लिहाज़ से देखा जाए तो मुंबई इस सूची में शीर्ष पर है. यहां के 182 अमीर इस सूची में शामिल हैं. इसके बाद नई दिल्ली के 117 और बेंगलुरु के 51 अमीर व्यक्ति इस सूची में हैं.
कभी बैंक में अकाउंट नहीं था और आज वह शख्‍स भारत का 8वां सबसे अमीर व्‍यक्ति है। हुरुन इंडिया रिच लिस्‍ट 2017 तो यही कह रही है। FMCG कंपनी पतंजलि...

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27 September 2017

परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस

संपूर्ण विश्व में 26 सितंबर, 2016 को  ‘परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (International Day for The Total Elimination of Nuclear Weapons) मनाया गया. यह दिवस उच्च प्राथमिकता के रूप में वैश्विक परमाणु निशस्त्रीकरण हेतु अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि के लिए विश्व समुदाय को एक अवसर प्रदान करता है. इस दिवस पर लोगों को तथा विश्व के नेताओं को यह आभास कराया जाता है कि इन हथियारों से होने वाली हानि सामाजिक, आर्थिक एवं निजी जीवन को तबाह कर सकती है. 
 
शीत युद्ध की समाप्ति के बाद परमाणु हथियारों की तैनाती में कमी आई है लेकिन इन देशों ने परमाणु हथियारों को नष्ट नहीं किया है. विदित हो कि संयुक्त राष्ट्र ने 1978 में अप्रसार संधि को पूर्ण समर्थन दिया था किन्तु आज विश्व में लगभग 15,000 परमाणु हथियार हैं.

शशि शंकर ओएनजीसी के नए चेयरमैन नियुक्त

शशि शंकर को देश की सबसे बड़ी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी ओएनजीसी का चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है. वह मार्च 2021 तक इस पद पर बने रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने शंकर को उनके सेवानिवृत्ति या अगला आदेश जारी होने में से जो भी पहले हो तब तक के लिए ओएनजीसी के सीएमडी का पद सौंपा है. बयान के अनुसार 56 वर्षीय शंकर एक अक्तूबर को कार्यभार संभालेंगे. शंकर का कार्यकाल 31 मार्च 2021 तक होगा. निवर्तमान चेयरमैन और प्रबंध निदेशक दिनेश के सर्राफ 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुरू में एक साल के कार्यकाल का प्रस्ताव किया था. मंत्रालय ने इस महीने की शुरूआत में मंत्रिमंडल की नियुक्त मामलों की समिति (एसीसी) से शंकर को तय दिशानिर्देशों के विपरीत एक साल के लिये नियुक्त किये जाने की सिफारिश की थी. सामान्य तौर पर पांच साल के लिये नियुक्ति की. शंकर फिलहाल ओएनजीसी में निदेशक (तकनीक और फील्ड सेवा) हैं. उनकी नियुक्ति उनके सेवानिवृत्ति तक के लिये की गयी है.
ताया कि मिनिस्ट्री ने एक महीने पहले ही एसीसी को सीएमडी पद पर एक साल के लिए नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा था, साल के अंत में CMD के कामकाज की...

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शशि शंकर को ONGC का चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) नियुक्त कर दिया गया है। ऑयल मिनिस्ट्री के शुरुआत में एक साल के लिए नियुक्ति के प्रस्ताव के उलट शशि...

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रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी बनी

रिलायंस इंडस्ट्रीज जहां देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर कंपनी तो है ही, अब इसने वैश्विक बाजार में ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जिसे जानकर आपको गर्व होगा. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिडेट दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी बन गयी है. रिलायंस ने पिछले साल की तुलना में इस मामले में पांच स्थानों की छलांग लगायी है. उससे आगे रूस की गैस फर्म गेज़प्रॉम और जर्मनी की ई.ऑन है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी जो देश के सबसे अमीर उद्योगपति भी हैं ने हाल ही में देश में रिलायंस जियो के नए स्मार्टफोन को लॉन्च किया था. रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की रिलायंस जियो देश की सबसे तेजी से बढ़ती टेलीकॉम कंपनी बन गई है.

रूस की गेज़प्रॉम ने अमेरिका की तेज और गैस क्षेत्र की दिग्गज एक्सॉन मोबिल की 12 साल की बादशाहत को खत्म करते हुये सूची में पहला स्थान प्राप्त किया है. इस साल सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी जर्मनी की ई.ऑन है. वह 112 स्थान की छलांग लगाकर 114वें से सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गयी है. प्लैट्स की शीर्ष 250 ग्लोबल एनर्जी कंपनी रैंकिंग के मुताबिक सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिस्ट में टॉप 10 में स्थान बनाने में कामयाब रही. इंडियन ऑयल को सातवां स्थान मिला है. 2016 में वह 14वें और 2015 में 66वें स्थान पर थी. ऑयल और नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) को 2017 की सूची में 11वां स्थान मिला है जबकि 2016 में 20वें स्थान पर थी. रैकिंग में शामिल दूसरी कंपनियों में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (39वें स्थान पर), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (48वें स्थान पर), पावर ग्रिड कॉर्प (81वें स्थान पर) और गेल इंडिया (106वें स्थान पर) हैं.

प्लैट्स ने अपने में बयान में कहा, “उर्जा क्षेत्र से जुड़ी 14 भारतीय कंपनियां एस एंड पी ग्लोबल प्लैट्स शीर्ष 250 एनर्जी कंपनी रैंकिंग में स्थान पाने में कामयाब रही हैं, जो पिछले बार की तुलना में एक कम है.” दुनिया की सबसे बड़ी तेल ऑयल रिफाइनरी का मालिकाना हक रखने वाली रिलायंस को पिछले साल इस लिस्ट में आठवां स्थान प्राप्त हुआ था. कोल इंडिया लिमिडेट इकलौती ऐसी भारतीय कंपनी है जिसकी रैंकिंग में गिरावट आयी है. वर्ष 2017 में कोल इंडिया को 45वां स्थान मिला है जबकि 2016 में वह 38वें स्थान पर काबिज थी. एसएंडपी ग्लोबल प्लैट्स हर साल 250 टॉप एनर्जी कंपनियों की लिस्ट निकालती है. इन कंपनियों को चार प्रमुख मैट्रिक्स जैसे ऐसेट की वर्थ, रेवेन्यू, प्रॉफिट और निवेशित पूंजी पर रिटर्न का इस्तेमाल करते हुए वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर कंपनियों को स्थान देता है. सूची में शामिल सभी कंपनियों की प्रॉपर्टी 5.5 अरब डॉलर से अधिक है.

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने चौथी बार चुनाव जीता

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने चौथी बार चुनाव जीत लिया है. वो एक बार फिर जर्मनी की चांसलर बनने जा रही हैं. ये घटना भारत के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि एंजेला मर्केल  इस वक्त यूरोप की सबसे ताकतवर नेता हैं और भारत से यूरोप के संबंध अच्छे हों इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि हमारे संबंध एंजेला मर्केल से भी अच्छे हों. एंजेला मर्केल की इस कामयाबी के बाद अब यूरोपियन यूनियन में उनका कद बहुत बढ़ गया है.  एंजेला मर्केल की पार्टी CDU यानी Christian Democratic Union और उनके सहयोगी दल को 33 % वोट मिले हैं. जर्मनी में एक बार फिर उनकी सरकार बनना लगभग तय है.

इस चुनाव के नतीजे पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाले हैं . जर्मनी की राष्ट्रवादी पार्टी Alternative for Germany को 12.6 प्रतिशत वोट मिले हैं . विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1945 में एडोल्फ हिटलर की हार के बाद पहली बार जर्मनी की संसद में किसी राष्ट्रवादी पार्टी की एंट्री होने जा रही है. ये जर्मनी में राष्ट्रवादियों की एक लंबी छलांग है. जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.  भारत के लिए जर्मनी के साथ रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण हैं . भारत Make In India योजना के तहत विदेशी निवेश बढ़ाना चाहता है इसके लिए जरूरी है कि यूरोपियन यूनियन के देश भारत में निवेश करें. इसके लिए भारत को एंजेला मर्केल की मदद चाहिए.

यूरोपियन यूनियन भारत के साथ Free Trade Agreement करना चाहता है . भारत को इसमें अपना फायदा तलाशना होगा . इसी वर्ष मई के महीने में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी के दौरे पर थे तो एंजेला मर्केल से उनकी बातचीत हुई थी और Free Trade Agreement की बातचीत को दोबारा शुरू करने पर सहमति हुई थी.  जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल खुद भी भारत के साथ गहरे संबंध बनाना चाहती हैं. वर्ष 2015 के अक्टूबर महीने में जब एंजेला मर्केल भारत की यात्रा पर आई थीं तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक हजार वर्ष पुरानी दुर्गा की मूर्ति सौंपी थी. ये मूर्ति 20 वर्ष पहले जम्मू कश्मीर से चोरी हो गई थी. जिसे बाद में जर्मनी के एक संग्रहालय में पाया गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए एंजेला मर्केल का आभार प्रकट किया था.

एंजेला मर्केल के व्यक्तित्व के बारे में कुछ खास बातें आपको जरूर पता होनी चाहिए. एंजेला मर्केल का असली नाम एंजेला कैसनेर है . मर्केल उनके पहले पति का उपनाम है. वर्ष 1982 में एंजेला मर्केल ने अपने पहले पति को तलाक दे दिया था. जर्मनी में एंजेला मर्केल को उनके समर्थक म्यूटी (( Mutti)) कहते हैं ये जर्मन भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है Mother या मां. राजनीति में आने से पहले एंजेला मर्केल एक वैज्ञानिक थीं. Time Magazine ने एंजेला मर्केल को वर्ष 2015 का Person of The Year चुना था. वर्ष 2016 में Forbes की List में एंजेला मर्केल को दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर नेता कहा गया .एंजेला मर्केल की गिनती आज दुनिया के उन नेताओं में की जाती है, जिनके बिना कोई भी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन अधूरा माना जाता है . लेकिन अब हिटलर की सोच वाली राष्ट्रवादी पार्टी जर्मनी में जड़ें मजबूत कर रही है जिससे एंजेला मर्केल की चुनौतियां बढ़ गई हैं .  

चीन ने WhatsApp पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग को चीन में दोबारा पांव पसारने के प्रयास को उस वक्त झटका लगा जब चीन ने लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस सेवा व्हॉट्सऐप के वीडियो, वॉयस चैट और तस्वीरों पर प्रतिबंध लगाने के बाद इसके टेक्स्ट सेवा पर भी प्रतिबंध लगा दिया. बता दे की फेसबुक ने वर्ष 2014 में व्हॉट्सऐप का अधिग्रहण कर लिया था. सेंसरशिप, निगरानी और ट्रैफिक जोड़-तोड़ की पहचान करने वाले एक वैश्विक ऑब्जेर्वेशन नेटवर्क, ‘ओपेन ऑब्जेर्वेटरी ऑफ नेटवर्क इंटरफेरेंस(ओओएनआई)’ के अनुसार, चीन के इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों ने 19 सितंबर को ट्विटर पर व्हॉट्सऐप बंद होने की ओर इशारा किया था. पिछले कुछ महीनों से चीन में व्हॉट्सऐप सेवा में कुछ बाधाएं भी आ रही थीं. न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस सेवा व्हॉट्सऐप पर प्रतिबंध यह बताता है कि चीन ने इन मैसेजों से निपटने के लिए विशेषीकृत सॉफ्टवेयर प्रणाली विकसित कर ली है. यह प्रणाली एन्क्रिपशन प्रणाली पर निर्भर करती है जिसका प्रयोग व्हॉट्सऐप के अलावा अन्य सेवाओं में किया जाता है.”

इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे छोटी गिलहरी मिली

इंडोनेशिया के वैज्ञानिकों ने देश के बोर्नियो वर्षा वन में विश्व की सबसे छोटी गिलहरी को खोज निकालने का दावा किया है. अधिकारियों ने 25 सितम्बर 2017 को यह जानकारी दी. वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे अश्चर्यजनक तथ्य यह है कि अद्वितीय और लुप्तप्राय प्रजातियों में से एक यह दुनिया की सबसे छोटी गिलहरी मेरातस पर्वत क्षेत्र में है. यह प्रजाति 16 सितम्बर 2017 को एक अभियान के दौरान मिली. इस गिलहरी की लंबाई 73 मिलीमीटर और वजन 17 ग्राम है.

वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रकार की प्रजाति बोर्नियो द्वीप पर, खासकर समुद्र तट से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।.बता दे की गिलहरियां छोटे व मध्यम आकार के कृन्तक प्राणियों की विशाल परिवार की सदस्य है. जिन्हें स्कियुरिडे कहा जाता है.

इस परिवार में वृक्षारोही गिलहरियां, भू गिलहरियां, चिप्मंक, मार्मोट (जिसमे वुड्चक भी शामिल हैं) उड़न गिलहरी और प्रेइरी श्वान भी शामिल हैं. यह अमेरिका, यूरेशिया और अफ्रीका की मूल निवासी है और आस्ट्रेलिया में इन्हें दूसरी जगहों से लाया गया है. अफ़्रीकीय छोटी गिलहरी की लंबाई सबसे छोटी मानी जाती हैं. उनका आकार 7–10 सेमी का होता है.

फॉर्च्यून की सबसे पावरफुल बिजनेसवुमन सूची में दो भारतीय शामिल

विश्व प्रसिद्ध फॉर्च्यून मैगजीन ने अमेरिका से बाहर की ताकतवर प्रमुख कारोबारी महिलाओं की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में दो भारतीय महिलाओं, आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर और एक्सिस बैंक की प्रमुख शिखा शर्मा ने स्थान बनाया है. वहीं इसी लिस्ट के अमेरिकी संस्करण में भारतीय मूल की इंदिरा नूयी टॉप तीन कारोबारी महिलाओं में शामिल हैं. मैगजीन की ‘अमेरिका से बाहर सबसे शक्तिशाली कारोबारी महिलाओं की सूची’ में सबसे टॉप लेवल पर बानको सैनटैंडर समूह की कार्यकारी चेयरमैन एना बोटिन हैं. चंदा का स्थान इस सूची में पांचवा और शिखा का 21वां है.

जबकि ‘अमेरिका की सबसे शक्तिशाली कारोबारी महिलओं की सूची’ में पेप्सिको की भारतीय मूल की चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंदिरा नूयी का दूसरा स्थान रहा है. इस सूची में पहला स्थान जनरल मोटर्स की चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैरी बर्रा और तीसरा स्थान लॉकहीड मार्टिन की चेयरमैन, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेरीलिन ह्यूसन का है. इस संबंध में जारी की गई एक अंतर्राष्ट्रीय सूची में जीएसके की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम्मा वाम्स्ले का दूसरा और एंजी की सीईओ इसाबेल कोचर का तीसरा स्थान है।.मैगजीन का यह 17वां वर्ष है जब उसने अमेरिका से बाहर की कामकाजी महिलाओं की यह सूची जारी की है.

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने देश में मध्यावधि चुनाव की घोषणा की

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आम चुनाव समय से पहले कराने की घोषणा की. राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में आबे ने कहा कि वह तत्काल जनादेश हासिल करने के लिए गुरुवार को ही संसद के निचले सदन को भंग कर देंगे. आबे ने यह घोषणा सरकार का कार्यकाल पूरा होने के एक वर्ष पहले ही ऐसे समय में की है, जब ओपिनियन पोल में आबे की स्थिति काफी मजबूत बताई गई है. उनके पक्ष में यह स्थिति उत्तर कोरिया मुद्दे पर अबतक की उनकी प्रतिक्रिया से बनी है. प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम उत्तर कोरिया की धमकी के आगे नहीं झुकेंगे. मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं आगामी चुनाव में बहुमत पाने में सफल रहूंगा और मजबूत कूटनीति की ओर आगे बढ़ेंगे.'

उल्लेखनीय है कि जापान में 48वें आम चुनाव ऐसे वक्त हो रहे हैं, जब आबे और उनकी पत्नी से संबंधित भ्रष्टाचार के दो मामलों को लेकर उनकी सरकार विवादों में थी, और उनके रक्षामंत्री तोमोमी इनाडा ने एक कथित लीपा-पोती को लेकर इस्तीफा दे दिया है.

मोबाइल के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करने पर 3 साल की कैद का प्रावधान किया गया

केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन की विशेष पहचान वाले आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करने पर तीन साल की कैद या जुर्माना अर्थात दोनों का प्रावधान किया है. सरकार के अनुसार ऐसा करने अपराध माना जाएगा और इस पर 3 साल की कैद और जुर्माना दोनों सजा हो सकती है. मोबाइल उपकरण पहचान नंबर (आईएमईआई) 15 अंकों का होता है जो मोबाइल फोन में दर्ज रहता है. दूरसंचार विभाग ने 25 अगस्त को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. अधिसूचना के मुताबिक, अगर अब कोई जानबूझकर आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ करता है तो उसके खिलाफ पुलिस और केंद्रीय या राज्य की एजेंसियां टेलीग्राफ कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर सकती हैं. अदालतें ऐसे मामलों में अधिकतम तीन साल की कैद की सजा और जुर्माना लगा सकती हैं. जुर्माने की राशि अधिकतम दो लाख रुपये तक हो सकती है. केंद्र सरकार ने यह कदम मोबाइल फोन चोरी की घटनाएं रोकने हेतु उठाया है.

क्या है आईएमईआई नंबर: किसी यूजर द्वारा कॉल करने पर कॉल रिकॉर्ड में कॉलर का फोन नंबर और उस हैंडसेट का आईएमईआई नंबर दर्ज होता है, जिससे फोन किया गया है. सिम बदलकर हैंडसेट में मोबाइल नंबर तो आसानी से बदला जा सकता है, लेकिन आईएमईआई नंबर में बदलाव तकनीक का जानकार व्यक्ति ही कर सकता है. वह मोबाइल हैंडसेट के सॉफ्टवेयर में विशेष उपकरण के जरिए आईएमईआई नंबर बदल सकता है. आईएमईआई नंबर का आवंटन वैश्विक संस्था जीएसएमए और इसके द्वारा अधिकृत संस्थाएं ही करती हैं. जब भी किसी व्यक्ति का मोबाइल फोन चोरी होता है तो उसे हैंडसेट की ट्रैकिंग हेतु आईएमईआई नंबर बताना जरूरी होता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ देशों पर अमेरिका यात्रा हेतु प्रतिबंध लगाया

अमेरिकी राष्ट्र्पति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ सहयोग की कमी और सुरक्षा व्य वस्थाि में कमी का हवाला देते हुए अमेरिका की यात्रा प्रतिबंध हेतु नये नियमों की घोषणा की. जिसके तहत आठ देशों के नाम का उललेख किया. 18 अक्टूाबर से लागू होने वाले इन नये नियमों का प्रभाव चाड, इरान, लिबिया, उत्तसर कोरिया, सोमालिया, सीरिया, वेनेजुएला और यमन के नागरिकों पर होगा.

उक्त देशों के नागरिकों पर अमेरिका ने पूर्ण या आंशिक रोक प्रतिबन्ध लगाया है. सूडान मुस्लिम बहुल उन छह देशों में से एक था जिन पर पहले प्रतिबंध लगाया गया. नई सूची में सूडान का नाम हटा लिया गया. उत्तर कोरिया और चाड के नागरिकों पर पूर्ण रोक है जबकि वेनेजुएला के सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों पर ही यात्रा रोक लगाई गई.

इन देशों के नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाने के मामले में अमेरिका द्वारा खराब सुरक्षा जांच और अमेरिकी अधिकारियों के साथ समुचित सहयोग न करने का हवाला दिया गया. अमेरिका में ट्रम्प पर आलोचकों का आरोप था कि जनवरी में कार्यभार संभालने के बाद से ही ट्रंप देश में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की कोशिश में है. ट्रंप ने ट्वीट किया कि अमेरिका को सुरक्षित बनाना उनकी पहली प्राथमिकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार यह सूची विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद की रोकथाम के लक्ष्यों के लिए बनाई गई.

26 September 2017

सीनियर जर्नलिस्ट अरुण साधु का निधन


जाने-माने मराठी पत्रकार और लेखक अरुण साधु का निधन हो गया है. मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने 25 सितम्बर की सुबह आखिरी सांस ली. अरुण साधु 76 वर्ष के थे. अरुण साधु कार्डियोमायोपैथी से लंबे समय से जूझ रहे थे. रविवार को उन्हें मुंबई के सियोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल की प्रभारी डीन डॉ. जयश्री मोंडकर ने बताया कि भर्ती के बाद से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी, जिसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए वेंटीलेटर पर भी रखा गया था.

अरुण साधु ने हिंदी, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख लिखे हैं. अपने उपन्यास 'सिंहासन और दिनांक' के लिए साधु काफी मशहूर हुए थे. वह साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित थे. इसके अलावा अरुण साधु को भारतीय भाषा परिषद, एन सी केलकर और आचार्य अत्रे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने कई लघु कहानियों के अलावा शिवसेना के उदय, वियतनाम युद्ध और चीनी क्रांति के बारे में भी लिखा है.

पूर्व गृह सचिव राजीव महर्षि देश के नए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक बने

पूर्व गृह सचिव राजीव महर्षि अब देश के नए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) बन गए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 25 सितम्बर को उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. 62 वर्षीय महर्षि ने शशिकान्त शर्मा की जगह ली है. शर्मा ने 23 मई, 2013 को कैग का पद संभाला था. राजस्थान कैडर के 1978 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी महर्षि ने पिछले महीने गृह सचिव के रूप में 2 साल का तय कार्यकाल पूरा किया था. कैग के रूप में महर्षि का कार्यकाल तीन साल का होगा.

कैग की नियुक्ति छह साल या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक की जाती है. संवैधानिक अधिकारी के तौर पर कैग के ऊपर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के खातों के ऑडिट की जिम्मेदारी होती है. कैग की रिपोर्ट संसद और राज्य विधानसभाओं में पेश की जाती है. महर्षि राज्य और केंद्र सरकार में कई अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. गृह सचिव के पद पर नियुक्ति से पूर्व वह आर्थिक मामलों के सचिव और राजस्थान के मुख्य सचिव रह चुके हैं. इसके अलावा वह रसायन और उर्वरक विभाग तथा विदेश मामलों के विभाग में सचिव पद पर सेवाएं भी दे चुके हैं.

भारत रूस के साथ मिलकर बांग्लादेश में परमाणु संयंत्र स्थापित करेगा


भारत बांग्लादेश के रूपपुर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण करेगा. इस परियोजना पर वह रूस के साथ मिलकर काम कर रहा है. भारत-रूस करार के तहत किसी अन्य देश में परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं बनाने के मामले में यह पहला प्रयोग है. यह विदेश में भारत का पहला परमाणु ऊर्जा उद्यम है. परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष शेखर बसु ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के 61वें सम्मेलन में कहा, 'हम बांग्लादेश में रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना पर अपने रूसी और बांग्लादेशी साझेदारों के साथ गठबंधन कर रहे हैं.' बहरहाल, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत किस तरह का गठबंधन कर रहा है, क्योंकि देश अभी परमाणु हथियार बनाने में उपयोग हो सकने वाली सामग्रियों, उपकरणों और प्रौद्योगिकियों के निर्यात को नियंत्रित करने वाले 48 सदस्यीय समूह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) का सदस्य नहीं है.

रूपपुर परियोजना बांग्लादेश की पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना होगी। इस परियोजना की दो इकाइयों के चालू होने से भारत और पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश दक्षिण एशिया का तीसरा देश होगा जो परमाणु विखंडन से ऊर्जा का दोहन करेगा. इसकी हरेक इकाई की क्षमता 1200 मेगावाट की होगी. बसु ने बताया कि भारत सरकार ने देशज तकनीक पर आधारित 10 नई परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी दी है. उन्होंने कहा, इन संयंत्रों के साथ हमारे पास निर्माणाधीन 21 और संचालन वाले 22 संयंत्र हो जाएंगे.

25 September 2017

भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2017-18 में 6.7 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगी: ओईसीडी

शोध संस्थान ओईसीडी का अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7 प्रतिशत की रफ्तार से वृद्धि करेगी. पेरिस के इस शोध संस्थान ओईसीडी के मुताबिक वृद्धि दर में गिरावट की वजह जीएसटी और नोटबंदी का क्षणिक प्रभाव रहा. आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन ओईसीडी ने आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिये भी अपने अनुमान को संशोधित करते हुये देश की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. पहले इस अवधि के लिये जून में सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत आंकी गयी थी.

ओईसीडी के अंतरिम आर्थिक परिदृश्य के मुताबिक 2017-18 में, भारत की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि जून में इसके 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. रपट में कहा गया, नोटबंदी और जीएसटी के क्षणिक प्रभाव की वजह से 2017 के विकास अनुमानों को कम करना पड़ा है. वहीं कारोबारी निवेश भी कमजोरी बरकरार है. रपट में आगे कहा गया है कि लंबे अंतराल में जीएसटी से विकास, उत्पादन और निवेश में बढ़ोारी आने की उम्मीद है.

चीन को झटका, टैंडर्ड एंड पूअर्स ने चीन की क्रेडिट रेटिंग घटाई

स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एस एंड पी) ने चीन की क्रेडिट रेटिंग कम करते हुए चेतावनी दी है कि इसके लगातार बढ़ते ऋण से आर्थिक एवं वित्तीय खतरे बढ़े हैं. इस कारण इस वर्ष कंपनी की रेटिंग दूसरी बार गिरी है. एसएंडपी ने चीन की कर्ज रेटिंग एए-माइनस से कम करके ए-प्लस कर दी है. रेटिंग एजेंसी मूडी ने भी चीन के मामले में मई में कुछ इसी तरह का निर्णय लिया था जिस कारण विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बढ़ते कर्ज पर चिंता जताई गई थी.

न्यूयॉर्क की कंपनी एस एंड डीप ने बयान जारी कर कहा है कि हमारे आकलन के अनुसार चीन की घटती रेटिंग दर्शाती है कि लंबे समय तक मजबूत क्रेडिट ग्रोथ से ही चीन के आर्थिक और वित्तीय खतरे बढ़े हैं. हाल के वर्षों में क्रेडिट ग्रोथ से चीन का आर्थिक विस्तार और मूल्यों में इजाफा हुआ है. एजेंसी के मुताबिक, हम समझते हैं कि इससे कुछ हद तक वित्तीय स्थिरता भी कम हुई है.

गूगल ने HTC स्मार्टफोन कारोबार खरीदने की घोषणा की

आईटी क्षेत्र की कंपनी गूगल ने ताइवान की कंपनी एचटीसी के स्मार्टफोन कारोबार को 1.1 अरब डॉलर में खरीदने का निर्णय किया. गूगल पिछले कई वर्षों से लगातार हार्डवेयर डिविजन पर काम कर रहा है और इसका बेहतरीन उदाहरण पिछले साल लॉन्च किया गया पिक्सेल और पिक्सेल एक्सएल स्मार्टफोन है. गूगल और एचटीसी की डील में एचटीसी के इंट्लेक्चुअल प्रॉपर्टी का लाइसेंस भी सम्मिलित है. गूगल और एचटीसी पहले भी साथ- साथ काम करते रहे हैं और गूगल का पहला नेक्सस डिवाइस एचटीसी ने ही बनाया.

एचटीसी के सीएफओ पीटर शेन के अनुसार इस डील के बाद भी एचटीसी के पास 2 हजार से ज्यादा रिसर्च और डिजाइन स्टाफ रहेंगे. एचटीसी अपने ब्रांड के साथ आगे भी काम करती रहेगी. ब्लैकबेरी भी एचटीसी का था, जो बंद हो गया. एचटीसी के सीईओ शीर वांग के बयान के अनुसार गूगल के साथ समझौता एचटीसी स्मार्टफोन्स और वाइव वर्चुअल रियलिटी बिजनेस में इनोवेशन को सुनिश्चित करेगा.

गूगल ने पूर्व में भी मोबाइल बिजनेस में काम किया. इसके लिए कंपनी ने 2011 में मोटोरोला मोबिलिटी को लगभग 12.5 बिलियन डॉलर में खरीदा और कुछ स्मार्टफोन लॉन्च भी किए. बाद में मोटोरोला वापस लेनोवो द्वारा खरीद ली गई. गूगल और एचटीसी के समझौते से स्मार्टफोन इंडस्ट्री प्रभावित होगी. एचटीसी स्मार्टफोन की टीम अब गूगल के पास होगी और ये अब मिलकर सैमसंग और ऐपल को टक्कर दे सकते हैं. ऐपल की तरह गूगल भी अपना खुद का प्रोसेसर तैयार कर रहा है.

भारत ने अफगानिस्तान के लिए 116 परियोजनाओं की घोषणा की

भारत ने अफगानिस्तान के 31 प्रांतों में उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास की 116 परियोजनाओं का ऐलान किया है. कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान के आर्थिक विकास में भारत की मदद मांगी थी. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी के बीच हुई मुलाकात के दौरान इन परियोजनाओं के बारे में फैसला किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर दोनों की मुलाकात हुई है. विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत और अफगानिस्तान ने अफगानिस्तान के 31 प्रांतों में उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास की 116 परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर सहमति जताई है. उन्होंने कहा, इन परियोजनाओं के अलावा भारत ने छह नई परियोजनाओं में सहयोग का प्रस्ताव दिया है. इनमें से एक वापस आने वाले अफगान शरणार्थियों के लिए सस्ते मकान की परियोजना है.

पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में भारत के लिए ज्यादा बड़ी भूमिका की वकालत करने को लेकर अमेरिका के सामने आपत्ति दर्ज कराई थी. विदेश सचिव तहमीना जांजुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस से मुलाकात के दौरान ट्रम्प द्वारा उनकी नई अफगान नीति में भारत के लिए ज्यादा बड़ी भूमिका की वकालत करने को लेकर चिंता जताई. अब्बासी और पेंस का मिलना ट्रम्प के 21 अगस्त को अफगानिस्तान एवं दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नीति की घोषणा करने के बाद से दोनों देशों के बीच सर्वोच्च स्तर पर हुआ पहला संपर्क था.

ट्रम्प ने अपनी नई नीति में पाकिस्तान को आतंकी समूहों के समर्थन के लिए चेतावनी दी थी और आगाह किया था कि अगर उसने ऐसा करना बंद नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे. पाकिस्तान की परेशानियां बढ़ाते हुए ट्रम्प ने भारत से अफगानिस्तान में और बड़ी भूमिका निभाने के लिए कहा था.

विश्व की सबसे अमीर महिला लिलियान बेटेनकोर्ट का निधन

ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स कंपनी लॉरियल कॉस्‍मेटिक्‍स की वारिस और दुनिया की सबसे अमीर महिला लिलियन बेटनकोर्ट का 94 साल की उम्र में निधन हो गया. वह भूलने की बीमारी डिमेंशिया और अल्‍जाइमर से पीडि़त थीं. उन्‍हें दुनिया की सबसे अमीर महिला का खिताब हासिल था. फोर्ब्‍स के मुताबिक उनकी संपत्ति 40 अरब (करीब 2.59 लाख करोड़ रुपये ) से ज्‍यादा थी. उन्‍हें मैडम लॉरियल के नाम से भी जाना जाता था. बेटनकोर्ट के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है. लिलियन बेटनकोर्ट लॉरियल कॉस्‍मेटिक्‍स शुरू करने वाले यूजीन स्‍क्‍युलर की इकलौती संतान थीं. कंपनी के चेयरमैन और सीईओ जीन-पॉल एगोन ने कहा कि वह हमेशा कंपनी के कारोबार पर अपनी नरज रखती थीं. कंपनी की सफलता में उनका अहम रोल है.

बेटनकोर्ट का जन्‍म 1922 में पेरिस में हुआ था. उन्‍होंने 1957 में अपने पिता की मृत्‍यु होने के बाद कंपनी को संभाला था. उन्‍हें लॉरियल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का श्रेय दिया जाता है. कॉस्‍मेटिक्‍स कंपनियों के मामले में लॉरियल अग्रणी है. कंपनी के मुताबिक दुनियाभर में 89 हजार लोग कंपनी के साथ काम करते हैं. बेटनकोर्ट का नाम फ्रांस के एक बड़े स्‍कैंडल से भी जुड़ा था. इस स्‍कैंडल को 'बेटनकोर्ट अफेयर' के नाम से भी जाना जाता है. इस स्‍कैंडल में कई नेताओं और कारोबारियों पर बेटनकोर्ट की बीमारी का फायदा उठाने का आरोप लगा था. फ्रांस के पूर्व राष्‍ट्रपति निकोलस सरकोजी के करीबी का नाम भी इस मामले में सामने आया था.

बलराज जोशी बने एनएचपीसी के सीएमडी नियुक्त

बलराज जोशी ने 22 सितंबर को एनएचपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का पदभार ग्रहण किया. अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्ति से पूर्व जोशी एनएचपीसी में निदेशक (तकनीकी) के पद पर कार्यरत थे. 21 दिसंबर 1959 को जन्मे जोशी ने गवर्नमेंट इंजीनिय¨रग कॉलेज कराड़ महाराष्ट्र से सिविल इंजीनिय¨रग में डिग्री प्राप्त की है. उन्होंने नोराड छात्रवृत्ति के तहत ट्रोण्डहैइम नॉर्वे की प्रतिष्ठित नॉर्वेजियन टेक्निकल इंस्टीट्यूट से हाइड्रोपावर डेवलपमेंट एंड प्ला¨नग में स्नातकोत्तर योग्यता भी प्राप्त की है.

जोशी ने अक्टूबर 1982 में एनएचपीसी में अपने कैरियर की शुरुआत सलाल परियोजना (जम्मू व कश्मीर) से प्रोबेशनरी एक्जीक्यूटिव (इंजीनियरिंग) के रूप में की थी. अपने 35 साल से अधिक विशिष्ट कार्यकाल के दौरान सलाल, दुलहस्ती, कुरीचू परियोजना (भूटान), तीस्ता-5, तीस्ता लो डैम-3 और पार्बती-3, चुटक, चमेरा-3, पार्वती-2 आदि में कार्य किया. इन्होंने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आरबिट्रेशन, 'द हेग', में किशनगंगा परियोजना के लिए एनएचपीसी का प्रतिनिधित्व किया और ¨सधु जल संधि के मुद्दे पर हाल ही में वा¨शगटन डीसी में सरकारी स्तर की बैठकों में भाग लिया.

24 September 2017

सवेरे का नजारा सच में कुछ अलग ही ऐहसास देता है

सुबह-सुबहा घर से निकला जल्दी जल्दी करते देरी – देरी का गाना गाते फटाफट से नाशता कर लू आखिर ऑफिस तो रोज जाना है …तो क्या देर हुई तो भूखी क्यों जाऊ…अपने आप से बात करते …ओफिस निकलने की तैयारी में काम करते …अब निकल गया घर से ओह ओह… कितनी देर हो गई कोई ….. दूकाने बंद सब पर ताले लगें हैं सड़क पर झाडू मारने वाले हैं जो नीचे जमीन पर देखे बस अपना काम कर रहें हैं …उनकी झाडू से उठती जमीन से धूल जैसे सुबहा की ठंण्ड में जम गई हैं आकाश तक उड़ान भरना चहाती हो पर इस ठण्ड ने उसे सीमित कर दिया हो …और मैं उससे बचता मूहं पर कपड़ा रखे आंखों पर चश्मा हर चीज़ पर विचार करता अपने आप से बाते करता चले जा रहा हूं जैसे ना जाने आज क्या होगया है विचार थम हि नहीं रहे …कुछ अजीब सा मन है आज हर चीज पर विचार मंथन तेज हैं …
 
ओह वहा क्या नजारा है जैसे ही उगते सूरज पर नजर पढ़ी सब बदल ही गया प्रतीत हूआ …झाडू से उड़ती धूल सफेद कोहरे सी लगने लगा आंखों पर लगा चश्मा हटाना पड़ा खूबसूरत बेहद खूब सूरत क्या बात है कीतना सुनहरा सवेरा स्कूल के दिन याद आया स्कूल बस से इसी नजारे को देखता था जब घर से निकलता था… तो अंधेरा ही होता था… स्कूल बस में बैठे वो ठीठूरना और खिड़की से बहार झांकते जाना और लो उजाला हो गया स्कूल पहूंचने से पहले सूरज उगता था क्या खूब लगता था …हम्म्म… लम्बीं सी सांस छोड़ते काश वो दिन जीने को फिर मिल जाए …कितना अच्छा लगता था स्कूल जाना और कितना बोर है ऑफिस जाना और एक ही काम करना ….एक क्षण को ऐसे लग रहा हैं मानो अभी मेरा स्कूल बस आए और मुझे स्कूल ले जाए ….हॉय मेरा स्कूल कीतना अच्छा था और वो दिन …बस जल्दी चलूं लेट हो गया आज हे भगवान देर हो गया …हाहाहाहा…अपने आप से बात करते चूप कर लेट होगई … चल जल्दी और कदमों की रफ्तार तेज करते

अब अपने ऑफिस की ओर कदम बढातें जल्दी – जल्दी चलना ऑफिस की ओर जाते – जाते धूप भी खूब तेज हो जाती हैं …. सड़क किनारे सोते भीखारी और कुछ दुकानो के बहार सोते कर्मचारी और मजदूर …मुझे तो अपने कमरे में ही ठण्ढ लगता है और इन लोगो को तो खुले में सोना पड़ता हैं मौसम विभाग का अनुमान है आने वाले दिनों में और भी ठण्ढ बढ़ेगी …कैसे ये लोग सर्दी का सामना करेंगें …अपने आप से बाते करते पहुंच गया अपनी समाजिकता की दूनिया में जहां संविदा पे काम करतें है …तो कुछ ना मात्र मानदेय पर फिर लगता है कुछ अनुभव के लिए ये ही ठीक आखिर कोशिश तो करनी होगी ..और फिर उम्मीद पर दूनिया कायम है …कुछ चमत्कार की उम्मीद करना कोई गलत बात नहीं …जब तक ना थको तो ये ही सही …वरना ……………………..

वंशवाद की अजगरी बेल में जकड़ा लोकतंत्र

वंशवाद की अजगरी बेल ने आज पूरे लोकतंत्र को अपने जबड़े में जकड़ रखा है. भारतीय लोकतंत्र में सड़ांध फैलाने वाले वंशवाद की एक झलक आपको दिखाता हूं. देश की सियासत में सबसे मजबूत गांधी परिवार, पूरब में पटनायक परिवार, पश्चिम में..ठाकरे परिवार, शरद पवार परिवार..उत्तर में..मुलायम परिवार, लालू परिवार…दक्षिण में करूणानिधि.. बताने के लिए तो लिस्ट बहुत बड़ी है. ये वैसे उदाहरण हैं जिनकी पार्टी ही परिवार है और परिवार ही पार्टी है. ऐसे मौकों पर मेरा दुखद दिल चित्कार कर कहता है कि परिवारवाद ने लोकतंत्र को सामंती बना दिया है. आलम ये है कि कई परिवारिक पार्टियों में पहली, दूसरी और अब तीसरी पीढ़ी राजनीति में उतर आयी है. और आम जनता भी विचारधारा से परे होकर ऐसे सामंती परिवारों को ताज पहनाती है.

जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राजनीति में परिवारवाद की शुरूआत की थी और अपने जीवन काल में ही अपनी बेटी इंदिरा गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनवा दिया तभी से यह आशंका जाहिर हो रही थी की देश की आजादी का मूख्य उद्देश्य अब शायद ही पूरा हो. अब कांग्रेस नेहरू परिवार की जागीर बन जाएगी. और ये भविष्यवाणी सत्य हुई. आज कांग्रेस, नेहरू परिवार जो कि अब ‘गांधी परिवार’ के रूप में बदल गया है, उसकी जागीर बन कर रह गयी है. यही आलम आज दूसरी कई क्षेत्रीय पार्टियों का भी है.

उत्तर प्रदेश में जो पारिवारिक लड़ाई पार्टी की लड़ाई बन कर चल रही है. वह अपवाद नहीं है. परिवार में विरासत की लड़ाई स्वभाविक है. दुखद यहां यह है कि कुछ ‘निरा मूर्ख’ इन दलों में सेक्यूलरिज्म और समाजवाद देखते हैं. ‘समाजवादी पार्टी प्राइवेट लिमिटेड’ में पॉवर पॉलिटिक्स की पूरी फिल्मी कहानी आजकल सबका मनोरंजन कर रही है. सियासत का इतना घटिया रूप मैंने अपने छोटे से जीवन में कभी नहीं देखा था. हां.. छोटा ही सही लेकिन ऐसे फिल्मी प्रोमो हम दक्षिण में डीएमके और चंद्रबाबू नायडू के परिवार में भी देख चुके हैं.

यूपी में अब ‘सेवक’ से ‘स्वामी’ की मुद्रा में आने के लिए बेटे ने अपने पिता की ‘संपत्ति’ पर दमदारी से दावा ठोक दिया है. यूं समझिए ‘संपत्ति’ हड़प चुका है, कुछ सियासी दांवपेंच के माहिर लोगों की मानें तो सब मुलायम का सियासी शतरंज पर बिछी चाल है अपने बेटे को विरासत परिवार में निर्विवाद सौंपने की. जम्हूरियत की आंखें उम्मीदबर हैं और दिल बेचैन. जुबां खामोश है, पर जेहन में सवालों का शोर है. क्या यही समाजवाद है? आज लोहिया की आत्मा रो रही होगी. इस फैमली ड्रामे पर ही नहीं..अपने चेलों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चलाते देखकर. लोहिया के चेले मुलायम सिंह यादव, राम विलास पासवान और लालू प्रसाद लोहिया के रास्ते पर चलते हुए परिवारवाद के विरोध की राजनीति से ही पनपे. लेकिन आज ये परिवारवाद के सबसे बड़े उदाहरण हैं. यह सोचकर भविष्य को इतिहास के इस घटना से घिन आएगी कि लोहिया के रास्ते बिहार पर सालों तक राज करने वाले लालू जब जेल गये तो अपने पत्नी को मुख्यमंत्री बना दिये.

आज तमाम आरोप और विवाद का ढिंढोरा आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पीटें लेकिन वंशवादी बेल से अपनी खुद की पार्टी को भी मुक्त रखने के लिए उनकी व्यक्तिगत तारीफ तो करनी ही होगी. आप चौंक जाएंगे ये जानकर कि पीएम के परिवार के सभी सदस्य अनजान सी जिंदगी जी रहे हैं. पीएम मोदी इकलौते प्रधानमंत्री हैं जिनके परिवार का कोई भी सदस्य प्रधानमंत्री आवास में नहीं रहता है. शायद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब के भी परिवार का कोई सदस्य राष्ट्रपति भवन में नहीं रहता था. मैं तो उस परिवार की भी तारीफ करता हूं जो इतनी समझ रखता है कि वे मोदी के परिजन हैं किसी प्रधानमंत्री के नहीं. वर्तमान सियासत में ऐसा संतुलन दर्शनीय है, अकल्पनीय है, अद्भुत है. ऐसा नहीं है कि बीजेपी में परिवारवाद को बढ़ावा देने वाले नेताओं की कमी है. लेकिन पीएम मोदी की इस बात के लिए आप तारीफ करेंगे कि वह यहां भी वंशवाद को पनपने नहीं दिये. काफी अंकुश लगाये हुए हैं. एक बार सोचिएगा जरूर.. सोचने में ना कोई खर्च है ना ही कोई पाबंदी. बस सोचते समय अपने चश्मे को उतार कर रख दीजिएगा.

जातिवाद और सम्प्रदायवाद के अजगरी बेल में जकड़ा लोकतंत्र

आज जितने भी राजनीतिक दल और नेता है वो जनता को धर्म और जाती के आधार पर आपस में लड़ाकर शासन करना चाहती है. आज जितने भी पार्टिया है जनता को हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर तो कभी अगड़ा और पिछड़ा के नाम पर बाटकर समस्याओ के मकड़जाल में इसप्रकार उलझा दी है की आने वाले दिनों में हर एक जनता अपने-आप के लिए एक समस्या बन जाएगा. इसलिए आज धर्म और जाती के इतिहास को जानना काफी महत्वपूर्ण है.

सबसे पहले हिन्दू धर्मो की बात करते है. हिन्दू धर्म जीवन जीने की एक पद्धती है. इसका कोई संस्थापक नहीं है. इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है. इसे ‘वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म’ भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है. यह वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए है. इसके आलावा जितने भी धर्म है वो हिन्दू धर्मो से ही निकला है. जैसे इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद थे. हजरत मुहम्मद का जन्म 570 ई. में मक्का में हुआ था. हजरत मुहम्मद को 610 ई. में मक्का के पास हीरा नाम की गुफा में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. इसी प्रकार सिख धर्म की स्थापना गुरु नानक देव ने की थी. गुरु नानक देव का जन्म 1469 ईस्वी में पंजाब में हुआ था. इसी प्रकार जैन धर्म का संस्थापक ऋषभ देव को माना जाता है, जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर थे और भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत के पिता थे. इसी प्रकार बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध है. भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी, नेपाल में हुआ था. इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है की जितने भी धर्म है वो हिन्दू धर्म से ही निकला है और हजरत मुहम्मद, गुरु नानक देव, ऋषभ देव, महात्मा बुद्ध सहित जितने भी धर्मगुरु है जिन्होंने विभिन्न धर्मो की स्थापना की है सभी के पूर्वज हिन्दू धर्म के ही थे.

अब बात करते है जाती की. हिंदू शास्त्रों के मत से जाति का मूल वर्णो में है. ऋग्वेद के 10 वें मंडल के पुरुषसूक्त के अनुसार ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजाओं से राजन्य (क्षत्रिय), जंघाओं से वैश्य और पैरों से शूद्र उत्पन्न हुए. इस प्रकार मानव सृष्टि के प्रारंभ से ही चार वर्णो की उत्पत्ति मानी गई है. हिंदू धर्मशास्त्रों ने जातियों को नहीं, वर्णों को मान्यता दी है. पहले यह व्यवस्था कर्म प्रधान थी. यह विभक्तिकरण कतई जन्म पर आधारित नहीं है. अगर कोइ सेना में काम करता था तो वह क्षत्रिय हो जाता था चाहे उसका जन्म किसी भी जाति में हुआ हो. वर्णव्यवस्था में पुरोहित तथा अध्यापक वर्ग ब्राह्मण, शासक तथा सैनिक वर्ग राजन्य या क्षत्रिय, उत्पादक वर्ग वैश्य और शिल्पी एवं सेवक वर्ग शूद्रवर्ण होते थे. कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता अनुसार कुछ भी हो सकता था. योग्यता के आधार पर इस तरह धीरे-धीरे एक ही तरह के कार्य करने वालों का समूह बनने लगा और यही समूह बाद में अपने हितों की रक्षा के लिए समाज में बदलता गया. उक्त समाज को उनके कार्य के आधार पर पुकारा जाने लगा. जैसे की कपड़े सिलने वाले को दर्जी, कपड़े धोने वाले को धोबी, बाल काटने वाले को नाई, शास्त्री पढ़ने वाले को शास्त्री आदि. ऐसे कई समाज निर्मित होते गए जिन्होंने स्वयं को दूसरे समाज से अलग करने और दिखने के लिए नई परम्पराएँ निर्मित कर ली. जैसे कि सभी ने अपने-अपने कुल देवता अलग कर लिए. अपने-अपने रीति-रिवाजों को नए सिरे से परिभाषित करने लगे, जिन पर स्था‍नीय संस्कृति का प्रभाव ही ज्यादा देखने को मिलता है. उक्त सभी की परंपरा और विश्वास का सनातन धर्म से कोई संबंध नहीं.

शस्त्रों में जाति का विरोध : ऋग्वेद, रामायण एवं श्रीमद्भागवत गीता में जन्म के आधार पर ऊँची व निचली जाति का वर्गीकरण, अछूत व दलित की अवधारणा को वर्जित किया गया है. जन्म के आधार पर जाति का विरोध ऋग्वेद के साथ-साथ श्रीमद्भागवत गीता में भी मिलता है. अगर ऋग्वेद की ऋचाओं व गीता के श्लोकों को गौर से पढ़ा जाए तो साफ परिलक्षित होता है कि जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कोई आधार नहीं है. मनुष्य एक है. जो हिंदू जाति व्यवस्था को मानता है, वह वेद विरुद्ध कर्म करता है. धर्म का अपमान करता है. सनातन हिंदू धर्म मानव के बीच किसी भी प्रकार के भेद को नहीं मानता. उपनाम, गोत्र, जाति आदि यह सभी कई हजार वर्ष की परंपरा का परिणाम है. अतः जाति-व्यवस्था की संकीर्णता छोड़ दें. गुण, कर्म और स्वभाव के अनुसार ही वर्ण का निर्णय होना होता है, जिसे जाति मान लिया गया है. वर्ण का अर्थ समाज या जाति से नहीं वर्ण का अर्थ स्वभाव और कर्म से माना जाता है. स्मृति के काल में कार्य का विभाजन करने हेतु वर्ण व्यवस्था को व्यवस्थित किया गया था. जो जैसा कार्य करना जानता हो, वह वैसा ही कार्य करें, जैसा की उसके स्वभाव में है तब उसे उक्त वर्ण में शामिल समझा जाए. आज इस व्यवस्था को जाति व्यवस्था या सामाजिक व्यवस्था समझा जाता है. कुछ व्यक्ति योग्यता या शुद्धाचरण न होते हुए भी स्वयं को ऊँचा या ऊँ‍ची जाति का और पवित्र मानने लगे हैं और कुछ अपने को नीच और अपवित्र समझने लगे हैं. बाद में इस समझ को क्रमश: बढ़ावा मिला मुगल काल अंग्रेज काल और फिर भारत की आजादी के बाद भारतीय राजनीति के काल में जो अब विराट रूप ले ‍चुका है. धर्मशास्त्रों में क्या लिखा है यह कोई जानने का प्रयास नहीं करता और मंत्रों तथा सूत्रों की मनमानी व्याख्‍या करता रहता है.

परिणामस्वरुप भारत की सांस्कृतिक एकता टूट गई और लोग अनेको जातियों में बट गई और आजादी के बाद जितने भी राजनीतिक दल आए वो इसे समाप्त करने के बजाए जनता को विभिन्न जातियों और उपजातियो में बाटने का ही काम किया. आज भारतीयों के बीच इस कदर फूट डाल दी गई है कि अब मुश्किल है यह समझना कि हिंदू या मुसलमान, दलित या ब्राह्मण कोई और नहीं यह उनका अपना ही खून है और वह अपने ही खून के खिलाफ क्यों हैं?

राजनीतिज्ञों और नेताओं के लिए ‘नेता पात्रता परीक्षा’ लागू हो तो बदल जाएगी सियासत

हमारे देश में नेता आपस में ही गाली गाली खेल रहे हैं, जिससे देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है. अपने वोट बैंक को साधने के लिए नेता अब किसी भी हद तक उतरने को तैयार हैं. कहते हैं की किसी भी नियम या कानून को अगर सही समय पर लागू किया जाए तो उसका प्रभाव आने वाले भविष्य को भी सुरक्षित करता है. आज देश की मौजूदा राजनीति के स्तर को अगर बचाना है, अब एक ऐसे नए क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता है, जिसके द्वारा राजनीति करने वाले नेताओं की क्वालिटी को बढ़ाया जा सके. इसके लिए देश में नेताओ के लिए भी एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए, जिसके लिए पूरे देश में ‘ नेता पात्रता परीक्षा’ का आयोजन किया जाना चाहिए. दरअसल, राजनीति एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा जनता अपना जनप्रतिनिधि चुनकर उनके द्वारा अपने अधिकारों को प्राप्त करती है. इन्हीं जनप्रतिनिधियो को ‘नेता’ कहते हैं. कहा जाता है कि राजनीति और नेतागिरी सीखने की कोई पाठशाला नहीं होती, बल्कि ये तो व्यक्ति के अंदर ही होता है, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. हमारे देश में मौजूदा समय की राजनीति का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिसके लिए कहीं न कही नेता ही जिम्मेदार हैं और इस कारण हमारे समाज का स्तर भी गिरता चला जा रहा है.

जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में कहा था कि जिन अनपढ़ लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब झोंक दिया, शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता लगाकर उन्हें चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता. प्रथम प्रधानमंत्री की इस दलील से मैं बिलकुल सहमत हूं. लेकिन क्या नेहरू आज के सन्दर्भ में भी यही कहते? उस वक्त के स्वतंत्रता सेनानी आज चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. 1947 से 2017 के मानव संसाधन में अंतर भी आया है. उस वक्त देश की बड़ी संख्या के लिए संसाधन मुहैया नहीं थे तो देश को यह हक भी नहीं था कि इस तरह की कोई अनिवार्यता थोपी जाए. तब देश के लोग 90 साल तक आज़ादी के लिए जूझ रहे थे. साक्षरता दर 12% थी. आज माहौल अलग है, संसाधन बेहतर हैं. देश की साक्षरता 74% के आस-पास है. ऐसे में क्या न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास भी नहीं रखी जा सकती? संविधान सभा के इस मामले में सन्दर्भ को समझिए और वक़्त को ध्यान में रखिए, ज़रूरी नहीं कि वो आज भी प्रासंगिक है.

क्या एक प्रतिनिधि के लिए आठवीं और दसवीं पास करना भी दूभर है? देश में ओपन स्कूल भी चल रहे हैं. हक़ छीना नहीं जा रहा, आपको हक़ के लिए मेहनत करने को कहा जा रहा है जैसे देश में तमाम सरकारी नौकरियों और अलग-अलग पेशों के लिए योग्यता निर्धारित की गयी है. ये योग्यता कुछ छूट के साथ दलित, पिछड़ों, आदिवासी सबके लिए है. अगर दलितों और आदिवासियों को इस मामले में हानि हो रही है तो फिर बाकी क्षेत्रों में भी हो रही होगी. तो सिर्फ राजनीतिज्ञों के लिए ही छूट क्यों ली जा रही है? हालांकि सभी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था है.

ये भी गौर करने वाली बात है कि कैसे लोग हमारे लोकतंत्र में प्रतिनिधि बन रहे हैं, ये ‘कास्ट’ से ज़्यादा ‘क्लास’ निर्धारित करती है. पैसे वाला ही चुनाव लड़ पा रहा है. टिकट उसी को मिल पा रही है या किसी नेता के बहुत खास व्यक्ति को. रिश्तेदार तो पहली पसंद हैं ही. सहानुभूति पैदा करने के लिए एक और आयाम दिखाया जाता है कि प्रत्याशी दलित है, पिछड़ा है, मुस्लिम है. उसका कम पढ़ा-लिखा होना जायज़ ठहराने की कोशिश भी होती है. याद कीजिये कि आज कितने ऐसे राजनेता हैं जो सच में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक की जिन्दगी जी रहे हैं. बिहार के मंत्री तेजस्वी यादव को किस बात की कमी रह गई कि वो आठवीं तक ही पढ़ पाए. सिर्फ तेजस्वी यादव ही क्यों, और भी कई समृद्ध पृष्ठभूमि के प्रतिनिधि कम-पढ़े लिखे या अनपढ़ मिल जाएंगे. क्यों किसी पढ़े-लिखे दलित/पिछड़ी/गरीब पृष्ठभूमि के नौकरशाह को या कर्मचारी को मजबूर किया जाए कि वो ऐसे मंत्री/सांसद/विधायक के मातहत काम करे. जिस तरह के प्रतिनिधि हमें राज्य और केंद्र में मिल रहे हैं, उन्हें देखकर कतई नहीं लग रहा कि उन्हें दसवीं या बारहवीं पास भी नहीं होना चाहिए. किस हिसाब से कुछ लोगों को लग रहा है कि एक आम गरीब पिछड़ा व्यक्ति या आदिवासी आसानी से चुनाव लड़ने का अपना हक़ ले पा रहा है, जीत पा रहा है और उसके दसवीं पास होने की शर्त उसे रोक लेगी.

आज हर पार्टी बसपा, सपा, जदयू, शिवसेना, बीजेपी आदि का उम्मीदवार सोशल मीडिया पर आने की कोशिश कर रहा है. राज्यसभा और लोकसभा में ज़्यादातर प्रतिनिधि की ये कौनसी स्थिति की बात की जा रही है जहाँ पांचवी पास होना भी अनिवार्य नहीं हो सकता. Representation of the People Act, 1951 में संशोधन किया जा सकता है और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को शामिल किया जा सकता है लेकिन दिलचस्पी कोई नहीं ले रहा और ज़ाहिर है ग्राम पंचायत के चुनावी नियम की तमाम आलोचनाओं के बीच कोई दबाव भी बनाया नहीं जा रहा.

वाकई अगर सच में राजनीति के स्तर को बढ़ाना है, तो हमें राजनीति में कुछ बड़े नियमो को लागू करना होगा. मेरे विचारानुसार नेताओं के लिए भी राजनीति में प्रवेश करने के लिए एक न्यूनतम अर्हता निश्चित की जानी चाहिए. जिस प्रकार शिक्षकों को नये शिक्षा कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा देनी होती है, उसी प्रकार नेताओं के लिए भी ‘नेता पात्रता परीक्षा अर्थात LET’ होनी चाहिए. इसे अनिवार्य रूप से लागू किया किया चाहिए. एक नेता समाज का नेतृत्व करता है और समाज का स्तर दिन ब दिन जिस प्रकार गिरता जा रहा है, उसे देखकर समय-समय पर आवाजें भी उठी हैं कि नेताओं का कुछ न कुछ पढ़ा लिखा होना बहुत अनिवार्य है.

मेरा मतलब ये है कि कम से कम नेताओं के लिए भी न्यूनतम अर्हता के रूप में नेता पात्रता परीक्षा आयोजित कराई जाए, जिसके अंतर्गत नेताओं से जनता,समाज और देश के हितों से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाएं. इसे अनिवार्य रूप से पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. इस परीक्षा को पास करने वाले व्यक्ति को एक सर्टिफिकेट दिया जाए, जिसे लेकर वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ सकता हो. इसके लिए एक कमेटी बनाई जाए जो पूरे देश में एक साथ इस परीक्षा को आयोजित करा सके. इसको पास करने वाला ही किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े.

हमारे देश में निचले स्तर से लेकर ऊपर तक हर जगह किसी भी नौकरी या कार्य के लिए एक न्यूनतम अर्हता की आवश्यकता होती है. सभी को परीक्षाएं देनी होती है, तब जाकर नौकरी प्राप्त होती है फिर आखिर हमारे देश में नेताओ के लिए किसी प्रकार की परीक्षा की व्यवस्था क्यों नही है? क्या जनता जिसे अपने मत देकर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शासन करने के लिए चुनती है, तो क्या उसका थोड़ा भी पढ़ा-लिखा आवश्यक नही है? मौजूदा समय में अब जनता को भी महसूस हो रहा है कि नेताओं का पढ़ा-लिखा होना भी आवश्यक है. भारतीय राजनीति का गिरता स्तर सचमुच गहरी चिंता का विषय है. एक दौर था जब विपक्षी दलों के प्रति भी बेहद आदर एवं सम्मानसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता था. आज सत्ता पक्ष हों या विरोधी दलों के नेता दोनों की जुबान बुरी तरह से फिसलने लगी है. राजनातिक सहिष्णुता नाम मात्र को देखने को मिलती है. दरअसल, अगर नेता पात्रता परीक्षा को अगर अनिवार्य रूप से भारतीय राजनीति में लागू कर दिया जाए तो निःसन्देह देश में बहुत बड़ा परिवर्तन होगा.