चीन के श्यामन में ब्रिक्स का 9वां शिखर सम्मेलनसंपन्न हुआ. ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करने के लिए चीन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया. 9वें ब्रिक्स सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका देश शामिल हैं. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों को ‘ज्वलंत मुद्दों’ के समाधान में कूटनीतिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए. शी ने हाल ही में भारत के साथ डोकलाम में हुए गतिरोध का सीधे उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा कि मुद्दों के हल का आधार ‘शांति और विकास’ होना चाहिए क्योंकि विश्व ‘संघर्ष और टकराव’ नहीं चाहता. उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स देशों को वैश्विक शांति और स्थायित्व बरकरार रखने की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.’
 
शी जिनपिंग ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय स्थिति में हमारे बीच मतभेदों के बावजूद हम पांचों देश विकास के क्षेत्र में समान स्तर पर हैं. हम सभी देशों के एक ही आवाज में सभी की समस्याओं को लेकर बोलना चाहिए, ताकि विश्व में शांति और विकास आगे बढ़ सके. बैठक के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के हालात को देखते हुए, ब्रिक्स देशों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. इस दौरान चीनी राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि वह ब्रिक्स देशों में बिजनेस ऑपरेशन, विकास को बढ़ावा देने के लिए 4 मिलियन यूएस डॉलर की मदद करेंगे. जिनपिंग ने कहा कि दुनिया में जो भी मुद्दे इस समय चल रहे हैं, वह हमारे हिस्सेदारी के बिना निपट नहीं सकते हैं.
 
वहीं, ब्रिक्स बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सभी देशों में शांति के लिए ब्रिक्स देशों का एकजुट रहना जरूरी है. मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के पांचों देश अभी समान स्तर पर हैं. विश्व में शांति के लिए सहयोग जरूरी है, एकजुट रहने पर ही शांति और विकास होगा. मोदी ने यह भी कहा कि हमारे केन्द्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए और प्रत्यावर्तनीय रिजर्व व्यवस्था और आईएमएफ के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए. साथ ही, पीएम ने कहा कि हमने अपने देश में काले धन के खिलाफ जंग छेड़ी है. हमारा लक्ष्य स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा में सुधार लाना है. ब्रिक्स बैंक ने कर्ज देना शुरू कर दिया है, जिसका सही उपयोग होना चाहिए. मोदी ने कहा कि हमारा देश युवा है यही हमारी ताकत है. हमने गरीबी से लड़ने के लिए सफाई का अभियान छेड़ा है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की मजबूत पार्टनरशिप से ही विकास होगा.

शियामिन घोषणा-पत्र
 भारत को आतंक के खिलाफ ब्रिक्स देशों को एकजुट करने में चीन की सरजमीं पर ब़़डी कूटनीतिक कामयाबी मिली. ब्रिक्स के नौवें शिखर सम्मेलन में पहली बार पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा के अलावा आईएस, अलकायदा, तालिबान व अन्य पर चिंता जताई गई. 43 पेज के शियामिन घोषणा-पत्र में चीन समेत पांचों सदस्य देशों ने आतंकवाद की एक स्वर से निंदा करते हुए उसका मिलकर मुकाबला करने का संकल्प लिया. आतंक पर अब तक पाक का समर्थन करने वाला चीन भी चार अन्य देशों के दबाव में झुकने को मजबूर हुआ. शियामिन शिखर सम्मेलन की सबसे ब़़डी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पांचों सदस्य देशों के शासन प्रमुखों का एकजुट होना रहा. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति माइकल टेमर और द. अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने आतंकवाद की क़़डे शब्दों में निंदा की.
शियामिन घोषणा-पत्र में कहा गया की दुनियाभर में हुए आतंकी हमलों, चाहे वो कहीं भी घटित हुए हों और उसे किसी ने भी अंजाम दिया हो, की क़़डी निंदा करते हैं. आतंकी हमलों को उचित ठहराने के लिए कोई तर्क नहीं दिया जा सकता. क्षेत्र की सुरक्षा की स्थिति और तमाम आतंकी संगठनों की हिंसा से ब्रिक्स देश चिंतित हैं. आतंकी हमले करने, संगठन बनाने व आतंकियों का समर्थन करने वाले देशों की जवाबदेही तय होना चाहिए. साथ ही आंतरिक मामलों में दखल नहीं देने और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के लिए अंतराष्ट्रीय कानून के अनुसार सहयोग ब़़ढाने का निर्णय लिया गया. उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की निंदा की गई.
पहली बार ब्रिक्स घोषणा-पत्र में पाक में चल रहे आतंकी संगठनों के नामों का खास तौर पर जिक्र किया गया. इससे संकेत मिलता है कि पाक से चल रहे इन गुटों के खिलाफ चीन के रख में बदलाव आया है. घोषषणा–पत्र में आतंक शब्द का 17 बार उपयोग किया गया है. इसे भारत की कूटनीतिक जीत ही कहा जाएगा कि जो काम ब्रिक्स की पिछली गोवा बैठक में नहीं हो सका वह शियामिन में हो गया. गोवा घोषणा-पत्र में चीन के विरोध के कारण पाक समर्थित आतंकी संगठनों के नाम नहीं जु़ड सके थे. घोषणापत्र में तालिबान, आईएस, अलकायदा और उसके सहयोगी, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, ईस्टर्न तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान और हिज्ब-उत-ताहिर जैसे आतंकी संगठनों का जिक्र किया गया है. तुर्कीस्तान इस्लामिक मूवमेंट चीन के शिनजियांग प्रांत उइगर स्वायत्त क्षेत्र में सक्रिय है.