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20 September 2017

‘अल्‍प-पोषण से निपटने के लिए मिशन मोड’ पर पहला राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन नई दिल्‍ली में आयोजित


महिला व बाल विकास मंत्री श्रीमती मेनका संजय गांधी ने नई दिल्‍ली में ‘अल्‍प-पोषण से निपटने के लिए मिशन मोड’ पर पहले राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का उद्घाटन किया. सम्‍मेलन का आयोजन महिला व बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण मुक्‍त भारत मिशन-2022 के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए पेयजल व स्‍वच्‍छता मंत्रालय तथा स्‍वास्‍थ्‍य व परिवार कल्‍याण मंत्रालय के सहयोग से किया. इस अवसर पर श्रीमती मेनका संजय गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम की अभूतपूर्व सफलता के बाद महिला व बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण समाप्‍त करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है. इसके लिए पूरक पोषण की गुणवत्ता में सुधार करने तथा वितरण व्‍यवस्‍था को कार्यकुशल बनाने की आवश्‍यकता है. श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि आईसीडीएस कार्यक्रम के तहत महिला को 1000 कैलोरी तथा बच्‍चों को 600 कैलोरी उपलब्‍ध कराने की जरूरत है. 
पूरे कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया कि महज भोजन मुहैया कराने के बजाए ‘पोषकता से युक्‍त भोजन’ के जरिए पोषक आहार उपलब्‍ध कराया जाए. इसे लागू करने के लिए नीति में बदलाव की जरूरत है. इस संबंध में महिला व बाल विकास मंत्रालय पूरक पोषण के लिए दिशा-निर्देश शीघ्र ही जारी करेगा. इसी प्रकार अति कुपोषित बच्‍चों (एसएएम) के लिए भी मंत्रालय दिशा-निर्देश जारी करेगा. मंत्री महोदया ने बच्‍चों के संरक्षण के साथ-साथ उनके पोषण के महत्‍व को भी रेखांकित किया.
सम्‍मेलन में जिलाधिकारियों/उपायुक्‍तों, जिला स्‍तर के अन्‍य अधिकारियों, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण के अधिकारियों, पेयजल और स्‍वच्‍छता विभाग के अधिकारियों, 113 चिन्हित जिलों के अधिकारियों तथा मुख्‍य सचिवों ने अल्‍प पोषण, विकास अवरुद्ध होने इत्‍यादि विषयों पर चर्चाएं कीं. सम्मेलन के कुछ महत्वपूर्ण सत्र थे- भोजन की पोषकता, स्तनपान के माध्यम से स्थायी समाधान, आहार विविधीकरण, मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, निगरानी को उच्‍च स्‍तरीय बनाना आदि. श्रीमती मेनका संजय गांधी ने एनएफएचएस -3 और एनएफएचएस -4 के बीच दस साल की अवधि के दौरान तीन राज्यों छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात को विकास अवरुद्ध होने की समस्‍या में पर्याप्त कमी लाने के लिए पुरस्कार प्रदान किया. श्रीमती मेनका गांधी ने आदिवासी बच्‍चों के बीच पोषण में सुधार के लिए समाधानों पर आधारित “फॉरेस्‍ट लैन्‍टर्न्स” नामक एक पुस्तक का विमोचन किया.
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