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20 September 2017

ओला ने सात राज्य पर्यटन बोर्डों के साथ सहयोग किया

इस वर्ष  विश्व पर्यटन दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र की थीम के अनुरूप, परिवहन के लिए भारत के सबसे लोकप्रिय ऐप्प ओला ने 7 प्रमुख राज्य पर्यटन विभागों एवं कॉर्पोरेट के साथ गठजोड़ किया है. इसके तहत 'रिस्पांसिबल टूरिज्म' को बढ़ावा दिया जायेगा. रिस्पांसिबल टूरिज्म के बारे में जागरुकता फैलाने और देश के कम ज्ञात स्थानों के लिए सड़क यात्रा को बढ़ावा देने के लिए, ओला ने लोकप्रिय अभिनेत्री, मॉडल, लेखिका और ट्रैवेल व्लॉगर बनीं शेनाज़ ट्रेजरी को लिया है. शेनाज़ ओला स्टेशन के साथ भारत के 7 राज्यों में 21 स्थानों पर 12 दिनों तक भ्रमण करेंगी. ए अंतर-षहरी यात्रा के लिए एक स्मार्ट मोबिलिटी समाधान ओला आउट स्टेशन जैसे समाधानों को विशिष्ट रूपसे निर्मित किया गया. ओला के कैम्पेन को श्री प्रियांक एम. खडग़े, माननीय सूचना प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी, और पर्यटन राज्य मंत्री, कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरू के विधान सभा से हरी झंडी दिखाई.

16 सितंबर को शेनाज़ कर्नाटक से शुरूआत कर 6 दूसरे राज्यों की सड़क यात्रा आरंभ की. इस यात्रा का समापन 12 दिनों के बाद मुंबई में होगा. ओला ने कहा, "हमें देषभर में पर्यटन बोर्डों से साझेदारी करके खुशी  हो रही है. हम सभी ओला स्टेशन के जरिये संयुक्त रूप से एक जिम्मेदारीपूर्ण पर्यटन पारितंत्र बनायेंगे. ओला आउट स्टेशन कैटेगरी भारतीय रेलवेज में नेटवर्क के लिहाज से एकमात्र दूसरी श्रेणी है और यह देष भर में 1000 से अधिक शहरों एवं कस्बों को जोड़ती है और पर्यटन को बेहद जरूरी तेजी प्रदान करती है. पर्यटन का आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक असर बहुत गहरा होता है, यह रिस्पांसिबल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है.


ओला आउट स्टेशन के साथ, हमारा इरादा इस ढंग से पर्यटन को प्रोत्साहित करना है कि स्थानीय संस्कृति एवं मनोभावों का सम्मान किया जाये, पर्यावरण हितैशी बना जाये और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान करे. हम यात्रियों को देश के कोने-कोने में मौजूद कम ज्ञात अद्भुत स्थानों पर फोकस करने के लिए प्रेरित करेंगे और साथ ही हमारे जैसे देष में पर्यटन के असली सामर्थ को सामने लाने का प्रयास भी करेंगे." शेनाज़ ट्रजरी ने कहा, "मैंने कई देषों एवं द्वीपों की यात्रा की है लेकिन भारत का मेरे दिल में खास स्थान है. इसके हर राज्य में कुछ न कुछ अनूठी बात है. एक जोशीली यात्री होने के नाते, मुझे लगता है कि देश में हमारे प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण काफी खतरे से जूझ रहा है. हमारे लिए पहले से कहीं अधिक सजगता, सम्मान एवं जिम्मेदारी से यात्रा करने की जरूरत है.


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