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24 September 2017

हिंदुत्व की अवधारणा

हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है. सिंधु नदी से समुद्र तक के भारतवर्ष को अपनी पितृभूमि और पुण्यभूमि मानने की विचारधारा को ही हिंदुत्व नाम दिया गया है. पितृभूमि के वारिस हुए बिना पुण्यभूमि की विरासत का दावा अधूरा होगा. जिनकी पितृभूमि और पुण्यभूमि दोनों एक ही हो वही राष्ट्र के असली वारिस हैं. राष्ट्रवादी सोच की अभिव्यक्ति देशभक्ति में भी होनी चाहिए. पितृभूमि पर गर्व होने के साथ ‘मातृभूमि’ से प्रेम हमारी राष्ट्रीय चेतना को प्रदर्शित करती है. ज़ाहिर है हिंदुत्व को हिंदू धर्म से कोई लेना देना नहीं है.

हिंदुत्व एक जीवन-दर्शन और जीवन पद्धति है जो मानव समाज में फ़ैली समस्याओं को सुलझाने में सहायक है. इसको हम धर्म के समानार्थी नहीं मान सकते हैं, लेकिन अभी तक इसे धर्म के अर्थ में ही गलत तरीके से समझा गया है. धर्म मात्र पूजा की एक पद्धति है जबकि हिंदुत्व एक दर्शन है जो मानव जीवन का समग्रता से विचार करता है. हिन्दुत्व शब्द केवल मात्र हिन्दू जाति के कोरे धार्मिक और आध्यात्मिक इतिहास को ही अभिव्यक्त नहीं करता. हिन्दू जाति के लोग विभिन्न मत मतान्तरों का अनुसरण करते हैं. इन मत मतान्तरों व पंथों को सामूहिक रूप से हिन्दूमत अथवा हिन्दूवाद नाम दिया जा सकता है. आज भ्रान्तिवश हिन्दुत्व व हिन्दूवाद को एक दूसरे के पर्यायवाची शब्दों के रूप में प्रयोग किया जा रहा है. यह चेष्टा हिन्दुत्व शब्द का बहुत ही संकीर्ण प्रयोग है. हिन्दुत्ववादियों के अनुसार हिन्दुत्व किसी भी धर्म या उपासना पद्धति के ख़िलाफ़ नहीं है.

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