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24 September 2017

राष्ट्र का संघ राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (R.S.S.) एक राष्ट्रवादी संघटन है जिसके सिद्धान्त हिंदुत्व में निहित और आधारित हैं. यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना में संघ अथवा आर.एस.एस. के नाम से अधिक प्रसिद्ध है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्‍थापना सन् 27 सितंबर 1925 को विजय दशमी के दिन मोहिते के बाड़े नामक स्‍थान पर डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने की थी. संघ के ज्यादातर कार्यों का निष्पादन शाखा के माध्यम से ही होता है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर सुबह या शाम के समय एक घंटे के लिये स्वयंसेवकों का परस्पर मिलन होता है. वर्तमान में पूरे भारत में संघ की लगभग पचास हजार से ज्यादा शाखा लगती हैं. वस्तुत: शाखा ही तो संघ की बुनियाद है जिसके ऊपर आज यह इतना विशाल संगठन खड़ा हुआ है. शाखा की सामान्य गतिविधियों में खेल, योग, वंदना और भारत एवं विश्व के सांस्कृतिक पहलुओं पर बौद्धिक चर्चा-परिचर्चा शामिल है. शाखा किसी मैदान या खुली जगह पर एक घंटे की लगती है. शाखा में व्यायाम, खेल, सूर्य नमस्कार, समता (परेड), गीत और प्रार्थना होती है. सामान्यतः शाखा प्रतिदिन एक घंटे की ही लगती है. शाखा में “कार्यवाह” का पद सबसे बड़ा होता है. उसके बाद शाखाओं का दैनिक कार्य सुचारू रूप से चलने के लिए “मुख्य शिक्षक” का पद होता है. शाखा में बौद्धिक व शारीरिक क्रियाओं के साथ स्वयंसेवकों का पूर्ण विकास किया जाता है. जो भी सदस्य शाखा में स्वयं की इच्छा से आता है, वह “स्वयंसेवक” कहलाता हैं.
 
संघ के बारे थोड़ा बताना चाहूँगा उन धर्मनिरपेक्ष बंदरो को जो अपने आकाओ के इसारे पर नाचने की हमेशा नाटक करते रहते है. संघ के 5 स्‍वयंसेवको के साथ शुरू हुई विश्व की पहली शाखा आज 50 हजार से अधिक शाखाओ में बदल गई और ये 5 स्‍वयंसेवक आज करोड़ो स्‍वयंसेवको के रूप में हमारे समाने है. संघ की विचार धारा में राष्ट्रवाद, हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र, राम जन्मभूमि, अखंड भारत, समान नागरिक संहिता जैसे विजय है जो देश की समरसता की ओर ले जाता है. कुछ लोग संघ की सोच को राष्ट्र विरोधी मानते है क्‍योकि उनका काम ही है यह मानना, नही मानेगे तो उनकी राजनीतिक गतिविधि खत्‍म हो जाती है. राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की हमेशा अवधारणा रही है कि ‘एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे’ बात सही भी है. जब समूचे राष्ट्र और राष्ट्र के नागरिको को एक सूत्र मे बाधा गया है तो धर्म के नाम पर कानून की बात समझ से परे हो जाती है, संघ द्वारा समान नागरिक संहिता की बात आते ही संघ को सामप्रदायिक होने की संज्ञा दी जाती है. अगर देश के समस्‍त नागरिको के लिये एक नियम की बात करना सामप्रदायिकता है तो मेरी नज़र में इस सामप्रदायिकता से बड़ी देशभक्ति और नही हो सकती है.
 
संघ ने हमेशा कई मोर्चो पर अपने आपको स्‍थापित किया है. राष्ट्रीय आपदा के समय संघ कभी यह नही देखता‍ कि किसकी आपदा मे फसा हुआ व्‍यक्ति किस धर्म का है. आपदा के समय संघ केवल और केवल राष्ट्र धर्म का पालन करता है कि आपदा मे फसा हुआ अमुख भारत माता का बेटा है. गुजरात में आये भूकम्प और सुनामी जैसी घटनाओ के समय सबसे आगे अगर किसी ने राहत कार्य किया तो वह संघ का स्‍वयंसेवक था. संघ के प्रकल्पो ने देश को नई गति दी है, जहाँ दीन दयाल शोध संस्थान ने गांवों को स्वावलंबी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है. संघ के इस संस्‍थान ने अपनी योजना के अंतगत करीब 80 गांवों में यह लक्ष्य हासिल कर लिया और करीब 500 गांवों तक बिस्‍तार किए जाने हैं. दीन दयाल शोध संस्थान के इस प्रकल्प में संघ के हजारों स्‍वयंसेवक बिना कोई वेतन लिए मिशन मानकर अपने अभियान मे लगे है.

अनेक संगठन हैं जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित हैं जो स्वयं को संघ परिवार के सदस्य बताते हैं. संघ दुनिया के लगभग 80 से अधिक देशो में कार्यरत है. संघ के लगभग 50 से ज्यादा संगठन राष्ट्रीय ओर अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है ओर लगभग 200 से अधिक संघठन क्षेत्रीय प्रभाव रखते हैं. जिसमे कुछ प्रमुख संगठन है जो संघ की विचारधारा को आधार मानकर राष्ट्र और सामाज के बीच सक्रिय है. जिनमे कुछ राष्ट्रवादी, सामाजिक, राजनैतिक, युवा वर्गों के बीच में कार्य करने वाले, शिक्षा के क्षेत्र में, सेवा के क्षेत्र में, सुरक्षा के क्षेत्र में, धर्म और संस्कृति के क्षेत्र में, संतो के बीच में, विदेशो में, अन्य कई क्षेत्रों में संघ परिवार के संघठन सक्रिय रहते हैं. संघ की प्रार्थना भी भारत माता की शान को चार चाँद लगता है, संघ की प्रार्थना की एक एक लाईन राष्‍ट्र के प्रति अपनी सच्‍ची श्रद्धा प्रस्‍तुत करती है मेरी पोस्‍ट मुस्लिम भाई मै आप से अभिभूत हूँ पर संघ की प्रार्थना और उसके अर्थ को पढ़ा जा सकता है. संघ का गाली देने से संघ का कुछ बिगड़ने वाला नही है अप‍ितु गंदे लोगो की जुब़ान की गन्‍दगी ही परिलक्षित होती है.

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