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23 September 2017

पहली स्कॉर्पीन पनडुब्बी आईएनएस कलवरी नौसेना में शामिल

छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी 'कलवरी' भारतीय नौसेना को सौंप दी गई है. नौसेना को लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा थी. इस 'कलवरी' को अगले महीने नौसेना के बेड़े में शामिल करने की संभावना है. मेक इन इंडिया के तहत बनी यह पनडुब्बी दुश्मनों की नजर से बचकर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. 'कलवरी' को दुनिया की सबसे घातक पनडुब्बियों में से एक माना जा रहा है. भारत में ऐसी 5 और पनडुब्बी तैयार की जाएंगी. नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ये पनडुब्बी जल्द ही अपना काम करना शुरू कर देगी. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के एक अधिकारी ने कहा, हमने नौसेना को स्कॉर्पीन क्लास की पहली पनडुब्बी सौंप कर इतिहास लिख दिया है.

फिलहाल भारतीय नौसेना के बेड़े में शिशुमार क्लास की चार छोटी, जबकि सिंधुघोष क्लास की 9 बड़ी पारंपरिक पनडुब्बियां हैं. इनमें ज्यादातर 25 साल की औसत उम्र को पार कर चली हैं. अब स्कॉर्पीन सीरीज की कुल छह पनडुब्बियां देश में बनाने की योजना है. 'कलवरी' का नाम टाइगर शार्क पर रखा गया है. 'कलवरी' को प्रोजेक्ट-75 के तहत विकसित किया गया है. इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने फ्रांस की कंपनी डीसीएनएस के साथ मिलकर तैयार किया है. 'कलवरी' को मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में बनाया गया है. फ्रांसीसी कंपनी ने इसकी डिजाइन तैयार की और इसके लिए टेक्नोलॉजी भी मुहैया कराई.

'कलवरी' डीजल और इलेक्ट्रिक पनडुब्बी है. इसमें लगे विशेष तकनीक 'निर्देशित शस्त्र' दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम है. टॉरपीडो के साथ हमलों के अलावा इससे पानी के अंदर भी हमला किया जा सकता है. साथ ही सतह पर पानी के अंदर से दुश्मन पर हमला करने की खासियत भी इसमें है. 

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