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18 September 2017

हाइपरलूप वन ग्लोबल चैलेंज में दो भारतीय टीमें बनीं विजेता, बेंगलुरु-चेन्नै और चेन्नै-मुंबई रूट के लिए प्रस्ताव का चयन

भारत की दो टीमें उन 10 विजेताओं में शामिल हैं जिन्होंने हाइपरलूप वन ग्लोबल चैलेंज जीत लिया है.इन दोनों टीमों ने भारत में दो अलग-अलग रूटों की पहचान की है जिनपर हाइपरलूप टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से सबसे तेज रफ्तार की यात्रा सुनिश्चित की जाएगी. हाइपरलूप के ग्लोबल चैलेंज में चयनित इन दोनों टीमों के नाम हैं- एईसीओएम इंडिया और हाइपरलूप इंडिया. हाइपरलूप ने एक बयान जारी कर बताया कि एईसीओएम इंडिया का चयन बेंगलुरु-चेन्नै के बीच 334 किमी में और हाइपरलूप इंडिया का चयन मुंबई-चेन्नै के बीच 1,102 किमी में लो-प्रेसर ट्यूब के अंदर पॉड जैसे वाहन का परिचाल सुनिश्चित करने के लिए किया गया है. अन्य विजेता टीमों में यूएस, यूके, मेक्सिको और कनाडा की टीमें शामिल हैं.

साल 2012 में एलन मस्क ने न्युमैटिक ट्यूब ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई और इसे हाइपरलूप का नाम दिया. इसके तहत की लगभग गैर-मौजूदगी वाले ट्यूब से पॉड जैसा वाहन चलाकर यात्रियों और सामानों की आवाजाही एयरलाइ से भी ज्यादा स्पीड से सुनिश्चित की जाती है. हाइपर लूप सिस्टम पर बंगलूरू-चेन्नई और चेन्नई मुम्बई 2 मार्गों मे सबसे तेज रफ्तार ट्रेंस शीग्र दौड़ने वाले हैं. भारत में अपार मौकों के मद्देनजर हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नॉलजीज इंक (एचटीटी) नाम की एक अन्य कंपनी ने विजयवाड़ा और अमरावती के बीच हाइपरलूप चलाने के लिए पिछले सप्ताह ही आंध्र प्रदेश इकनॉमिक डिवेलपमेंट बोर्ड के साथ समझौता पत्र पर दस्तखत किया. हाइपरलूप से दोनों शहरों के बीच की दूरी महज पांच मिनट में तय हो जाएगी.

हालांकि अब दुनिया में इस टेक्नॉलजी का वाणिज्यिक इस्तेमाल कहीं पर नहीं हुआ है. हालांकि अमेरिका के लॉस ऐंजिलिस स्थित हाइपरलूप वन ने जुलाई में नेवाडा रेगिस्तान में 500 मीटर ट्रैक पर टेस्ट ड्राइव किया. कंपनी ने 310 किमी प्रति घंटे की स्पीड हाइपरलूप चलाने में कामयाबी हासिल की. एक बयान में कहा गया है, 'इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नॉलजी और ट्रांसपोर्टेशन के एक्सपर्ट पैनल ने प्रस्तावों की गहरी छानबीन के बाद सैकड़ों आवेदकों में से पांच देशों की 10 टीमों का चुनाव किया. हाइपरलूप वन सार्थक व्यवसाय और इंजिनियरिंग संसाधन देकर प्रत्येक विजेता टीम के साथ उनके द्वारा चयनित रूटों पर हाइपरलूप चलाने की कमर्शल वायबिलिटी तय करेगा.'

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