मासिक करेंट अफेयर्स

24 September 2017

सवेरे का नजारा सच में कुछ अलग ही ऐहसास देता है

सुबह-सुबहा घर से निकला जल्दी जल्दी करते देरी – देरी का गाना गाते फटाफट से नाशता कर लू आखिर ऑफिस तो रोज जाना है …तो क्या देर हुई तो भूखी क्यों जाऊ…अपने आप से बात करते …ओफिस निकलने की तैयारी में काम करते …अब निकल गया घर से ओह ओह… कितनी देर हो गई कोई ….. दूकाने बंद सब पर ताले लगें हैं सड़क पर झाडू मारने वाले हैं जो नीचे जमीन पर देखे बस अपना काम कर रहें हैं …उनकी झाडू से उठती जमीन से धूल जैसे सुबहा की ठंण्ड में जम गई हैं आकाश तक उड़ान भरना चहाती हो पर इस ठण्ड ने उसे सीमित कर दिया हो …और मैं उससे बचता मूहं पर कपड़ा रखे आंखों पर चश्मा हर चीज़ पर विचार करता अपने आप से बाते करता चले जा रहा हूं जैसे ना जाने आज क्या होगया है विचार थम हि नहीं रहे …कुछ अजीब सा मन है आज हर चीज पर विचार मंथन तेज हैं …
 
ओह वहा क्या नजारा है जैसे ही उगते सूरज पर नजर पढ़ी सब बदल ही गया प्रतीत हूआ …झाडू से उड़ती धूल सफेद कोहरे सी लगने लगा आंखों पर लगा चश्मा हटाना पड़ा खूबसूरत बेहद खूब सूरत क्या बात है कीतना सुनहरा सवेरा स्कूल के दिन याद आया स्कूल बस से इसी नजारे को देखता था जब घर से निकलता था… तो अंधेरा ही होता था… स्कूल बस में बैठे वो ठीठूरना और खिड़की से बहार झांकते जाना और लो उजाला हो गया स्कूल पहूंचने से पहले सूरज उगता था क्या खूब लगता था …हम्म्म… लम्बीं सी सांस छोड़ते काश वो दिन जीने को फिर मिल जाए …कितना अच्छा लगता था स्कूल जाना और कितना बोर है ऑफिस जाना और एक ही काम करना ….एक क्षण को ऐसे लग रहा हैं मानो अभी मेरा स्कूल बस आए और मुझे स्कूल ले जाए ….हॉय मेरा स्कूल कीतना अच्छा था और वो दिन …बस जल्दी चलूं लेट हो गया आज हे भगवान देर हो गया …हाहाहाहा…अपने आप से बात करते चूप कर लेट होगई … चल जल्दी और कदमों की रफ्तार तेज करते

अब अपने ऑफिस की ओर कदम बढातें जल्दी – जल्दी चलना ऑफिस की ओर जाते – जाते धूप भी खूब तेज हो जाती हैं …. सड़क किनारे सोते भीखारी और कुछ दुकानो के बहार सोते कर्मचारी और मजदूर …मुझे तो अपने कमरे में ही ठण्ढ लगता है और इन लोगो को तो खुले में सोना पड़ता हैं मौसम विभाग का अनुमान है आने वाले दिनों में और भी ठण्ढ बढ़ेगी …कैसे ये लोग सर्दी का सामना करेंगें …अपने आप से बाते करते पहुंच गया अपनी समाजिकता की दूनिया में जहां संविदा पे काम करतें है …तो कुछ ना मात्र मानदेय पर फिर लगता है कुछ अनुभव के लिए ये ही ठीक आखिर कोशिश तो करनी होगी ..और फिर उम्मीद पर दूनिया कायम है …कुछ चमत्कार की उम्मीद करना कोई गलत बात नहीं …जब तक ना थको तो ये ही सही …वरना ……………………..

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