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24 September 2017

संयुक्त राष्ट्र में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को किया बेनकाब

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया और कहा कि जो देश विनाश, मौत और निर्दयता का विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक है वो आज इस मंच से मानवता का उपदेश देकर पाखंड का चैम्पियन बन गया है. उन्होंने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तानी नेता इस पर विचार करें कि आज भारत की पहचान आईटी की महाशक्ति की है और पाकिस्तन ‘आतंकवाद का निर्यात करने वाले’ और एक आतंकवादी देश के तौर पर बदनाम क्यों है. वह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी के गुरुवार के संबोधन का हवाला दे रही थीं जिन्होंने भारत पर मानवाधिकार के उल्लंघन और सरकार प्रायोजित आतंकवाद का आरोप लगाया था.

सुषमा ने सवाल किया, ‘‘आज मैं पाकिस्तान के नेताओं से कहना चाहूंगी कि क्या आपने कभी सोचा है कि भारत और पाकिस्तान एक साथ आजाद हुए लेकिन आज भारत की पहचान दुनिया में आईटी की महाशक्ति के रूप में क्यों हैं और पाकिस्तान की पहचान आतंकवाद का निर्यात करने वाले देश और एक आतंकवादी देश की क्यों है?’’ भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए उसे ‘टेररिस्तान’ करार दिया था और कहा था कि पाकिस्तान की जमीन से आतंकवाद पैदा हो रहा है और आतंकवाद का निर्यात होता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक को लगातार दूसरे साल हिंदी में संबोधित करते हुए सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद का निर्यात किए जाने के बावजूद भारत ने प्रगति की. उन्होंने कहा, ‘‘भारत की आजादी के बाद पिछले 70 वर्षों में कई पार्टियों की सरकारें रही हैं और हमने लोकतंत्र को बनाए रखा और प्रगति की. हर सरकार ने भारत के विकास के लिए अपना योगदान दिया.’’ 
 
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हमने वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थान स्थापित किए जिन पर दुनिया को गर्व है. परंतु पाकिस्तान ने दुनिया और अपने लोगों को आतंकवाद के अलावा क्या दिया?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने वैज्ञानिक, विद्वान, डॉक्टर, इंजीनियर पैदा किए और आपने क्या पैदा किया? आपने आतंकवादियों को पैदा किया...आपने आतंकी शिविर बनाए हैं, आपने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और हक्कानी नेटवर्क पैदा किया है.’’ सुषमा ने कहा कि पाकिस्तान ने जो पैसा आतंकवाद पर खर्च किया, अगर अपने विकास पर खर्च करता तो आज दुनिया अधिक सुरक्षित और बेहतर होती. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बनाए गए आतंकवादी समूह सिर्फ भारत को नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि अफगानिस्तान और बांग्लादेश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. सुषमा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि पाकिस्तान ने ‘राइट टू रिप्लाइ’ मांगा और उसे एक साथ तीन देशों को जवाब देना पड़ा हो. उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या यह आपके नापाक मंसूबे को नहीं दिखाता है?’’

प्रधानमंत्री अब्बासी का हवाला देते हुए सुषमा ने कहा कि पाकिस्तानी नेता ने भारत पर आरोप लगाने में बहुत अधिक समय जाया कर दिया. पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की ओर से शांति और मित्रता की बुनियाद पर विदेश नीति तामीर किए जाने के अब्बासी के दावे पर सुषमा ने कहा कि वह नहीं जानतीं कि जिन्ना ने किन सिद्धांतों की पैरवी की थी, लेकिन इतना जरूर कह सकती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभालने के बाद शांति और दोस्ती का हाथ बढ़ाया. उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह जवाब देना चाहिए कि आपके देश ने इस प्रस्ताव को क्यों ठुकराया.’’
अपने भाषण में सुषमा स्वराज ने आतंकवाद के साथ ही तेजी से होते जलवायु परिवर्तन और वैश्विक गरीबी जैसे अहम मुद्दे भी उठाए. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा का यह लगातार दूसरा संबोधन था. कल यूएन सुरक्षा परिषद में ही पाकिस्तान के प्रधानंमत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने आतंकवाद और कश्मीर का राग अलापा था तो आज भारत ने सुषमा के भाषण के जरिए साबित भी कर दिया कि पाकिस्तान वाकई ‘टेररिस्तान’ बन चुका है.
 
कल संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने भारत पर उनके देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया था. दरअसल पाकिस्तान को लग रहा है कि आतंकवाद की पनाहगाह होने के चलते उस पर कड़े प्रतिबंध लग सकते हैं. लिहाजा पाकिस्तान की कोशिश है कि उल्टे भारत को ही आतंकी गतिविधियों के नाम पर घेरा जाए. चूंकि भारत का भी अब यही मानना है कि पाकिस्तान का मुकम्मल इलाज तभी संभव है जबकि उसे आतंकी देश घोषित किया जाए.
अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से मुलाकात की
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन से मुलाकात की. इन राजनेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और इंडो-यूएस राजनीतिक संबंधों को मजबूती देने पर विचार-विमर्श किया. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के कई पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की. सुषमा ने इस मुलाकात में आतंकवाद और यूएस में एच1बी वीजा के मुद्दे को उठाया.

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