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06 October 2017

आरबीआई ने चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 7.3 से घटाकर 6.7 फीसदी किया

भारतीय रिजर्व बैंक की चालू वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट और और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 6 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी पर बरकरार रखा है. आरबीआई की समिति ने अपनी बैठक में जीएसटी के प्रभावों पर भी चर्चा की है और आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान 7.3 से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है. आरबीआई ने दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति 4.2 से 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. मुख्य मुद्रास्फीति को टिकाऊ आधार पर चार प्रतिशत के करीब रखने का लक्ष्यनिर्धारित किया गया है. 

नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किए जाने के फैसले के बाद प्रमुख नीतिगत दर रेपो 6.0 प्रतिशत पर बनी रहेगी. रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यक बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है. चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने रेपो दर के साथ साथ रिवर्स रेपो दर को 5.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. रिवर्स रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक, बैंकों से नकदी उठाता है. इससे पहले, पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.0 प्रतिशत कर दिया था.

रिजर्व बैंक ने 2017-18 की चौथी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा, मौद्रिक नीति समिति का निर्णय मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख के अनुरूप है. यह मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के दायरे के साथ 4 प्रतिशत पर बरकरार रखने के लक्ष्य अनुसार है. मौद्रिक नीति समिति के छह सदस्यों में पांच ने फैसले के पक्ष में जबकि एक सदस्य रवींद्र ढोलकिया ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के पक्ष में मतदान किया. रिजर्व बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीति के जून में रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर आने के बाद इसमें अब वृद्धि देखी जा रही है और मार्च तिमाही में इसके 4.6 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है. 

मौद्रिक समीक्षा की मुख्य बातें: 
  • प्रमुख नीतिगत दर को छह प्रतिशत पर यथावत रखा गया.
  • रिवर्स रेपो दर 5.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित.
  • 2017-18 के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 7.3 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत किया.
  • दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति 4.2 से 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान.
  • जीएसटी क्रियान्वयन की वजह से लघु अवधि में विनिर्माण क्षेत्र की संभावनाएं अनिश्चित.
  • मुख्य मुद्रास्फीति को टिका आधार पर चार प्रतिशत के करीब रखने का लक्ष्य.
  • केंद्रीय बैंक, बैंकों के बही खाते से कंपनियों की दबाव वाली संपत्तियों के हल के लिए काम करेगा.
  • हालिया संरचनात्मक सुधारों से कारोबारी धारणा, पारदर्शिता और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने को लेकर स्थिति सुधरी.
  • केंद्रीय बैंक ने कारोबार सुगमता में सुधार और जीएसटी सरलीकरण के लिये समन्वित प्रयासों पर बल दिया.
  • सस्ते आवास कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाने पर बल.
  • मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 5-6 दिसंबर को.

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