मासिक करेंट अफेयर्स

11 October 2017

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई

दिल्ली-एनसीआर में इस बार दिवाली के मौके पर पटाखों की बिक्री नहीं होगी. ये फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को सुनाया है. इसके साथ ही इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की तरफ़ से जारी किए गए सारे स्थाई और अस्थाई लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा है कि कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री एक नवंबर, 2017 यानी दिवाली गुज़र जाने के बाद फिर से की जा सकेगी. पुलिस को ये ज़िम्मेदारी दी गई है कि वो सुनिश्चित करें कि किसी भी तरह से पटाखों की अवैध बिक्री न होने पाए. कोर्ट ने एक आठ सदस्यीय कमेटी बनाने का भी आदेश दिया है जिसकी अध्यक्षता केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष करेंगे. इस कमेटी को दिल्ली में प्रदूषण पर अपनी रिपोर्ट 31 दिसंबर तक सौंपनी होगी.

हालांकि नवंबर, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पाबंदी लगाई थी, लेकिन इसी बरस 12 सितंबर 2017 के अपने आदेश में कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री को शर्तों के साथ इजाज़त दी थी. अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस प्रतिबंध के साथ ये देखना चाहता है कि क्या दिवाली से पहले पटाखों के बिक्री पर बैन से प्रदूषण में कमी आती है या नहीं. लेकिन पटाखे जलाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है. जिन लोगों ने पहले से पटाखों की खरीदारी कर ली है वो इसे जला सकते हैं.

पटाखों की बिक्री पर बैन की याचिका तीन बच्चो की ओर से दायर की गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन बच्चों के फेफड़े दिल्ली में प्रदूषण के कारण ठीक से विकसित नहीं हो पाए हैं. इस मामले में वकील और याचिकाकर्ता हरिप्रिया पद्मनाभन का कहना है, "सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से वो बेहद खुश हैं. इस फ़ैसले से किसी को नुकसान नहीं होगा. जिन दुकानदारों ने पटाखे खरीद रखे हैं, वो अपने पटाखे दिल्ली-एनसीआर के बाहर बेच सकते हैं."


पिछले साल दीपावली के बाद दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए पिछले साल 11 नवंबर को पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी. दिल्ली में प्रदूषण का मसला कई सालों से उठ रहा है. काफ़ी कोशिशों के बाद भी इसमें कमी नहीं आई है. मौजूदा आंकड़ों को देखें तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक दिल्ली की हवा अभी भी सांस लेने लायक नहीं है. बोर्ड के मुताबिक ऐसे वातावरण में रहने से सांस से जुड़ी बीमारी होने का ख़तरा बढ़ जाता है. वहीं, पर्यावरण मामलों के जानकार गुनीत सिंह कहते हैं, "दिल्ली में साल में सिर्फ़ चार से पांच दिन ही दिल्लीवासियों को अच्छी हवा मिल पाती है. पिछले साल दिवाली के बाद प्रदूषण मापने वाला यंत्र भी वास्तविक स्थिति को मापने में असमर्थ रहा था."
वो कहते हैं, "इस साल भी हवा काफ़ी ख़राब है. पटाखों की बिक्री पर बैन के पीछे इरादा तो अच्छा है, लेकिन इसके लागू कर पाना मुश्किल है."


पटाखा विक्रेताओं के लिए असमंजस की स्थति बन गई है. अपने पहले फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर लगी रोक कुछ शर्तों के साथ वापस ले ली थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में कहा था कि दिल्ली में पटाखों की बिक्री के लिए पुलिस की निगरानी में लाइसेंस दिए जाएं. ज़्यादा से ज़्यादा 500 अस्थाई लाइसेंस ही दिए जा सकेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 2016 में दिए गए लाइसेंस में से 50 फ़ीसदी को ही इस बार लाइसेंस दिया जाएगा. लेकिन दिवाली से दस ही दिन पहले कोर्ट का ये फ़ैसला उन तमाम पटाखा विक्रेताओ के लिए परेशानी ले कर आया है, जिनके दुकान पटाखों से भरे पड़े हैं. पटाखा विक्रेता सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से काफ़ी निराश हैं. उनका कहना है कि इस फ़ैसले से उनको काफ़ी नुक़सान होगा. 

No comments:

Post a comment