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03 October 2017

उच्च शिक्षण संस्थानों में एंट्रेंस एग्जाम के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन

उच्च शिक्षण संस्थाओं के लिए सीबीएसई जैसी संस्थाओं से प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के बोझ को कम करने की पहल करते हुए सरकार ने सभी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए स्वायत्त प्रमुख परीक्षा संगठन के रूप में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की स्थापना करने का निर्णय लिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में आम बजट 2017-18 प्रस्तुत करते हुए उच्च शिक्षण संस्थाओं के लिए सभी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए स्वायत्त और स्व-संपोषित प्रमुख परीक्षा संगठन के रूप में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की स्थापना करने कीघोषणा की थी.

उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए परीक्षाएं कराने के लिए प्रस्तावित ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (एनटीए) छात्रों की रैंकिंग नहीं करेगी, बल्कि सिर्फ दाखिले के लिए योग्यता परीक्षा लेगी. एक उच्चस्तरीय बैठक में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को लेकर कई सुझाव दिए गए हैं. पीएमओ ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कहा है इन सुझावों को एनटीए के ड्राफ्ट में शामिल किया जाए. मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है. बैठक से कहा गया कि एनटीए को शुरू में वही एग्जाम कराने चाहिए, जो फिलहाल सीबीएसई करा रही है. एक बार जब एनटीए स्थापित हो जाएगा, फिर दूसरे एग्जाम कराए जा सकते हैं. टेस्ट को ज्यादा साइंटिफिक बनाने के लिए ऑनलाइन एग्जाम जरूरी कराने का भी सुझाव है. इसके लिए मौजूदा स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारना होगा.

पीएमओ ने कहा कि एनटीए एग्जाम में छात्रों को रैंकिंग देने की बजाय महज योग्यता परीक्षा ले. परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर छात्रों को रैंक दी जाती है, जिससे उनका उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन होता है. सुझाव दिया गया है एनटीए केवल क्वालिफाइंग एग्जाम कराए, यानी एक तय पर्सेंटाइल तक नंबर लाने वालों को सफल घोषित करे. एनटीए पर्सेंटाइल स्कोर देगा. अगर जरूरी हुआ तो संस्थान इंस्टीट्यूट पर्सेंटाइल के आधार पर सही कैंडिडेट चुनने के लिए एडिशनल टेस्ट ले सकते हैं. हालांकि, इसके लिए एग्जाम पैटर्न में बदलाव करना होगा. एनटीए बनने के बाद सीबीएसई और एआईसीटीई टेस्ट कराने की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएंगे. यह भी सुझाव है कि एनटीए साल में एक ही बार एग्जाम आयोजित न कर इसे दो बार या जरूरत हुई तो तीन बार भी करवा सकती है. इससे छात्रों को अच्छा परफॉर्म करने में मदद मिलेगी. साथ ही एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स की संख्या भी नियंत्रित रहेगी.

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