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13 October 2017

केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की मजबूती के लिए संकल्प और स्ट्राइव योजना को मंजूरी दी

केंद्र सरकार ने स्किल इंडिया मिशन को रफ्तार देने के लिए संकल्प और स्ट्राइव योजना को मंजूरी दी है. वर्ल्ड बैंक समर्थित 6555 करोड़ के दो कार्यक्रमों - स्किल एक्विजिशन एंड नॉलेज अवेयरनेस फॉर लिवलिहुड प्रमोशन यानी संकल्प और स्किल स्ट्रेंथनिंग फॉर इंडस्ट्रियल वैल्यू एनहेन्समेंट यानी स्ट्राइव को बुधवार को आर्थिक मंत्रालय के मंत्रिमंडलीय कमेटी ने मंजूरी दे दी. बैठक पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई थी. संकल्प 4,455 करोड़ रुपये की योजना है. केंद्र सरकार समर्थित इस योजना को वर्ल्ड बैंक ने 3300 करोड़ रुपये कर्ज दिया है. वहीं स्ट्राइव 2200 करोड़ रुपये की योजना है. इसकी आधी राशि वर्ल्ड बैंक कर्ज के तौर पर देगा. दोनों योजनाओं को लंबी और छोटी अवधि की कौशल विकास योजनाओं के लिए संस्थागत मजबूती के उ्ददेश्य से तैयार किया गया है.

केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीसीईए के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि हम इस निवेश के जरिये देश में 66 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रदाता संस्थानों की स्थापना करेंगे. ये संस्थान विदेशों में नौकरियों के लिए वैश्विक मानदंडों के हिसाब से कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराएंगे. बयान में कहा गया है कि करीब 30,000 लोगों को इन संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें इंटरनेशनल अवार्डिंग बॉडीज (आईएबी) से प्रमाणपत्र दिया जाएगा. प्रधान ने कहा कि प्रणाली की दक्षता और पारदर्शिता में सुधार के जरिये 500 आईटीआई का आदर्श आईटीआई के रुप में उन्नयन किया जाएगा और उनका उद्योग से जुड़ाव बढ़ाया जाएगा. स्ट्राइव योजना के तहत आईटीआई को प्रदर्शन सुधारने के लिए इन्सेंटिव दिया जाएगा. इनमें एसएमई में अप्रेंटिसशिप को प्रोत्साहित किया जाएगा. दोनों योजना से स्किल इंडिया मिशन 2015 को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. 

 स्किल इंडिया देश को विकसित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को पूरे भारत में लगभग 40 करोड़ भारतीयों, को विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत, 2022 तक प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से "कुशल भारत- कौशल भारत" योजना को शुरु किया. इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षित करके उनकी कार्य क्षमता को बढ़ावा देना है. मुख्यरुप से कौशल विकास योजना का उद्देश्य भारत के युवाओं के कौशल के विकास के लिये उन क्षेत्रों में अवसर प्रदान करना है जो कई वर्षों से अविकसित है. इसके साथ ही साथ विकास करने के नये क्षेत्रों की पहचान करके उन्हें विकसित करने के प्रयास करना है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शब्दों में, “कौशल विकास योजना, केवल जेब में रुपये भरना ऐसा नहीं है, बल्कि गरीबों के जीवन को आत्मविश्वास से भरना है.” 

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