मासिक करेंट अफेयर्स

05 October 2017

राष्ट्रपति की जिबूती यात्रा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जिबूती और इथियोपिया की अपनी चार दिन की यात्रा के पहले चरण में मंगलवार को जिबूती सिटी पहुंचे. यह राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा है. जिबूती की यात्रा करने वाले भारतीय नेता कोविंद की अगवानी यहां हवाई अड्डे पर जिबूती के प्रधानमंत्री कामिल मोहम्मद ने की. कोविंद ने कहा कि अदन की खाड़ी के पास स्थित जिबूत सामरिक रूप से अहम देश  है. हिंद महासागर में यह भारत के लिए महत्वपूर्ण भागीदार देश है. जिबूती की यात्रा पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष कोविंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच चिरकाल से संबंध रहा है.

 जिबूती को भारत के लिए एक अहम हिंद महासागरीय साझेदार करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रणनीतिक रूप से स्थित इस अफ्रीकी देश को 2015 में युद्ध प्रभावित यमन से भारतीयों को निकालने में भारत को मदद पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया. भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए मंगलवार को कोविंद ने कहा, हमें अपने साझे इतिहास और पहचान को फिर से ढूढने का प्रयास करना चाहिए. न केवल प्राचीन काल के संबंधों की दृष्टि से बल्कि समसामयिक साझेदारी के लिए भी अपनी साझी विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जररत है. उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था के अवसर और हिंद महासागर का संपर्क दोनों देशों के लिए प्रचुर संभावनाएं प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा, महासागर जो हमें जोडते हैं, भले ही नाम से हिंद हो लेकिन यह हम सभी का है. इसे हमें आपस में जोड़ने दीजिए जैसा कि इसने सदियों पहले किया था.

राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती यमन की खाड़ी की भांति ही रणनीतिक रूप से स्थित देश है. उन्होंने कहा, यह भारत के लिए महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय साझेदार देश है. वर्ष 2015 में यमन संकट के दौरान जिबूती राहत अभियान के तहत भारतीयों तथा अन्य देशों के नागरिकों को निकालने की भारतीय कोशिशों में सहयोगकारी रहा था और उसने अपनी हवाई पट्टी उपलब्ध करायी थी. उन्होंने कहा कि उनके लिए इस अफ्रीकी देश की यात्रा करने वाला प्रथम राष्ट्रपति बनना बडे सम्मान की बात है. उन्होंने कहा, यह कोई संयोग नहीं है कि यह अफ्रीका की यात्रा है, बल्कि सोच समझकर किया गया फैसला है। इस सुंदर महाद्वीप के साथ हमारे संबंध का हमारे दिलों में विशेष स्थान है. हम अफ्रीकी लोगों के साथ अपनी भाईचारा बढाने के लिए कटिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि भारत का उदय सहयोग के नए अवसरों के दरवाजे खोल रहा है. भारत और विश्‍व के बीच सेतु के निर्माण में हमारे प्रवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका है. 

 कोविंद ने कहा, भारत उच्च विकास पथ पर है. हमारे देश में आशावाद और रोमांच है. हमने 2022 तक आम लोगों के जीवन में एक बडा बदलाव लाने की बीडा उठायी है जब हम अपनी स्वतंत्रता का 75 वां साल मनायेंगे. हम विदेशों में अपने प्रवासी भारतीयों को गला लगाना चाहते हैं. उन्होंने कहा, वैसे तो हमारी सरकार के प्रतिनिधित्व के लिए हमारा एक राजदूत है लेकिन भारतीय समुदाय का हर सदस्य हमारे देश का प्रतिनिधि है. उन्होंने चाहे जिस रुप में जैसे व्यापारी, पेशेवर या कुशल श्रमिक के रूप में जिबूती को अपना घर बनाया है, उन्होंने अपने आसपास के लोगों के लिए निस्वार्थ और सर्मपित सेवा का जज्बा दिखाया है. भारतर का जिबूती के साथ 2016-17 में 28.4 करोड़ डालर का व्यापार था.

इस अफ्रीकी देश में कोविंद की यात्रा इस दृष्टि से काफी अहम है कि चीन ने जिबूती में अपना पहला विदेशी सैन्य अड्डा खोला है. उसने पिछले साल लॉजिस्टिक्स अड्डा का निर्माण शुर किया. इसका उपयोग खासकर यमन और सोमालिया के तटों पर शांति और मानवीय मिशन में हिस्सा लेने के लिए नौसेना के जहाजों की आपूर्ति के लिए किया जाएगा. यह चीन का पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा है. वैसे चीन आधिकारिक रप से इसे लॉजिस्टिक्स सुविधा बताता है. यमन से लोगों को निकालने के लिए ऑपरेशन राहत नामक अभियान जिबूती से भी चलाया गया था जो अदन की खाडी की दूसरी तरफ है.


भारत और जिबूती ने नियमित विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत के लिए आज यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा के दौरान एक समझौते पर दस्तखत किये।

Read more at: http://www.virarjun.com/category/world/--544960
भारत और जिबूती ने नियमित विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत के लिए आज यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा के दौरान एक समझौते पर दस्तखत किये। कोविंद और जिबूती के राष्ट्रपति उमर ग्वेलेह की बातचीत के बाद समझौते पर दस्तखत किये गये। कोविंद ने 2015 में संघर्ष प्रभावित यमन से भारतीयों को बचाने के लिए चलाये गये ऑपरेशन राहत के दौरान जिबूती की मदद के लिए ग्वेलेह का शुक्रिया अदा किया और समुद्री तथा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर ग"बंधन ाआईएसएा की जिबूती की सदस्यता के जल्द अनुमोदन की भी अपील की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फांसवा ओलोंद ने 2015 में पेरिस में हुए सीओपी21 सम्मेलन में संयुक्त रूप से आईएसए की शुरूआत की थी।आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा संपन्न देशों के बीच सहयोग के लिए विशेष मंच प्रदान करना और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इससे पहले आज कोविंद का यहां राष्ट्रपति भवन में परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।जिबूती और इथियोपिया की चार दिन की यात्रा के पहले चरण में कल यहां पहुंचे कोविंद पद संभालने के बाद से पहली विदेश यात्रा पर हैं। वह जिबूती की यात्रा करने वाले पहले भारतीय नेता हैं। इससे पूर्व भारतीय समुदाय का सम्बोधित करते हुए जिबूती को भारत के लिए एक अहम हिंद महासागरीय साझेदार करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रणनीतिक रुप से स्थित इस अफीकी देश को 2015 में युद्ध प्रभावित यमन से भारतीयों को निकालने में भारत को मदद पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया। जिबूती की यात्रा पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष कोविंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच चिरकाल से संबंध रहा है। कोविंद ने कहा, हमें अपने साझे इतिहास और पहचान को फिर से ढूढने का प्रयास करना चाहिए। न केवल प्राचीन काल के संबंधों की दृष्टि से बल्कि समसामयिक साझेदारी के लिए भी अपनी साझी विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जरुरत है। उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था के अवसर और हिंद महासागर का संपर्क दोनों देशों के लिए प्रचुर संभावनाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा,महासागर जो हमें जोड़ते हैं, भले ही नाम से हिंद हो लेकिन यह हम सभी का है। इसे हमें आपस में जोड़ने दीजिए जैसा कि इसने सदियों पहले किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती यमन की खाड़ी की भांति ही रणनीतिक रुप से स्थित देश है। उन्होंने कहा,यह भारत के लिए महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय साझेदार देश है। वर्ष 2015 में यमन संकट के दौरान जिबूती राहत अभियान के तहत भारतीयों तथा अन्य देशों के नागरिकों को निकालने की भारतीय कोशिशों में सहयोगकारी रहा था और उसने अपनी हवाई पट्टी उपलब्ध करायी थी।

Read more at: http://www.virarjun.com/category/world/--544960
भारत और जिबूती ने नियमित विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत के लिए आज यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा के दौरान एक समझौते पर दस्तखत किये। कोविंद और जिबूती के राष्ट्रपति उमर ग्वेलेह की बातचीत के बाद समझौते पर दस्तखत किये गये। कोविंद ने 2015 में संघर्ष प्रभावित यमन से भारतीयों को बचाने के लिए चलाये गये ऑपरेशन राहत के दौरान जिबूती की मदद के लिए ग्वेलेह का शुक्रिया अदा किया और समुद्री तथा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर ग"बंधन ाआईएसएा की जिबूती की सदस्यता के जल्द अनुमोदन की भी अपील की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फांसवा ओलोंद ने 2015 में पेरिस में हुए सीओपी21 सम्मेलन में संयुक्त रूप से आईएसए की शुरूआत की थी।आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा संपन्न देशों के बीच सहयोग के लिए विशेष मंच प्रदान करना और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इससे पहले आज कोविंद का यहां राष्ट्रपति भवन में परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।जिबूती और इथियोपिया की चार दिन की यात्रा के पहले चरण में कल यहां पहुंचे कोविंद पद संभालने के बाद से पहली विदेश यात्रा पर हैं। वह जिबूती की यात्रा करने वाले पहले भारतीय नेता हैं। इससे पूर्व भारतीय समुदाय का सम्बोधित करते हुए जिबूती को भारत के लिए एक अहम हिंद महासागरीय साझेदार करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रणनीतिक रुप से स्थित इस अफीकी देश को 2015 में युद्ध प्रभावित यमन से भारतीयों को निकालने में भारत को मदद पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया। जिबूती की यात्रा पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष कोविंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच चिरकाल से संबंध रहा है। कोविंद ने कहा, हमें अपने साझे इतिहास और पहचान को फिर से ढूढने का प्रयास करना चाहिए। न केवल प्राचीन काल के संबंधों की दृष्टि से बल्कि समसामयिक साझेदारी के लिए भी अपनी साझी विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जरुरत है। उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था के अवसर और हिंद महासागर का संपर्क दोनों देशों के लिए प्रचुर संभावनाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा,महासागर जो हमें जोड़ते हैं, भले ही नाम से हिंद हो लेकिन यह हम सभी का है। इसे हमें आपस में जोड़ने दीजिए जैसा कि इसने सदियों पहले किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती यमन की खाड़ी की भांति ही रणनीतिक रुप से स्थित देश है। उन्होंने कहा,यह भारत के लिए महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय साझेदार देश है। वर्ष 2015 में यमन संकट के दौरान जिबूती राहत अभियान के तहत भारतीयों तथा अन्य देशों के नागरिकों को निकालने की भारतीय कोशिशों में सहयोगकारी रहा था और उसने अपनी हवाई पट्टी उपलब्ध करायी थी।

Read more at: http://www.virarjun.com/category/world/--544960
भारत और जिबूती ने नियमित विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत के लिए आज यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा के दौरान एक समझौते पर दस्तखत किये। कोविंद और जिबूती के राष्ट्रपति उमर ग्वेलेह की बातचीत के बाद समझौते पर दस्तखत किये गये। कोविंद ने 2015 में संघर्ष प्रभावित यमन से भारतीयों को बचाने के लिए चलाये गये ऑपरेशन राहत के दौरान जिबूती की मदद के लिए ग्वेलेह का शुक्रिया अदा किया और समुद्री तथा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर ग"बंधन ाआईएसएा की जिबूती की सदस्यता के जल्द अनुमोदन की भी अपील की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फांसवा ओलोंद ने 2015 में पेरिस में हुए सीओपी21 सम्मेलन में संयुक्त रूप से आईएसए की शुरूआत की थी।आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा संपन्न देशों के बीच सहयोग के लिए विशेष मंच प्रदान करना और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इससे पहले आज कोविंद का यहां राष्ट्रपति भवन में परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।जिबूती और इथियोपिया की चार दिन की यात्रा के पहले चरण में कल यहां पहुंचे कोविंद पद संभालने के बाद से पहली विदेश यात्रा पर हैं। वह जिबूती की यात्रा करने वाले पहले भारतीय नेता हैं। इससे पूर्व भारतीय समुदाय का सम्बोधित करते हुए जिबूती को भारत के लिए एक अहम हिंद महासागरीय साझेदार करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रणनीतिक रुप से स्थित इस अफीकी देश को 2015 में युद्ध प्रभावित यमन से भारतीयों को निकालने में भारत को मदद पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया। जिबूती की यात्रा पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष कोविंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच चिरकाल से संबंध रहा है। कोविंद ने कहा, हमें अपने साझे इतिहास और पहचान को फिर से ढूढने का प्रयास करना चाहिए। न केवल प्राचीन काल के संबंधों की दृष्टि से बल्कि समसामयिक साझेदारी के लिए भी अपनी साझी विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जरुरत है। उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था के अवसर और हिंद महासागर का संपर्क दोनों देशों के लिए प्रचुर संभावनाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा,महासागर जो हमें जोड़ते हैं, भले ही नाम से हिंद हो लेकिन यह हम सभी का है। इसे हमें आपस में जोड़ने दीजिए जैसा कि इसने सदियों पहले किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती यमन की खाड़ी की भांति ही रणनीतिक रुप से स्थित देश है। उन्होंने कहा,यह भारत के लिए महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय साझेदार देश है। वर्ष 2015 में यमन संकट के दौरान जिबूती राहत अभियान के तहत भारतीयों तथा अन्य देशों के नागरिकों को निकालने की भारतीय कोशिशों में सहयोगकारी रहा था और उसने अपनी हवाई पट्टी उपलब्ध करायी थी।

Read more at: http://www.virarjun.com/category/world/--544960
भारत और जिबूती ने नियमित विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत के लिए आज यहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा के दौरान एक समझौते पर दस्तखत किये। कोविंद और जिबूती के राष्ट्रपति उमर ग्वेलेह की बातचीत के बाद समझौते पर दस्तखत किये गये। कोविंद ने 2015 में संघर्ष प्रभावित यमन से भारतीयों को बचाने के लिए चलाये गये ऑपरेशन राहत के दौरान जिबूती की मदद के लिए ग्वेलेह का शुक्रिया अदा किया और समुद्री तथा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर ग"बंधन ाआईएसएा की जिबूती की सदस्यता के जल्द अनुमोदन की भी अपील की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फांसवा ओलोंद ने 2015 में पेरिस में हुए सीओपी21 सम्मेलन में संयुक्त रूप से आईएसए की शुरूआत की थी।आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा संपन्न देशों के बीच सहयोग के लिए विशेष मंच प्रदान करना और सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। इससे पहले आज कोविंद का यहां राष्ट्रपति भवन में परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।जिबूती और इथियोपिया की चार दिन की यात्रा के पहले चरण में कल यहां पहुंचे कोविंद पद संभालने के बाद से पहली विदेश यात्रा पर हैं। वह जिबूती की यात्रा करने वाले पहले भारतीय नेता हैं। इससे पूर्व भारतीय समुदाय का सम्बोधित करते हुए जिबूती को भारत के लिए एक अहम हिंद महासागरीय साझेदार करार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रणनीतिक रुप से स्थित इस अफीकी देश को 2015 में युद्ध प्रभावित यमन से भारतीयों को निकालने में भारत को मदद पहुंचाने के लिए धन्यवाद दिया। जिबूती की यात्रा पर आने वाले पहले भारतीय राष्ट्राध्यक्ष कोविंद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों के बीच चिरकाल से संबंध रहा है। कोविंद ने कहा, हमें अपने साझे इतिहास और पहचान को फिर से ढूढने का प्रयास करना चाहिए। न केवल प्राचीन काल के संबंधों की दृष्टि से बल्कि समसामयिक साझेदारी के लिए भी अपनी साझी विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जरुरत है। उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था के अवसर और हिंद महासागर का संपर्क दोनों देशों के लिए प्रचुर संभावनाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा,महासागर जो हमें जोड़ते हैं, भले ही नाम से हिंद हो लेकिन यह हम सभी का है। इसे हमें आपस में जोड़ने दीजिए जैसा कि इसने सदियों पहले किया था। राष्ट्रपति ने कहा कि जिबूती यमन की खाड़ी की भांति ही रणनीतिक रुप से स्थित देश है। उन्होंने कहा,यह भारत के लिए महत्वपूर्ण हिंद महासागरीय साझेदार देश है। वर्ष 2015 में यमन संकट के दौरान जिबूती राहत अभियान के तहत भारतीयों तथा अन्य देशों के नागरिकों को निकालने की भारतीय कोशिशों में सहयोगकारी रहा था और उसने अपनी हवाई पट्टी उपलब्ध करायी थी।

Read more at: http://www.virarjun.com/category/world/--544960

1 comment: