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21 November 2017

19 नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस मनाया गया

19 नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस मनाया गया. वर्ष 2017 के लिए विश्व शौचालय दिवस का विषय "वेस्टवॉटर" है. यह दिवस पर्याप्त स्वच्छता के महत्व पर बल देता है और सभी के लिए सुरक्षित और स्वच्छ शौचालयों की पहुंच की सिफ़ारिश करता है. मूल रूप से 2001 में विश्व शौचालय संगठन द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी. यह दिवस अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता संकट की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए मनाया जाता है. विश्वभर में शौचालय के उपयोग को प्रेरित करने के लिए वर्ष 2001 में विश्व शौचालय संस्था का गठन हुआ. इसके द्वारा 53 देशों में 19 नवंबर को “विश्व शौचालय दिवस” मनाया जाता है. विश्व शौचालय संगठन एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संस्था है जो दुनिया भर में स्वच्छता और शौचालय की स्थिति में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है. संगठन के सभी सदस्य शौचालय की समस्या को खत्म करने और दुनिया भर में स्वच्छता के समाधान के लिए काम करते हैं.

शौचालय, एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बनाने और स्वास्थ्य में वृद्धि करने और लोगों की गरिमा और सुरक्षा (विशेष रूप से लड़कियों और महिलाओं) के संरक्षण में, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं. 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक लगभग 2.4 अरब लोग पर्याप्त स्वच्छता के बिना रह रहे हैं और दस में से एक व्यक्ति के पास खुले में शौच करने के अलावा और कोई चारा नहीं था. 2016 में WAS-Hwatch की रिपोर्ट के अनुसार असुरक्षित जल और अस्वच्छता के कारण दस्त की बीमारी प्रत्येक वर्ष 315,000 बच्चों की जान ले लेती है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार विश्व की अनुमानि ढाई अरब आबादी को पर्याप्त स्वच्छता मयस्सर नहीं है और एक अरब वैश्विक आबादी खुले में सौच को अभिसप्त है. उनमे से आधे से अधिक लोग भारत में रहते हैं, नतीजन बीमारियां उत्पन्न होने के साथ साथ पर्यावर दूषित होता. इसलिए सरकार इस समस्या से उबरने के लिए स्वच्छ भारता अभियान चला रही है. लेकिन एक सर्वे के अनुसार खुले में सौच जाना एक तरह की मानसिकता दर्शाता है. इसके मुताबिक सार्वजनिक शौचालयोँ में नियमित रूप से जाने वाले तकरीबन आधे लोगो और खुले में शौच जाने वाले इतने ही लोगो का कहना है कि यह सुविधाजनक उपाय है. ऐसे में स्वच्छ भारत के लिए सोच में बदलाव की जरुर दिखती है. दुनिया में हर तीन में से एक महिला को सुरक्षित शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है खुले में शौच के लिए विवस होने का कारण महिलाओ और बालिकाओ की निजता सम्मान और पर बुरा प्रभाव पड़ता है और उनके खिलाफ हिंसा तथा बलात्कार जैसी घटनाओ की आशंका बनी रहती है.

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