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15 November 2017

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के पुनर्गठन को मंजूरी प्रदान की

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के पुनर्गठन एवं जारी रखने को मंजूरी प्रदान कर दी ताकि इसे परिणाम आधारित, प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके और इसकी बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय का निर्णय किया गया. साल 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिये 14वें वित्त आयोग के तहत इस कार्यक्रम के लिये 23,050 करोड़ रूपये की राशि मंजूर की गई है. इस कार्यक्रम में देश की ग्रामीण आबादी को पेयजल आपूर्ति करने का प्रावधान है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के पुनर्गठन एवं इसे जारी रखने का निर्णय किया ताकि इसे परिणाम आधारित, प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके और इसकी बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके.  इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति की अच्छी गुणवाा सुनिश्चित करने के साथ मंत्रालय को पाइप से पानी की आपूर्ति करने के दायरे में वृद्धि करने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी.

मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम मार्च 2020 तक 14वें विा आयोग के चक्र के साथ जारी रहेगा. इस कार्यक्रम का पुनर्गठन होगा और इसकी 2 प्रतिशत राशि जापानी इंसेफेलाइटिस और गंभीर इंसेफेलाइटिस प्रभावित क्षेत्रों में खर्च किये जायेंगे. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन के अंतर्गत फरवरी 2017 में शुरू सहायक कार्यक्रम राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप योजना के तहत 28 हजार आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रभावित बसावटों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करेगी. इनकी पहचान पहले ही की जा चुकी है. अनुमानों के अनुसार, चार वर्षो में मार्च 2021 तक इसके लिये केंद्र की हिस्सेदारी 12,500 करोड़ रूपये होगी.

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