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03 November 2017

दागी नेताओं के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई के लिए बने स्पेशल कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

राजनीति से अपराधीकरण को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश जारी किए हैं. जिसमें कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि दागी नेताओं के खिलाफ चल रहे मामलों को फास्‍ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वो दागी नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए फास्‍ट ट्रैक कोर्ट का गठन करे. सरकर इस बाबत एक पूरी रूपरेखा कोर्ट को सौंपेगी. इस दौरान केंद्र सरकार की तरफ से इसकी ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों को सौंपने की कोशिश की गई. कोर्ट ने साफ कर दिया कि ये काम केंद्र सरकर का है और केंद्र 13 दिसम्बर तक केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को यह बताएगी की देश भर में कितने फास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे. इसमें कितना पैसा खर्च किया जायेगा और ये कोर्ट कब तक बन जायेंगे.
कोर्ट ने ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि 2014 के आम चुनाव के दौरान जिन नेताओं ने अपने हलफनामे में बताया था कि उनके खिलाफ कौन-कौन से मुकदमे हैं उसका अब तक क्या हुआ. क्या वे मुकदमे अपने अंजाम तक पहुंचे या नहीं. और क्या उन नेताओं पर कुछ और मुक़दमे भी दर्ज हुए हैं. सरकार को ये पूरा ब्‍यौरा देना होगा. वहीं इस सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए दागी नेताओं पर आजीवन रोक लगानी होगी. मौजूदा कानून के तहत सजा पाए नेता अपनी सजा पूरी करने के बाद 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते, लेकिन अब ये मांग की जा रही है कि ये पाबन्दी जीवन भर के लिए की जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 13 दिसम्‍बर को होगी.

हालांकि इससे पहले कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आपराधिक आरापों का सामना कर रहे राजनीतिक लोगों के आंकड़ों को मांगा है, जिसमें कोर्ट ने एक अधिवक्ता से कहा कि वह इस बात के आंकड़े पेश करें कि क्या इनके खिलाफ मुकदमों की सुनवाई एक साल में पूरा करने के लिए निर्देशों पर प्रभावी अमल हो रहा है. पीठ ने इस जानकारी के माध्यम से जानना चाहा कि राजनीतिकों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी होती है तो क्या यह एक निर्णायक कदम होगा.

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