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03 November 2017

हरियाणा सरकार ने ‘हरियाणा राज्य तालाब प्राधिकरण’ के गठन की घोषणा की

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने 52वें हरियाणा दिवस को जल संरक्षण को समर्पित करते हुए ‘हरियाणा राज्य तालाब प्राधिकरण’ के गठन की घोषणा की जिसके तहत राज्य के करीब 14000 तालाबों के पानी को साफ करके सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाएगा. इस अवसर पर मैगसैसे अवार्डी राजेंद्र सिंह ने 30 साल बाद दक्षिण हरियाणा तथा मसानी बांध तक हरियाणा सरकार द्वारा नहरी पानी पहुंचाने पर सरकार की खुले दिल से प्रशंसा की. हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह के लिए निर्धारित 100 करोड़ रूपए में से 60 करोड़ रूपए बच गए हैं, आज यह 60 करोड़ रूपए की राशि मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की किसानों की आमदनी दोगुना करने की सोच के अनुरूप सिंचाई के उपयोग के लिए खर्च करने की भी घोषणा की.

मुख्यमंत्री हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तथा हरियाणा सिंचाई अनुसंधान एवं प्रबंधन संस्थान के तत्त्वाधान में आयोजित ‘जल का सदुपयोग’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. जल संरक्षण पर अतुलनीय कार्य करने वाले मैगसैसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह को ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ की संज्ञा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आज के सेमीनार में उनके विचार व अनुभव सांझा करने का अवसर मिला है जो हरियाणा में जल संरक्षण की दिशा में योजना बनाने में सहायक सिद्घ होंगे.

उन्होंने हरियाणा दिवस की प्रदेश के लोगों को बधाई और शुभकामना देते हुए कहा कि हर महीने एक नया सुधार कार्यक्रम करने की शुरुआत की घोषणा के तहत जल सदुपयोग के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है. उन्होंने कहा कि भूजल का भंडार सीमित मात्रा में है. दिल्ली और एनसीआर की करीब 4 करोड़ की जनसंख्या के पीने के पानी की जरूरत सरकारों के लिए चिंता का विषय बनता जा रही है. उन्होंने कहा कि भूजल रिचार्जिंग की अधिक से अधिक योजनाएं बनानी होंगी. शिवालिक क्षेत्र में 8-9 जगहों पर बरसात के अतिरिक्त पानी के भंडारण के लिए चेक-डैम बनाए जाएंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल जोहड़ों की खुदाई की दिशा में भी बढ़ना होगा. पहले के समय में गांव के जोहड़ों का पानी पीने के लिए भी प्रयोग होता रहा है लेकिन आज इन जोहड़ों का पानी मनुष्य की स्वाभाविक विकृतियों के कारण पशुओं के पीने के लायक भी नहीं रहा. इसलिए इस पानी को रीसाइकल करके इसका पुन: प्रयोग कर विकृति से संस्कृति की ओर बढ़ने जरूरत है. 

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