मासिक करेंट अफेयर्स

24 November 2017

वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा के सबसे पुराने तारों की खोज की

खगोलविदों ने तारों के स्थान और गति का निर्धारण करते हुए हमारी आकाशगंगा के कुछ सबसे पुराने तारों की खोज की है. मानव की तरह तारों का भी जीवन चक्र होता है. वह पैदा लेते हैं, जवान होते हैं, बुजुर्ग होते हैं और फिर खत्म हो जाते हैं. अमेरिका की जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 'बूढ़े' तारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया. इन तारों को कूल सब-ड्वार्फ्स के नाम से भी जाना जाता है और ये सूर्य के मुकाबले ज्यादा उम्र वाले और ठंडे होते हैं. द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में खगोलविदों ने हमारी सौर प्रणाली के पड़ोस में तारों की गणना की कि वहां कितने अल्पवयस्क, जवान और बूढ़े तारे हैं. वैज्ञानिकों का लक्ष्य मुख्य रूप से 200 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित तारों पर था जिनके बारे में समझा जाता है कि वे 1,00,000 प्रकाश वर्ष में फैली आकाशगंगा में अपेक्षाकृत निकट हैं. एक साल में प्रकाश द्वारा तय की गई कुल दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहा जाता है. 

इस अध्ययन के मुख्य लेखक वेइ-चुन जाओ ने कहा कि हमारी सौर प्रणाली के पड़ोस में बहुत बड़ी संख्या में वयस्क तारे हैं, लेकिन उतनी संख्या में बूढ़े तारे नहीं हैं. इस लिए हमें उन्हें खोजने के लिए आकाशगंगा में और दूर जाना होगा. वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले महीने हमारे सौरमंडल से होकर गुजरे गहरे, लाल रंग और सिगार के आकार वाले पिण्ड जैसे किसी भी ब्रह्माण्डीय पिण्ड को इससे पहले कभी नहीं देखा गया था. वैज्ञानिकों ने इसे तारों के बीच मौजूद रहने वाले क्षुद्रग्रह की श्रेणी में रखा है. पिछले महीने हवाई में पैन..एसटीएआरआरएस 1 टेलिस्कोप ने आकाश से गुजरते हुए प्रकाश बिंदु को कैद किया था. शुरुआत में यह एक तेज गति से गुजरने वाले छोटे क्षुद्रग्रह की तरह प्रतीत हुआ था, लेकिन बाद में कई दिनों तक गौर करने पर इसके कक्ष का करीब और सही हिसाब मिल पाया. 

कक्ष के आकलन से खुलासा हुआ कि यह पिण्ड अन्य क्षुद्रग्रहों और पुच्छलतारों की तरह सौर मंडल के भीतर से नहीं उभरा है बल्कि तारों के बीच से आया है. शुरुआत में धूमकेतू के तौर पर इसकी पहचान हुई हालांकि सितंबर में सूर्य के करीब आने पर किए गए अवलोकनों से पता चला कि इसमें धूमकेतू जैसी किसी भी गतिविधि के संकेत नहीं मिलते हैं. इस पिण्ड को फिर से वर्गीकृत करते हुए अन्तर ताराकीय क्षुद्रग्रह की श्रेणी में रखा गया और इसे “ओउमुआमुआ” नाम दिया गया.

No comments:

Post a comment