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07 November 2017

विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया गया

5 नवम्बर 2017 को पुरे विश्वभर में विश्व सुनामी जागरूकता दिवस मनाया गया. यह दिवस सुनामी के बारे में जागरूकता के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने के लिए मनाया जाता है. विश्व सुनामी जागरूकता दिवस 2017 का विषय “रिड्यूस्ड द नंबर ऑफ़ अफेक्टेड पीपुल” के साथ मनाया गया. पाठकों को बता दे की पहला विश्व सुनामी जागरूकता दिवस 5 नवम्बर 2016 को पुरे विश्वभर में मनाया गया था. वर्ष 2004 में, विश्वभर में भयानक सुनामी का कहर देखा गया था जिसने भारत सहित 15 से अधिक देशों को प्रभावित किया था. एशियाई मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के अंतर्गत, इस दिन के महत्व को समझने के लिए वर्ष 1854 के उदाहरण को समझना बहुत आवश्यक है. जापान में रहने वाले वाकायामा 5 नवंबर को एक प्रान्त में आए उच्च तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी को लेकर काफी चिंतित थे. उन्होंने पहाड़ी की चोटी पर जाकर चावलों के ढ़ेर में आग लगा दी थी. जब ग्रामीणो ने इस चावल के ढ़ेर में लगी आग को देखा तो लोग उसे बुझाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ गए. उनके पहाड़ी पर चढ़ने के बाद नीचे गांव में तेज सुनामी की लहरे आई जिन्होंने पूरी तरह गांव को नष्ट कर दिया था. यह सुनामी पूर्व चेतावनी का पहला दस्तावेज उदाहरण था. जिस दिन चावलों के ढ़ेर में आग लगाई गई थी विशेषज्ञों ने उसी 5 नवंबर को सुनामी जागरूकता दिवस मनाने का फैसला किया है.

क्या होती है सुनामी: सुनामी भी `बंदरगाह लहरों 'कहा जाता है क्योंकि वे तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों में अधिकतम नुकसान का कारण बन रही है. सागर में हमेशा उतपन्न होने वाली लहरों और झीलों की हवाओं में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव की वजह से यह उत्पन्न होती है. आम तौर ये शांत होती है लेकिन अगर ये ज्यादा ताकतवर हो तो ये एक बड़े पैमाने पर तटीय क्षेत्रों नाश कर सकती है. विशेषज्ञ की मानें तो सुनामी की गति उतनी होती है जिस गति से एक हवाई जहाज उड़ता है. एक दशक पहले आई सुनामी की विनाशकारी लहरों ने दक्षिण भारत में कुछ ही मिनटों में 10 हजार लोगों को मौत की नींद सुला दिया था. वहीं 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सुनामी में दो लाख 30 हजार लोगों की जान चली गई थी. 12 साल पहले रविवार की सुबह भारतीयों को सचमुच सुनामी का `टी और पी ' कुछ नहीं पता था. वर्तमान पीढ़ी को सुनामी को कोई अनुभव नहीं था. उस दिन के बाद सुनामी को पृथ्वी पर सबसे भयकंर विनाशकारी प्राकृतिक घटनाओं में गिना जाने लगा. आज हैदराबाद में अपनी उच्च तकनीक की सुविधा से हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी पूर्व चेतावनी सेवा प्रदान की जाती है. पिछले सौ सालों में हुई 58 सुनामी की घटनाओं में करीब 2 लाख 60 हजार लोगों की जान चली गई है.

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