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21 November 2017

गिरीश कर्नाड टाटा को टाटा लिटरेचर लाइव लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया

मशहूर भारतीय नाटककार, अभिनेता, फिल्म निर्देशक, तथा लेखक गिरीश कर्नाड को 19 नवंबर 2017 को टाटा लिटरेचर लाइव सम्मान से सम्मानित किया  गया.  वे भारतीय सिनेमा की दुनिया में भी सक्रिय रहे हैं जहां उन्होंने कन्नूरू हेग्गादिथि (1999) , का निर्देशन किया है, तथा इकबाल (2005) तथा लाइफ गोज़ ऑन (2009) में अभिनय किया है।.उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले हैं, तीन श्रेष्ठ निर्देशक के लिए- कन्नड़ के लिए वंश वृक्ष (1972) , कड्डू (1974) , ओंडानोंडु कालाडल्ली (1978) तथा एक श्रेष्ठ पटकथा- गोधूलि (1980) के लिए. टाटा लिटरेचर लाइव अवार्ड, भारतीय साहित्य जगत में श्रेष्ठतम योगदान को सलामी देने और उसका उत्सव मनाने के लिए स्थापित किया गया है, जिसके तहत 2016 में अमिताव घोष, 2015 में किरण नागरकर, 2014 में एमटी वासुदेवन नायर, 2013 में खुशवंत सिंह, 2012 में श्री वीएस नॉयपाल तथा 2011 में महाश्वेता देवी को सम्मानित किया जा चुका है.
 
गिरीश कर्नाड का जन्म 1938 में हुआ और उन्होंने 1960–63 के दौरान ऑक्सफोर्ड के लिंकन तथा मैग्डालेन कॉलेजों में दर्शन, राजनीति, तथा अर्थशास्त्र का अध्ययन किया, तथा दर्शन, राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की. वे पांच दशकों से ज्यादा समय से लेकर अबतक कई पुरस्कार प्राप्त नाटकों तथा फिल्मों का लेखन करते रहे हैं. गिरीश कर्नाड को प्रतिष्ठित पद्मश्री तथा पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. उनके लिखित नाटकों में ययाति (1961) , ऐतिहासिक में तुगलक (1964) , तथा उनके तीन मौलिक कार्य हयवदन (1971) , नागा-मंडला(1988) तथा तालीडंडा (1990) हैं, जो लोकगाथाओं, मिथक तथा इतिहास को वर्तमान-समय आधुनिक मानव के संघर्ष से जोड़ते हैं. उनकी 2012 की श्रेष्ठतम कृति, बेंदा कालू ऑन टोस्ट, जिसके अब मराठी तथा अंग्रेजी संस्करण उपलब्ध हैं, को उसके कई सामयिक मुद्दों के शानदार चित्रण के लिए व्यापक रूप से सराहना मिली है, जिसके तहत शहरी आप्रवासन, पर्यावरण की क्षति तथा उपभोक्तावादी रुझान के मुद्दे उठाए गए हैं.

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