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16 November 2017

आधार के बाद अब एड्रेस भी होगा डिजिटल,सरकार ने डाक विभाग को दिए निर्देश

अब जल्द ही आपका आवासीय या प्रोफेशनल ऐड्रेस डिजिटल होने जा रहा है. सरकार, आधार की तरह ही लोगों के अड्रेस को भी डिजिटल करना चाहती है. संचार मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डाक विभाग को इस पायलट प्रॉजेक्ट के लिए आदेश दे दिया गया है. इस प्रॉजेक्ट के तहत तीन पिन कोड लोकेशन वाली प्रॉपर्टी के लिए एक 6 अक्षरों वाला डिजिटल ऐड्रेस दिया जाएगा. अगर इस प्रॉजेक्ट को सफलता मिली तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि सरकार यह इसलिए कर रही है, ताकि प्रॉपर्टी टाइटल और मालिकाना हक, प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड, बिजली, पानी और गैस जैसी चीजों के उपभोग की जानकारी मिल सके.
साथ ही ई-ऐड्रेस का इस्तेमाल मौजूदा पोस्टल ऐड्रेस के लिए भी किया जा सकेगा. डाक विभाग ने इस पायलट प्रॉजेक्ट की जिम्मेदारी एक निजी मैपिंग कंपनी ‘मैप माई इंडिया’ को दी है. इस संबंध में कंपनी को एक पत्र भी भेजा गया है. इस पत्र में लिखा है कि इस योजना में जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल डाक विभाग डिजिटल ऐड्रेस के लिए कर सकता है. यह राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रॉजेक्ट के लिए भी सही होगा. साथ ही पत्र में लिखा है कि सभी तरह के डेटा डाक विभाग के पास रहेंगे और निजी कंपनी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगी.
अतिरिक्त डायरेक्टर जनरल के हस्ताक्षर वाले पत्र को 27 सितंबर को मैप माई इंडिया को भेजा गया है. पत्र में लिखा है, 'इस योजना में जुटाए गए साक्ष्यों का इस्तेमाल डाक विभाग डिजिटल ऐड्रेस के लिए कर सकता है. यह राष्ट्रीय स्तर के लिए प्रॉजेक्ट के लिए भी सही होगा.' सभी तरह के डेटा डाक विभाग के पास रहेंगे और निजी कंपनी इसका व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगी. मैप माई इंडिया के एमडी राकेश वर्मा ने कहा कि ई-लिंकेज के जरिए कॉम्प्लेक्स ऐड्रेस की पहचान करना आसान होगा और उसे अन्य सेवाओं से भी जोड़ा जा सकता है.
मौजूदा समय में देश में कई हिस्सों के ऐड्रेस पता करना मुश्किल होता है. डाक विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि इस परियोजना का उद्देश्य डिजिटल ऐड्रेसिंग सिस्टम के प्रभाव को दर्शाना भी है. डाक विभाग इस प्रक्रिया में डेटा शेयर कर मदद करेगा. मैप माई इंडिया ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि, उसने डिजिटल ऐड्रेस के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी और डेटा जुटाना शुरू हो चुका है. बयान में कहा गया है कि कंपनी इसरो और नेशनल सैटलाइट इमैजरी सर्विस 'भुवन' के सहयोग से प्रभावकारी मैपिंग करेगी.

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