मासिक करेंट अफेयर्स

18 November 2017

भारतीय वैज्ञानिको ने डेंगू मच्छरो पर नियंत्रण हेतु नैनो कीटनाशक बनाया

नैनो तकनीक का उपयोग दुनिया भर में बढ़ रहा है और लगभग सभी क्षेत्रों में इसे आजमाया जा रहा है. भारतीय वैज्ञानिकोंने अब नीम यूरिया नैनो-इमलशन (एनयूएनई) नामक नैनो-कीटनाशक बनाया है, जो डेंगू और मस्तिष्क ज्वर फैलाने वाले मच्छरों से निजात दिला सकता है. तमिलनाडु के वेल्लोर में स्थित वीआइटी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया यह नया नैनो-कीटनाशक डेंगू और मस्तिष्क ज्वर (जापानी इंसेफेलाइटिस) फैलाने वाले मच्छरों क्रमश: एडीज एजिप्टी और क्यूलेक्स ट्रायटेनियरहिंचस की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. वैज्ञानिकों ने नीम के तेल, ट्विन-20 नामक इमल्शीफायर और यूरिया के मिश्रण से माइक्रोफ्लुइडाइजेशन नैनो विधि से करीब 19.3 नैनो मीटर के औसत नैनो कणों वाला नीम यूरिया इमलशन तैयार किया है.

नैनो तकनीक में नैनो स्तर पर पदार्थ के अति सूक्ष्म कणों का उपयोग किया जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता बढ़ जाती है. नीम एक प्राकृतिक कीटनाशक है, जिसका कारण उसमें पाया जाने वाला एजाडिरेक्टिन पदार्थ है. एनयूएनई कीटनाशक में नैनो स्तर पर एजाडिरेक्टिन अत्यधिक प्रभावी हो जाता है और ज्यादा समय तक स्थायी बना रहता है. वैज्ञानिकों ने एडीज एजिप्टी और क्यूलेक्स मच्छरों के लगभग 50 ताजा अंडों और 25 लार्वा पर एनयूएनई की दो मिग्रा प्रति लीटर से लेकर 200 मिग्रा प्रति लीटर की विभिन्न सांद्रता के प्रभाव का ऊतकीय तथा जैवरासायनिक अध्ययन किया है. एनयूएनई नैनो-कीटनाशक में मच्छरों के अंडों और लार्वाओं की वृद्धि रोकने की अद्भुत क्षमता पाई गई है. अध्ययन में एनयूएनई का घातक प्रभाव इन मच्छरों के लार्वाओं की आंतों में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है. सामान्य संश्लेषी कीटनाशकों का प्रभाव सतही स्तर तक ही पड़ता है, लेकिन नैनो प्रवृत्ति होने के कारण एनयूएनई का प्रभाव मच्छरों की कोशिकाओं से लेकर एंजाइम स्तर तक पड़ता है. यह मच्छरों के लार्वा की कोशिकाओं में मिलने वाले प्रोटीन, लिपिड, कार्बोहाइड्रेट और एंजाइमों की मात्रा को कम कर देता है, जिससे मच्छरों के प्रजनन के साथ-साथ लार्वा से मच्छर बनने और उनके उड़ने जैसे गुणों में कमी आती है. इससे नैनो-कीटनाशक की मच्छरों के प्रति प्रभावी विषाक्तता का पता चलता है, जो उनकी बढ़ती आबादी में रोक लगाने के लिए कारगर साबित हो सकती है.

मस्तिष्क ज्वर फैलाने वाले क्यूलेक्स मच्छर चावल के खेतों में पनपते हैं।.इसलिए एनयूएनई की विषाक्तता का अध्ययन करने के लिए धान के पौधों और उसकी जड़ों में मिलने वाले एंटरोबैक्टर लुडविगी नामक लाभकारी बैक्टीरिया पर इसका परीक्षण किया गया है. वैज्ञानिकों ने पाया कि मच्छरों के नियंत्रण के लिए उपयोग होने वाली एनयूएनई की सांद्रता का बीजों के अंकुरण से फसल पकने तक की पौधे की किसी भी अवस्था में तथा बैक्टीरिया की कोशिकाओं पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं पड़ता है.

No comments:

Post a comment