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17 December 2017

दागी नेताओं के मामले निपटाने को 1 मार्च तक स्पेशल कोर्ट बने: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्देश दिया कि नेताओं के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए गठित होने वाली 12 विशेष अदालतों को अगले साल 1 मार्च से काम शुरू कर देना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र से कहा कि इन अदालतों के गठन के लिए संबंधित राज्यों को तत्काल 7.80 करोड़ रुपये से आनुपातिक आधार पर धन आवंटित किया जाए. यह काम तुरंत करना चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र द्वारा द्वारा धन आवंटन  के तुरंत बाद संबंधित राज्य सरकारों को हाईकोर्ट से परामर्श करके विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए. यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये एक मार्च से काम करना शुरू कर दें. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने केंद्र को सांसदों और विधायकों की संलिप्तता वाले लंबित आपराधिक मामलों का विवरण एकत्र करने के लिए दो महीने का समय प्रदान किया. पीठ ने टिप्पणी की कि उसके द्वारा मांगी गई जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं थी.

न्यायालय ने इस मामले में केंद्र के अतिरिक्त हलफनामे का अवलोकन किया।.इसमें सरकार ने नेताओं की संलिप्तता वाले मामलों के लिए इस समय 12 विशेष अदालतें गठित करने का प्रस्ताव किया है. हलफनामे में यह भी कहा गया है कि इसके लिये 7.8 करोड रुपये आवंटित किए जाएंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषी नेताओं पर चुनाव लड़ने के लिए उम्र भर का प्रतिबंध लगाने के मुख्य मुद्दे पर मार्च के महीने में सुनवाई की जाएगी. याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने जब यह दलील दी कि केंद्र को और अधिक विशेष अदालतें गठित करनी चाहिए तो पीठ ने टिप्पणी की कि पहले 12 ही रहने दें जिनके गठन का उन्होंने प्रस्ताव किया है. इसे अवरुद्ध मत कीजिये. यह अंत नहीं है. पीठ ने कहा, गलती निकालना बहुत आसान है. ऐसा करना सबसे सरल है. पहले इन अदालतों को शुरू होने दीजिये.

आपराधिक मामलों में फंसे सांसद और विधायकों के खिलाफ हो रही देरी पर अपने ऐतिहासिक फैसले को लेकर कोर्ट ने कहा कि यह तो सिर्फ एक शुरुआत भर थी और इस दिशा में अभी और देश के सभी विधायकों और सांसदों के क्रिमिनल रिकॉर्ड्स मिलने के बाद और कोर्ट गठित किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसा राजनेताओं के खिलाफ एक बड़ा झटका साबित हो सकता है जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं और ट्रायल में काफी समय लगने के चलते वह सदस्य बने हुए हैं. ऐसे केस इस स्पेशल अदालत के दायरे में आएंगे और उनकी किस्मत का फैसला जल्द कर दिया जाएगा. शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद केन्द्र ने 12 विशेष अदालतें गठित करने का फैसला किया ताकि एक साल के अंदर 1,581 ऐसे सांसद और विधायकों के खिलाफ केस की सुनवाई कर उसे अंजाम तक पहुंचाया जा सके.

गौरतलब है कि मंगलवार को कानून एवं न्याय मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी रीता वशिष्ठ ने शीर्ष अदालत में दो पेज के अपने एफिडेविट के जरिए कहा कि इस योजना से अदालत को एक साल के लिए यह संवैधानिक विशेषाधिकार दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि विशेष अदालत उन 1,581 मामलों की सुनवाई करेगी जो उम्मीदवारों ने 2014 के लोकसभा चुनाव और आठ विधानसभा चुनाव में अपना हलफनामा दाखिल करते हुए जिक्र किया था. रीता वशिष्ट ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने कोर्ट के लिए 7.8 करोड़ रूपये की मंजूर दी है.

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