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12 December 2017

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक और BHU के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का निधन

भारत के मशहूर डीएनए वैज्ञानिक और बीएचयू के पूर्व कुलपति डॉ. लालजी सिंह का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है वह हैदराबाद के सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं. डॉ. लालजी सिंह को डीएनए फिंगरप्रिटिंग का जनक भी कहा जाता है. वह जौनपुर के रहने वाले थे. वह तीन दिन पहले ही जौनपुर स्थित अपने गांव आए थे और वहां से हैदराबाद जा रहे थे. वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पर उनको दिल का दौरा आया जहां से उन्हें आनन-फानन में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.  डॉ. लाल सिंह ने ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद उनके शव का डीएनए टेस्ट किया था.

लालजी सिंह का जन्म 5 जुलाई 1947 को हुआ था. वे यूपी के जौनपुर जिले की सदर तहसील के गांव कलवारी के रहने वाले थे. इनके पिता का नाम स्व. ठाकुर सूर्यनारायण सिंह था. वे एक साधारण किसान थे. वे जिले से इंटरमीडिएट की पढाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए 1962 में बीएचयू गए. यहां उन्होंने बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री हासिल की. वे बचपन में पैदल 12 किलोमीटर चलकर रोज स्कूल जाते आते थे. 1971 में पीएचडी करने के बाद कोलकाता गए, जहां साइंस में 1974 तक एक फैलोशिप के तहत रिसर्च किया. इसके बाद वे फैलोशिप पर ब्रिटेन गए, और 9 महीने बाद वापस भारत आए. उन्होंने जून 1987 में सीसीएमबी हैदराबाद में साइंटिस्ट की पोस्ट पर काम करना शुरू किया. 1998 से 2009 तक वहां के डायरेक्टर रहे.

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