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13 December 2017

भारत ने स्वंय को संक्रामक रोग ट्रेकोमा से मुक्त घोषित किया

भारत को संक्रामक रोग रोहे से मुक्त घोषित कर दिया गया है. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जे पी नडडा ने 9 दिसंबर, 2017 को नई दिल्‍ली में राष्‍ट्रीय रोहा सर्वेक्षण रिपोर्ट 2014-17 जारी करते हुए ये घोषणा की. सर्वेक्षण के अनुसार सभी जिलों में बच्‍चों में ट्रेकोमा संक्रमण समाप्‍त हो चुका है और इसकी मौजूदगी केवल 0.7 प्रतिशत है. उन्‍होंने इसे महत्‍वपूर्ण उपलब्धि बताया. रोहे या ट्रैकोमा आंख की ऐसी बीमारी है जो लोगों के एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलती है. इसमें आंखें लाल हो जाती हैं और आंख के अंदरूनी हिस्‍से में सूजन के साथ दाने निकलते हैं. ट्रेकोमा (रोहे-कुक्‍करे) आंखों का दीर्घकालिक संक्रमण रोग है और इससे दुनिया भर में अंधेपन के मामले सामने आते हैं. यह खराब पर्यावरण और निजी स्‍वच्‍छता के अभाव तथा पर्याप्‍त पानी नहीं मिलने के कारण होने वाली बीमारी है. यह आंखों की पलकों के नीचे झिल्‍ली को प्रभावित करता है.
 
बार-बार संक्रमण होने पर आंखों की पलकों पर घाव होने लगते हैं, इससे कोर्निया को नुकसान पहुंचता है और अंधापन होने का खतरा पैदा हो जाता है. इससे गुजरात, राजस्‍थान, पंजाब, हरियाणा, उत्‍तरप्रदेश और निकोबार द्वीप के कुछ स्‍थानों के लोग प्रभावित पाए गए हैं. ट्रेकोमा संक्रमण 1950 में भारत में अंधेपन का सबसे महत्‍वपूर्ण कारण था और गुजरात, राजस्‍थान, पंजाब और उत्‍तर प्रदेश में 50 प्रतिशत आबादी इससे प्रभावित थी. राष्‍ट्रीय ट्रेकोमा प्रचार सर्वेक्षण और ट्रेकोमा रैपिड असेसमेंट सर्वेक्षण डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑपथेलमिक साइंस, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान नई दिल्‍ली ने 2014 से 2017 तक नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्‍लाइंडनेस एंड विजुअल इम्‍पेयरमेंट के सहयोग से किया. सर्वेक्षण 23 राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों के 27 सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में किया गया.

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