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12 December 2017

विश्व हॉकी लीग में भारत ने जर्मनी को हराकर कांस्य पदक जीता

भारत ने विश्व हॉकी लीग फाइनल में जर्मनी को 2-1 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. भारतीय टीम ने 2015 में रायपुर में आयोजित हुए इसी टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता था. लीग में तीसरे और चौथे स्थान के मुकाबले में भारतीय खिलाडिय़ों ने शुरुआत से ही जर्मनी पर दबदबा बनाए रखा. जर्मनी की टीम मुकाबले से पहले ही संघर्ष करती नजर आई, जब उसके पांच खिलाड़ी चोट और बीमारी की वजह से मैच खेलने नहीं उतरे. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 13 खिलाडिय़ों के साथ खेलने वाली जर्मनी की टीम कांस्य पदक के मैच में सिर्फ 11 खिलाडिय़ों के साथ ही खेल सकी. इसके बावजूद जर्मनी के खिलाड़ी पूरे जोश के साथ मैदान पर उतरे और उन्होंने गोल की ओर 13 शॉट लगाए, जबकि भारत सिर्फ 12 शॉट ही लगा सका।. जर्मनी ने पेनाल्टी कॉर्नर में भी बाजी मारी. जर्मनी को जहां सात पेनाल्टी कॉर्नर मिले, जबकि भारत चार पेनाल्टी कॉर्नर ही हासिल कर सका.

कई खिलाडिय़ों की गैरमौजूदगी के बावजूद जर्मनी की टीम ने शानदार हॉकी खेली और 21 मिनट तक मैच में आक्रामक रुख अपनाया. अगर मैदान में जर्मनी की पूरी टीम होती तो निश्चित ही मैच का परिणाम कुछ और हो सकता था. जर्मनी के खिलाडिय़ों ने खेल का अच्छा नमूना पेश किया. पहले क्वार्टर में ही उन्होंने कई मौके भुनाए. जर्मनी टीम ने भारत को कड़ी चुनौती दी और पहले क्वार्टर के 14वें मिनट में ही मैच का पहला पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया, लेकिन भारत ने मजबूत डिफेंस से इसको गोल में तब्दील नहीं होने दिया. बुखार के बावजूद खेल रहे जर्मनी के कप्तान मार्क ग्रैमबुश को एक अच्छा मौका मिला, लेकिन गेंद नेट के पास से होकर गुजर गई.

जर्मनी ने 19वें मिनट में दो पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा ने शानदार बचाव किया. अगले ही मिनट में जर्मनी को एक और पेनाल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन निकलस ब्रूंस इसे गोल में नहीं बदल सके. भारत की ओर से पहला गोल मैच के 21वें मिनट में आया, जब एसवी सुनील ने शानदार गोल किया. इसके बाद जर्मनी के मार्क एप्पल ने मैच के 36वें मिनट में गोल करके स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया. इसके बाद मैच के 54वें मिनट में हरमनप्रीत सिंह ने पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करके भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी. इसके बाद कोई गोल नहीं हो सका और भारत ने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया. अंतिम पलों में जर्मन खिलाडिय़ों को कई पेनाल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वे उन्हें गोल में तब्दील करने में कामयाब नहीं हो पाए.

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