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30 December 2017

लोकसभा में तीन तलाक बिधेयक पारित

एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने वाले विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया है. मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को लोकसभा में गुरुवार शाम को वोटिंग कराई गई और अधिकतर सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया. तीन तलाक को अपराध करार देने वाले इस विधेयक को सुबह कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था, जिस पर दिन भर चली बहस के बाद वोटिंग हुई. इस विधेयक में संशोधन को लेकर विपक्ष के कई प्रस्ताव खारिज हो गए. एमआईएम के सांसद असद्दुदीन ओवैसी का प्रस्ताव 2 वोटों के मुकाबले 241 मतों के भारी अंतर से खारिज कर दिया गया, जबकि 4 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

ओवैसी के अलावा बीजेडी के भर्तुहरी माहताब, कांग्रेस की सुष्मिता देव और सीपीआईएम के ए संपथ ने फभी संशोधन प्रस्ताव पेश किया था. ये सारे संशोधन प्रस्ताव बहुमत से खारिज कर दिए गए. लोकसभा में पारित होने के बाद यह विधेयक अब राज्यसभा में मंजूरी के लिए जाएगा. उच्च सदन से मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक देश में कानून के तौर पर लागू हो जाएगा.
यह विधेयक सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ तीन तलाक पर ही लागू होगा. यह विधेयक एक साथ तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं को मजिस्ट्रेट के पास जाने की ताकत देता है और अपनी एवं बच्चों की सुरक्षा एवं जरूरतों की मांग करने का हक देता है. इसके अलावा पीड़िता मजिस्ट्रेट से अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी भी मांग सकती है. इस विधेयक के मुताबिक किसी भी तरह से दिया गया एक साथ तीन तलाक, मौखिक, लिखित, ईमेल, मेसेज या वॉट्सऐप, अवैध और अमान्य होगा. इस विधेयक में एक साथ तीन तलाक का दोषी पाए जाने पर पुरुष को तीन साल की कैद की सजा का प्रावधान है.

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