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23 December 2017

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उपभोक्ता संरक्षण बिल को मंजूरी प्रदान की

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी. इसके प्रावधानों के तहत कंपनियों द्वारा भ्रामक विज्ञापन जारी करने और मिलावट करने पर जुर्माना और जेल की सजा हो सकेगी. यही नहीं, विधेयक में भ्रामक विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी पर भी जुर्माने और तीन साल तक प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है. विधेयक को संसद के वर्तमान सत्र में ही पेश किए जाने की संभावना है. इस विधेयक में भ्रामक विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी पर पहली बार अपराध करने पर 10 लाख रुपए तक का जुर्माना और एक साल के प्रतिबंध का प्रावधान है. दूसरी बार अपराध में 50 लाख रुपए तक का जुर्माना और तीन साल तक के प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है.

उत्पाद निर्माता और कंपनियों पर पहले अपराध में 10 लाख रुपए तक का जुर्माना और दो साल की जेल का प्रावधान किया गया है. इसके बाद के अपराधों पर 50 लाख रुपए तक का जुर्माना और पांच साल तक की जेल का प्रावधान है. मिलावट के मामलों में विधेयक में जुर्माने के साथ-साथ उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है. नए विधेयक में वर्तमान कानूनों के दायरे को बढ़ाते हुए उन्हें और प्रभावी व उद्देश्यपरक बनाया गया है. इसमें उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना का भी प्रावधान है. साथ ही वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र के रूप में इसमें मुकदमे के बाद भी मध्यस्थता का प्रावधान किया गया है.

मंत्रिमंडल ने उपभोक्ता संरक्षण विधेयक-2017 को मंजूरी देकर 2015 में पेश विधेयक को वापस लेने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है. इस संबंध में एक संसदीय स्थायी समिति ने पिछले साल अप्रैल में सरकार को अपनी सिफारिशें भी सौंपी थीं. इससे पहले, अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने लोकसभा में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 की जगह लेने के लिए नया विधेयक पेश किया था. लेकिन 2015 में पेश उक्त विधेयक में कई संशोधन किए जाने की वजह से उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय यह विधेयक लाया है.

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