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17 December 2017

राहुल ने संभाली कांग्रेस की कमान

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक समारोह में शनिवार को राहुल पार्टी के नए अध्यक्ष बन गए. इस मौके पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी मां सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बहन प्रियंका गांधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा समेत कांग्रेस के सभी दिग्गज नेता मौजूद थे. राहुल गांधी को सर्टिफिकेट देकर आधिकारिक तौर पर अध्यक्ष घोषित किया गया. इससे पूर्व 11 दिसंबर को राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुन लिए गए थे. राहुल गांधी ने 4 दिसंबर को इस पद के चुनाव में नामांकन किया था. राहुल के पक्ष में 86 लोगों ने प्रस्ताव किया था. इस चुनाव में राहुल के अलावा किसी और ने नामांकन नहीं किया था. इसके बाद राहुल का नाम कांग्रेस अध्यक्ष के पद के लिए चुने जाने की घोषणा कर दी गई. राहुल गांधी ने 16 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष पद की आधिकारिक तौर पर कमान संभाल ली है. राहुल नेहरू-गांधी परिवार के 6वें सदस्य है जो कांग्रेस की कमान संभालें है. उनसे पहले मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बन चुके हैं.

पद संभालने के बाद कार्यकर्ताओं को दिए भाषण में राहुल गांधी ने पहला निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर साधा. राहुल ने कहा कि कांग्रेस भारत को 21वीं सदी में लेकर आई और पीएम नरेंद्र मोदी हमें मध्यकाल में ले जा रहे हैं. बीजेपी पर प्रहार करते हुए राहुल ने कहा कि एक बार आग लगने के बाद उसे बुझाना बहुत मुश्किल होता है. बीजेपी ने पूरे देश में आग लगा दी. राहुल ने कहा कि वो आग लगाते हैं, हम आग बुझाते हैं. राहुल ने कहा कि अगर कोई बीजेपी को यह करने से रोक सकता है तो वह हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता. हम कांग्रेस को ग्रैंड ओल्ड पार्टी एंड यंग पार्टी बनाएंगे और गुस्से की राजनीति के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे. राहुल ने कहा कि हम बीजेपी को भाई-बहन ही मानते हैं, लेकिन हम उनसे सहमत नहीं हैं।.बीजेपी आवाज को कुचल देती है, लेकिन हम बोलने का मौका देते हैं. 

राहुल ने 2004 में राजनीति में शुरुआत की और अमेठी से लोकसभा चुनाव जीता. साल 2012 में यूपी चुनाव में नेतृत्व किया, सिर्फ 28 सीटें जीतीं. 2013 में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनाए गए. उसी साल दाग़ियों पर आए अध्यादेश को बेकार बताकर पार्टी को शर्मिंदा कर डाला. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की लेकिन 44 पर ही कांग्रेस सिमट गई. साल 2015 में सूट-बूट की सरकार कहकर मोदी सरकार पर निशाना साधा ये बयान काफी चर्चा में रहा. साल 2015 में ही बिहार में महागठबंधन किया और जीत मिली. साल 2017 में 5 में से 4 राज्यों में कांग्रेस हारी, यूपी में सिर्फ़ 7 सीटें मिलीं. 2017 में पंजाब में अकाली-बीजेपी गठबंधन को हराया और वहां कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार बनी.
 
इसी साल अमेरिका की 'बहुचर्चित यात्रा' से लौटकर आए राहुल गांधी में गजब का बदलाव दिखा. उनके भाषण में गजब की धार दिखाई दी. उन्होंने खुले तौर पर स्वीकारा कि 2014 में कांग्रेस इसलिए हारी क्योंकि पार्टी में अहंकार था. इसके बाद तो उन्होंने ताबड़तोड़ बयान दिए और 'गब्बर सिंह टैक्स' और 'मोदी मेड डिज़ास्टर' जैसे चुटीले नारे दिये. कांग्रेस भी पहली बार सोशल मीडिया पर बीजेपी को टक्कर देती दिखाई दी. जुलाई 2017 से ट्वीटर पर 20 लाख फॉलोअर बढ़े. राहुल के सामने अभी गुजरात चुनाव जीतने के अलावा कर्नाटक, मिज़ोरम, मेघालय, पुड्डुचेरी, हिमाचल प्रदेश प्रदेश में सरकार बनाए रखने की भी चुनौती है. राहुल ने कभी सरकार में रहकर काम नहीं किया. कांग्रेस अध्यक्ष बनने से पहले ही उनकी हैसियत कांग्रेस में नंबर दो की रही. हालांकि वह कांग्रेस के नेता हमेशा उन्हें 'सीखने' वाला नेता ही बताते रहे.

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