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15 December 2017

भारत में बनी पहली स्कॉरपीन क्लास पनडुब्बी INS कलवरी नौसेना में शामिल

स्कॉर्पीन क्लास की पहली सबमरीन (पनडुब्बी) कलवरी गुरुवार को नेवी में कमीशंड हुई. मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में नरेंद्र मोदी इसे नौसेना को समर्पित किया. मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का रास्ता हिंद महासागर से होकर ही निकलेगा. मोदी ने कहा, 7500 किलोमीटर से लंबा हमारा समुद्री तट, 1300 के करीब छोटे-बड़े द्वीप एक ऐसी सामुद्रिक शक्ति का निर्माण करते हैं, जिसका कोई मुकाबला नहीं. हिंद महासागर भारत ही नहीं, पूरे विश्व के लिए अहम है. कहा जाता है कि इक्कीसवीं सदी एशिया की सदी है. यह भी तय है कि इसका रास्ता हिंद महासागर से होकर ही निकलेगा. जिस तरह भारत की राजनीतिक और आर्थिक मैरीटाइम पार्टनरशिप बढ़ रही है, उससे इस लक्ष्य की प्राप्ति और आसान नजर आती है. समुद्र में निहित शक्तियां राष्ट्र निर्माण की आर्थिक शक्तियों में मौजूद हैं. चाहे समुद्र के रास्ते आने वाला आतंकवाद हो, पायरेसी की समस्या हो, ड्रग्स की तस्करी हो, भारत इन चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा रहा है. 'सबका साथ सबका विकास' यह हमारा संकल्प जल-थल-नभ में एक समान है. हम वसुधैव कुटुंबकम के जरिए अपने दायित्व को निभा रहे हैं.

मोदी ने कहा, मैं इसको एक स्पेशल नाम से बुलाता हूं- SAGAR यानी सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन. नेवी जहां मालदीव में पानी पहुंचाती है, वहीं बांग्लादेश में चक्रवात आता है तो लोगों को निकालकर मानवता का काम करती है. यमन में संकट के समय भारतीय नौसेना 45000 से ज्यादा अपने नागरिकों को बचाती है. तब 48 देशों के नागरिकों को भी संकट से बाहर निकालकर ले आती है. नेपाल में भूकंप के वक्त भारतीय सेना ने 700 से ज्यादा उड़ानें भरीं, 1000 टन से ज्यादा राहत सामग्री पहुंचाई. भारत मानवता के काम में कभी पीछे नहीं रह सकता. आज हम दुनिया के विभिन्न देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं. उनकी सेनाएं हमारी सेना से अनुभव साझा करने के लिए आतुर रहती हैं. जब वे एक्सरसाइज में शामिल होती हैं, तो यह चर्चा का विषय रहता है.

 पिछले 17 वर्षों में यह पहली परंपरागत पनडुब्बी है, जिसे नौसेना में शामिल किया जा रहा है. दिलचस्प बात है कि भारत की पहली पनडुब्बी का नाम भी आईएनएस कलवरी था. कलवरी का नाम खतरनाक टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है. 8 दिसंबर 1967 को पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी नौसेना में शामिल हुई थी. इस पनडुब्बी को 31 मई 1996 को रिटायर कर दिया गया था. आईएनएस कलवरी स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बी है. पनडुब्बी को जहां फ्रांस की कंपनी ने डिजाइन किया है, तो इसे मुंबई के मझगांव डॉकयॉर्ड में तैयार किया गया है. कलवरी की कैपेबिलिटी ऐसी है कि यह दुश्मन की ओर से आने वाले गाइडेड वेपन्स पर तुरंत हमला कर सकती है. इन हमलों को टॉरपीडो की मदद से अंजाम दिया जा सकता है. इसके अलावा पनडुब्बी के अंदर होने पर इसे ट्यूब की मदद से एंटी-शिप मिसाइल को भी इससे लॉन्च किया जा सकता है. नौसेना की मानें तो इस पनडुब्बी को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह हर तरह की स्थिति में अपने मिशन को पूरा कर सकती है. डीजल और बिजली से चलने वाला ये पनडुब्बी काफी घातक हैं.

इसकी लंबाई 67.5 मीटर और ऊंचाई 12.3 मीटर हैं. इसमें 360 बैटरी है जिसमें हर बैटरी का वजन 750 किलो हैं.  साथ में 1250 किलोवाट के दो डीज़ल इंजन लगे हैं जो बैटरी को जल्दी से जल्दी चार्ज करते हैं. इसकी स्पीड करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा है. ये समंदर में 50 दिन तक रह सकता हैं. पूरी तरह से ब्रांड न्यू ये पनडुब्बी हर लिहाज स्टेट ऑफ द आर्ट है अपनी क्लास में इसकी टक्कर का पनडुब्बी आस पास कोई नहीं हैं.
ये एक साथ तारपीडो, मिसाइल और माइंस लेकर चल सकता हैं. इस साल दो मार्च को नौसेना ने कलवरी की मदद से एंटी-शिप मिसाइल का कामयाब टेस्ट किया था. अरब सागर में हुए इस टेस्ट के साथ ही देश में बनी कलवरी ने अपनी काबिलियत का एक नमूना पेश किया था. डीजल-इलेक्ट्रिक, दोनों ही तरह ताकत से लैस इस पनडुब्बी के आने के बाद से नौसेना में कुल पनडुब्बियों की संख्या 14 हो जाएगी. हिंद महासागर में बढ़ती चीनी गतिविधियों के मद्देनजर अभी नौसेना को 24 से लेकर 26 पनडुब्बियों की जरूरत होगी.

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