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13 January 2018

इसरो ने सीमा पर दुश्मन देशो और आतंकियों की हड़कतो पर नजर रखने के लिए ‘कार्टोसैट-2’ अन्तरिक्ष में स्थापित किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नेश्रीहरिकोटा से अपने सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी-सी 40 की मदद से 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया है. इसके साथ ही भारत अंतरिक्ष में उपग्रह प्रक्षेपण का शतक पूरा कर लिया. प्रक्षेपित उपग्रहों में भारत का ‘कार्टोसैट-2’ भी शामिल है, जिसे आसमान में भारत की ‘आंख’ कहा जा रहा है. बताया जाता है कि इसकी मदद से सेना सटीक सर्जिकल स्ट्राईक कर पायेगी. यही वजह है कि पाकिस्तान सहम गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे सेना के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों एवं मछुआरों का काम बेहद आसान हो जायेगा. मौसम की सटीक भविष्यवाणी में मदद मिलेगी, जिससे किसानों को कम नुकसान होगा. मछुआरों को समुद्र के मौसम के पूर्वानुमान के बारे में बता दिया जायेगा, जिससे वे तय कर सकेंगे कि कब समुद्र में जायें और कब न जायें. भारत की इस उपलब्धि पर जहां दुनिया भर के देशों में भारत के वैज्ञानिकों की तारीफ हो रही है, वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है. इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाये. अगर ऐसा होता है, तो इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा.

इस बार पीएसएलवी के साथ भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजा गया, जिसे इसरो ने तैयार किया है. इसमें सबसे बड़ा उपग्रह भारत का ‘कार्टोसैट-2’ सीरीज का उपग्रह है. 28 अन्य उपग्रह इसमें सहयात्री की तरह हैं. इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, फिनलैंड, दक्षिण कोरिया के उपग्रह भी शामिल हैं. ऐसे उपग्रह छोड़ने से इसरो की थोड़ी कमाई भी हो जाती है. भारत के खास उपग्रह ‘कार्टोसैट-2’ को ‘आई इन द स्काई’ यानी आसमानी आंख भी कहा जा रहा है. यह एक अर्थ इमेजिंग उपग्रह है, जो धरती की तस्वीरें लेता है. इसका भारत के पूर्वी और पश्चिमी सीमा के इलाकों में दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सेटेलाइट केंद्र निदेशक एम अन्नादुरई ने कहा कि माइक्रो उपग्रह अंतरिक्ष में भारत का 100वां उपग्रह होगा. पृथ्वी के अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का कार्टोसैट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है. इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी हैं, जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं. कुल 28 अंतरराष्ट्रीय सह-यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका के, पांच दक्षिण कोरिया के हैं. कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड एक-एक उपग्रह हैं.

चार महीने पहले 31 अगस्त, 2017 को ऐसा ही एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह के सफल प्रक्षेपण में असफल रहा था. पीएसएलवी सी-40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है. अन्नादुरई ने कहा, पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी सी-39) तक बहुत सफल रहा था, पीएसएलवी सी-39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाये थे. भारत पीएसएलवी सी-40 का प्रक्षेपण बहुत बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि पीएसएलवी सी-39 के फेल होने के बाद प्रक्षेपण यान पीएसएलवी को फिर से तैयार किया गया है. किसी रॉकेट के फेल हो जाने के बाद उसकी मरम्मत करके दोबारा नया जैसा बनाकर लांचिंग पैड पर उतारना बहुत बड़ी बात होती है. पीएसएलवी भारत का ‘वर्कहॉर्स रॉकेट’ है, जिसके फेल होने से भारत की दिक्कतें बहुत बढ़ जाती हैं.

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