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05 January 2018

संसद ने नाबार्ड संशोधन विधेयक 2017 को पारित किया

लोकसभा ने गुरुवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक 2017 और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक संशोधन विधेयक में राज्यसभा के संशोधनों को मंजूरी प्रदान कर दी. ये दोनों विधेयक पहले लोकसभा में पारित हो चुके हैं. निचले सदन में कंपनी मामलों के राज्य मंत्री एवं विधि राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने सदन में इन दोनों विधेयकों से संबंधित संशोधनों को रखा और सदन ने ध्वनिमत से इन्हें मंजूरी प्रदान कर दी .विधेयक में संशोधनों में वर्ष 2017 के स्थान पर 2018 प्रतिस्थापित करने की बात कही गई है क्योंकि विधेयक अंतत: नये वर्ष में पारित हुआ है.

नाबार्ड संशोधन विधेयक में नाबार्ड विधेयक 1981 में संशोधन का प्रस्‍ताव किया गया है. नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि तथा औद्योगिक विकास के लिए कर्ज देता है और इसे नियंत्रित भी करता है. विधेयक में बैंक की प्राधिकृत पूंजी पांच हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रावधान है. फिलहाल बैंक के 99.6 प्रतिशत शेयर केन्‍द्र सरकार के पास हैं. बाकी शेयर रिजर्व बैंक के पास हैं.

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता संशोधन विधेयक के माध्यम से कमियों को दूर करने पर बल दिया गया है ताकि जान-बूझकर कर्ज नहीं चुकाने वाले बकाएदार खुद की परिसंपत्तियों की बोली न लगा सकें. प्रस्तावित परिवर्तनों से तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए खरीदारों का चयन करने की प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी.

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