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11 January 2018

चीन को पछाड़ देगा भारत, 2018 में 7.3% रहेगी विकास दर : विश्व बैंक

नोटबंदी और GST के कारण विकास दर घटने के अनुमानों को लेकर चौरतफा आलोचनाओं से घिरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए विश्‍व बैंक से एक बड़ी खुशखबरी मिली है. विश्‍व बैंक ने अपने अनुमानों में कहा है कि साल 2018 में भारत की व‍िकास दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है और अगले 2 सालों में यह 7.5 प्रतिशत हो सकती है. विश्‍व बैंक ने यह भी कहा कि व्यापक सुधारों के कारण भारत में दुनिया की अन्‍य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले असीम संभावना है. विश्‍व बैंक ने 2018 ग्लोबल इकनॉमिक प्रॉस्पेक्ट जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि नोटबंदी और GST से लगे शुरुआती झटकों के बावजूद 2017 में भारत की विकास दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है. विश्‍व बैंक के डेवलपमेंट प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप के निदेशक आइहन कोसे ने बताया कि अगले दशक में भारत दुनिया की किसी भी अन्‍य उभरती अर्थव्यवस्था की तुलना में उच्च विकास दर हासिल करने जा रहा है. मेरा फोकस शॉर्ट-टर्म आंकड़ों पर नहीं है. मैं बड़ी तस्वीर देख रहा हूं और इससे यही पता चलता है कि भारत में असीम संभावना है.'

उन्होंने धीमी पड़ती चीनी अर्थव्यवस्था से तुलना करते हुए कहा कि विश्‍व बैंक को उम्‍मीद है कि भारत धीरे-धीरे विकास के रास्ते पर आगे बढ़ेगा. कोसे ने कहा कि भारत के पिछले तीन सालों के विकास के आंकड़े काफी अच्छे हैं. साल 2017 में चीन की विकास दर 6.8 प्रतिशत रही, जो भारत की तुलना में केवल 0.1 फीसदी अधिक है, जबकि 2018 में चीन के लिए विश्‍व बैंक का अनुमान 6.4 फीसदी विकास दर का है, जबकि भारत के लिए यह 7.3 प्रतिशत का है. वहीं, अगले दो सालों के लिए जहां विश्‍व बैंक ने भारतीय विकास दर का अनुमान 7.5 फीसदी का लगाया है, वहीं चीन के लिए अगले दो सालों का यह अनुमान और घटाकर क्रमशः 6.3 प्रतिशत और 6.2 फीसदी कर दिया है. कोसे ने मौजूदा केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि वह GST जैसे मुद्दे पर बहुत गंभीर है, जो भारतीय अर्थव्‍यवथा के लिए बड़ा 'टर्निंग प्‍वाइंट' है. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने इससे संबंधित कुछ समस्‍याओं की पहले ही पहचान कर ली है और इस संबंध में कदम भी उठा रही है. अब इसके परिणाम को देखना दिलचस्‍प होगा.

कोसे के अनुसार, भारत को अपनी क्षमताओं के सही इस्तेमाल के लिए निवेश की संभावनाओं को बढ़ाने वाले कदम उठाने की जरूरत है. इस संबंध में नॉन-परफॉर्मिंग लोन जैसे मुद्दों का निपटारा करना होगा. साथ ही भारत को श्रम बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी सुधार करना होगा और निवेश के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करना होगा, जिससे उसकी संभावनाएं और बेहतर होंगी. कोसे ने भारत के जनसांख्यिकी प्रोफाइल की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसा दूसरी अर्थव्यवस्थाओं में कम ही देखने को मिलता है. हालांकि कोसे ने अन्‍य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत में महिला श्रम की भागदारी कम होने की बात भी कही. उन्‍होंने कहा कि महिला श्रम की हिस्सेदारी बढ़ाकर बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. साथ ही भारत के सामने बेरोजगारी जैसी चुनौतियां भी हैं. अगर भारत इन चुनौतियों से निपटने में सफल रहता है तो वह अपनी असीम संभावनाओं का इस्तेमाल कर पाएगा. उन्‍होंने अगले 10 सालों में भारत की विकास दर 7 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान जताया.

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