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07 January 2018

रांची की सीबीआई कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में लालू यादव को साढ़े तीन साल की जेल और 5 लाख जुर्माना लगाया

बिहार के दिग्गज नेता और राजद प्रमुख को चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की अवैध निकासी के मामले में रांची की सीबीआई कोर्ट ने सजा का ऐलान कर दिया है. कोर्ट ने लालू यादव को इस मामले में साढ़े तीन साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. अब इस फैसले के बाद लालू प्रसाद यादव जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख करेंगे. इस मामले में अदालत ने फूल चंद, महेश प्रसाद, सुनील कुमार, बांकी जूलियस, सुधीर कुमार और राजा राम को भी साढ़े तीन साल और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. पूर्व विधायक जगदीश शर्मा को अदालत ने सात साल की सजा और 20 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. फैसला आने के बाद लालू यादव के बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि कानून ने अपना काम किया है. हम इस फैसले का अध्ययन करने के बाद जमानत के लिए हाईकोर्ट जाएंगे.  

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में शुक्रवार को राजद प्रमुख लालू प्रसाद समेत अन्‍य आरोपियों को जेल से ही वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया था. अदालत ने एक-एक कर  लालू समेत अन्य शेष सात अभियुक्तों की भी सजा के बिन्दु पर उनकी उपस्थिति में बहस सुनी. अदालत ने सजा के बिंदु पर लालू के वकीलों की बहस सुनी जिसमें उन्होंने उनकी लगभग 70 वर्ष की उम्र होने और बीमार होने की बार-बार दुहाई दी. लालू के वकील चितरंजन प्रसाद ने बताया कि अदालत ने सजा के बिन्दु पर सभी की बहस सुनने के बाद इस मामले में आदेश के लिए शनिवार दोपहर दो बजे का समय निर्धारित किया है. इस मामले में जहां पांच आरोपियों बेक जूलियस, गोपीनाथ, ज्योति कुमार, जगदीश शर्मा एवं कृष्ण कुमार प्रसाद की सजा के बिन्दु पर उनके वकीलों ने गुरुवार को बहस पूरी कर ली थी. वहीं वर्णक्रम अनुसार लालू प्रसाद की बारी सातवें नंबर पर आई. अदालत ने आज लालू प्रसाद, आरके राणा के अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद, पूर्व सरकारी अधिकारी सुबीर भट्टाचार्य एवं चारा आपूर्तिकर्ताओं त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, सुशील कुमार सिन्हा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, संजय अग्रवाल एवं सुनील गांधी के वकीलों की बहस सजा के बिन्दु पर सुनी.

वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था और लगभग 21 साल बाद इस मामले में गत 23 दिसंबर को फैसला आया. सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य तथा आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था. इससे पहले चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ 70 रुपये अवैध ढंग से निकासी करने के चारा घोटाले के एक अन्य मामले में लालू प्रसाद, जगदीश शर्मा, राणा, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा समेत अन्‍य आरोपियों को सजा हो चुकी है और वे हाईकोर्ट से जमानत प्राप्त कर रिहा हुए हैं. देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये के फर्जीवाड़े के मामले से जुड़े इस मुकदमे में 23 दिसंबर को सीबीआई के विशेष न्यायाधीष शिवपाल सिंह ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व मंत्री विद्या सागर निषाद, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष ध्रुव भगत, हार्दिक चंद्र चौधरी, सरस्वती चंद्र एवं साधना सिंह को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया था.

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