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15 February 2018

भारतीय कम्पनियों को यूएई में पहली बार तेल क्षेत्र में 10% हिस्सेदारी मिली

पीएम मोदी के संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) दौरे के दौरान भारतीय कंसोर्टियम को पहली बार तेल संसाधन में वाणिज्यिक हिस्सेदारी हासिल हुई है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल उत्पादन कंपनियों को इसके ऑफशोर लोअर जैकम कंसेशन में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है. इस समझौते के तहत भारतीय तेल कम्पनियों को आबू धाबी की ऑफशोर लोअर ज़ैकम में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल हुई है. भारत की इन कम्पनियों में ओएनजीसी (विदेश), भारत पेट्रो रिसोर्सेज और इंडियन ऑयल शामिल हैं. इस समझौते के तहत ओएनजीसी (विदेश) की अगुवाई वाली कंसोर्टियम ने हिस्सेदारी शुल्क के रूप में अरब अमीरात की मुद्रा में 2.2 अरब दिरहम यानी 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया. 

यह समझौता नौ मार्च 2018 से लागू हो जाएगा और इस करार की अवधि 40 वर्ष है. लोअर ज़ैकम तेल क्षेत्र से रोजाना 4 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है, जबकि वर्ष 2025 तक इसे 4.5 लाख बैरल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस तेल क्षेत्र से उत्पादित कुल तेल का 10 प्रतिशत हिस्सा भारतीय तेल उत्पादक ओएनजीसी विदेश का हक होगा. आबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का भाग है जो गल्फ को-ऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) का सदस्य है. यूएई भारत को सबसे ज्यादा तेल की आपूर्ति करता है और ये भारत का दसवां सबसे बड़ा निवेशक भी है.

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