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02 February 2018

आम बजट 2018 : दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बिमा योजना की घोषणा

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में आम बजट पेश किया. उन्होंने गांव-किसान, हेल्थ सेक्टर, रेलवे, टैक्स, रोजगार समेत कई अहम मुद्दों पर बड़े ऐलान किये. केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने आज संसद में आम बजट 2018-19 पेश करते हुए कहा कि सरकार विनिर्माण सेवाओं और निर्यातों के क्षेत्र में आठ प्रतिशत से अधिक की आर्थिक विकास दर प्राप्‍त करने के प्रति वचनबद्ध है. 2017-18 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्‍पाद की 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर ने अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण बदलाव आने के संकेत दिए थे. वित्‍त वर्ष की दूसरी छमाही में सकल घरेलू उत्‍पाद में 7.2 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने की आशा है. वित्‍त मंत्री ने कहा कि भारतीय समाज और अर्थव्‍यवस्‍था ने बुनियादी सुधारों के साथ उल्‍लेखनीय प्रगति दर्ज की है. उन्‍होंने कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष ने हाल की अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि आगामी वर्ष के दौरान भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत होगी. उन्‍होंने कहा कि देश आठ प्रतिशत से अधिक की उच्‍च विकास दर को प्राप्‍त करने के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है. विनिर्माण क्षेत्र में भी विकास तीव्रता के साथ आगे बढ़ते हुए आठ प्रतिशत से अधिक की उच्‍च दर से वृद्धि कर रहा है. वर्ष 2017-18 में निर्यात में 15 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने का अनुमान है. वित्त मंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट में विशेषकर कृषि और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत बनाने, आर्थिक दृष्टि से कम सुविधा प्राप्‍त वर्ग के लोगों को उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध कराने, वरिष्‍ठ नागरिकों के हितों की रक्षा करने, आधारभूत सुविधाओं के सृजन तथा देश में शिक्षा की गुणवत्‍ता में सुधार के लिए अधिक संसाधन उपलब्‍ध कराने के लिए राज्‍यों के साथ मिलकर कार्य करने पर विशेष रूप से जोर दिया है. वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वैद्य लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंचाने को भी सुनिश्चित किया. उन्‍होंने कहा कि भारत का प्रत्‍यक्ष लाभ हस्‍तांतरण तंत्र विश्‍व का एक सबसे बड़ा संचालन और एक वैश्‍विक स्तर पर सफलता की गाथा भी है.

दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य बिमा योजना की घोषणा
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में देश में 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना-आयुष्मान भारत शुरू करने की घोषणा की और कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा. यह यूनिवर्सल हेल्थस्कीम की ओर भारत का पहला कदम है. इस योजना के तहत 5 लाख का बीमा कवर गरीब परिवार को मिलेगा. यह योजना कैशलैस होगी और मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) को नई योजना का रूप दिया जाएगा. उन्होंने इस योजना की शुरूआत की तारीख तो नहीं बताई लेकिन कहा कि एक अप्रैल, 2018 से सरकार के पास इसके लिए 2000 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे. उन्होंने कहा, ‘‘यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी वित्तपोषित स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा. इस कार्यक्रम के सुचारू क्रार्यान्वयन के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी.’’ संप्रग सरकार के समय से चल रही मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में गरीब परिवारों को 30 हजार रुपये का वार्षिक कवरेज प्रदान किया जाता है. इसे ही व्यापक किया जा रहा है.

सरकार ने 24 नए मेडिकल खोलने या जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने की भी घोषणा की है. इसका मतलब है कि प्रत्येक तीन लोकसभा क्षेत्रों में संयुक्त रूप से एक मेडिकल कॉलेज होगा. जेटली ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की नींव के रूप में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना की गई है. डेढ़ लाख केंद्र स्वास्थ्य पूरे भारत में भारत आयुष्मान प्रोग्राम के तहत बनाए जाएंगे. उन्होंने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए इस बजट में 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की वचनबद्धता जताई. इसके लिए उन्होंने निजी क्षेत्र को भी योगदान के लिए आमंत्रित किया. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, ‘‘हम सब जानते हैं कि हमारे देश में लाखों परिवारों को अस्पतालों में इलाज कराने के लिए उधार लेना पड़ता है या संपत्तियां बेचनी पड़ती हैं. सरकार निर्धन और कमजोर परिवारों की इस स्थिति को लेकर अत्यधिक चिंतित है.’’ जेटली ने कहा, ‘‘आयुष्मान भारत के तहत ये दो दूरगामी पहलें वर्ष 2022 तक एक नए भारत का निर्माण करेंगी.’’ बजट में टीबी से पीड़ित सभी रोगियों को उपचार की अवधि के दौरान 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से पोषक आहार सहायता प्रदान करने के लिए 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है. गुणवत्तायुक्त चिकित्सा शिक्षा के मकसद से सरकार ने मौजूदा जिला अस्पतालों को उन्नत बनाकर 24 नये सरकारी चिकित्सा कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना करने की घोषणा की. 

सीमा पर तनाव के बीच सेना को मिली 'ताकत'
सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में रक्षा बजट के लिए 2.95 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जो पिछले साल के 2.74 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 7.81 फीसदी ज्यादा है. आम बजट में कुल रक्षा बजट के तहत सेना के तीनों अंगों के लिए नए हथियारों, विमानों, जंगी जहाजों और अन्य सैन्य साजो-सामान की खरीद के लिए 99,947 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई है. रक्षा बजट 2018-19 के लिए निर्धारित कुल 24,42,213 करोड़ रुपए के आवंटन का 12.10 प्रतिशत है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में देश की सीमाओं पर चुनौतियों से निपटने और जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर दोनों क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा माहौल को प्रबंधित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर विकसित करेगी और घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल सैन्य उत्पादन नीति लेकर आएगी. 

जेटली ने कहा कि 2017-18 में रक्षा बजट के लिए 2.79 लाख करोड़ रुपए के संशोधित अनुमान की तुलना में आवंटन में वृद्धि 5.91 प्रतिशत और 2.74 लाख करोड़ रुपए के बजट अनुमान की तुलना में वृद्धि 7.81 प्रतिशत है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आवंटित 2,95,511 करोड़ रुपए में से 99,947 करोड़ रुपए पूंजीगत व्यय के लिए हैं जो सेना के तीनों अंगों के आधुनिकीकरण पर खर्च किए जाएंगे. रक्षा क्षेत्र के राजस्व व्यय के लिए 1,95,947 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं जिसमें वेतन, प्रतिष्ठानों के रखरखाव और अन्य संबंधित व्यय शामिल हैं. रक्षाकर्मियों के पेंशन के लिए इन आवंटनों से इतर 1,08,853 करोड़ रुपए की एक पृथक राशि का प्रावधान किया गया है. रक्षा पेंशन के लिए राशि में पिछले साल के 85,740 करोड़ रुपए के आवंटन की तुलना में 26.60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में देश की सीमाओं पर चुनौतियों से निपटने और जम्मू कश्मीर तथा पूर्वोत्तर दोनों क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा माहौल को प्रबंधित करने में सशस्त्र बलों की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि सरकार दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन कॉरिडोर विकसित करेगी और घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल सैन्य उत्पादन नीति लेकर आएगी. जेटली ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्ष में रक्षाबलों की अभियानगत क्षमता को आधुनिक बनाने और मजबूत करने पर काफी जोर दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा, ‘सरकार देश में दो रक्षा औद्योगिक उत्पादन गलियारों के विकास के लिए कदम उठाएगी.’ जेटली ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के जरिए घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग अनुकूल ‘रक्षा उत्पादन नीति 2018’ भी लेकर आएगी. उन्होंने कहा कि देश को रक्षा जरूरतों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के वास्ते भारत की मूल रक्षा उत्पादन क्षमता के विकास के लिए कई पहल शुरू की गई हैं. मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को उदार बनाने के साथ-साथ निजी निवेश के द्वार खोल दिए गए हैं.


रेलवे
रेलवे की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने पर जोर देते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री ने 2018-19 के लिए भारतीय रेल के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव पेश किया. यह रेलवे के लिए अबतक का सबसे बड़ा आवंटन है. जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा, 'रेलवे का 2018-19 के लिए पूंजीगत व्यय 1,48,528 करोड़ रुपये रखा गया है.' उन्होंने कहा कि यह राशि पिछले बजट से 17,000 करोड़ रुपये ज्यादा है. केंद्रीय बजट 2017-18 में रेलवे का कुल पूंजीगत व्यय 1,31,000 करोड़ रुपये रखा गया था. जेटली ने कहा कि अत्याधुनिक रेलगाड़ियां व अत्याधुनिक सुविधाएं 2018-19 के दौरान शुरू की जाएंगी. रेल बजट की 92 साल पुरानी प्रथा को बीते साल बंद किया गया और इसका केंद्रीय बजट में विलय कर दिया गया. मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान इसकी क्षमता बढ़ाने पर है. उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय का बड़ा हिस्सा रेलवे की क्षमता निर्माण को समर्पित है. जेटली ने कहा, '18,000 किमी रेल मार्ग का दोहरीकरण व 5,000 किमी रेल मार्ग की तीसरी और चौथी लाइनों को ब्रॉड गेज में बदलने से इसकी क्षमता बढ़ जाएगी. इससे लगभग पूरा नेटवर्क ब्राड गेज में बदल जाएगा.'

उन्होंने कहा की 'रेलवे ने भौतिक लक्ष्यों में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. हम तेजी से भारतीय रेल नेटवर्क के बेहतरीन विद्युतीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं. 2018-19 में कुल 4,000 किमी को इस्तेमाल में लाए जाने का लक्ष्य रखा गया है.' वित्तमंत्री ने कहा कि पूर्व और पश्चिम समर्पित माल ढुलाई गलियारे का काम भी पूरे जोरों पर है. उन्होंने कहा कि 12,000 वैगन, 5,160 कोच व 700 इंजनों की खरीद की जा रही है. उन्होंने कहा कि सामानों के शेड के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया गया है. जेटली ने कहा, 'सुरक्षा प्रथम नीति के लिए राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत पर्याप्त धन का आवंटन किया गया, जिससे रेलवे की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित हो.' उन्होंने कहा, 'रेल पटरियों के मरम्मत कार्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.' वित्त मंत्री ने कहा , 'मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 3,600 किमी से ज्यादा के रेल पटरियों के नवीनीकरण का लक्ष्य है. अन्य प्रमुख कदमों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जैसे कुहरे से सुरक्षा व रेल सुरक्षा व चेतावनी प्रणाली शामिल है.

वित्तमंत्री ने कहा कि 600 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य इंडियन रेलवे स्टेशन डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा लिया गया है. उन्होंने कहा, 'सभी 25,000 से ज्यादा यात्रियों वाले स्टेशनों पर एस्केलेटर लगेंगे. सभी रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में वाई-फाई की सुविधा प्रदान की जाएगी.' सरकार सभी स्टेशनों व ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उसे सीसीटीवी से लैस करेगी. जेटली ने कहा, 'आधुनिक रेलगाड़ियां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री पेरम्बदूर में तैयार की जा रही है. इस तरह की पहली ट्रेन की शुरुआत 1018-19 के दौरान की जाएगी.' मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना के बारे में जेटली ने कहा, 'देश की पहली हाईस्पीड रेल परियोजना बुलेट ट्रेन की नींव 14 सितंबर, 2017 को रखी गई.'

कृषि और ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था  
वित्‍त मंत्री ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की सरकार की वचनबद्धता का उल्‍लेख करते हुए अनेक नई योजनाओं और उपायों की घोषणा की. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने आगामी खरीफ से सभी अघोषित फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य उत्‍पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा करने का फैसला किया है. रबी की अधिकांश घोषित फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य लागत से डेढ़ गुणा तय किया जा चुका है. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए संस्‍थागत ऋण की राशि में वर्ष दर वर्ष निरंतर वृद्धि की है और यह राशि वर्ष 2014-15 के 8.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर वर्ष 2017-18 में 10 लाख करोड़ रुपए कर दी गई. वित्‍त मंत्री ने वर्ष 2018-19 में इस राशि को 11 लाख करोड़ रुपए करने का प्रस्‍ताव दिया. जेटली ने डेयरी उद्योग की आधारभूत सुविधाओं में वित्‍त निवेश में सहायता के लिए सूक्ष्‍म सिंचाई कोष स्‍थापित करने की घोषणा की. वित्‍त मंत्री ने मत्‍स्‍य क्रांति अवसंरचना विकास कोष तथा पशुपालन के लिए आधारभूत सुविधा विकास कोष स्‍थापित करने की घो‍षणा की. इन दोनों कोषों की कुल स्‍थाई निधि 10 हजार करोड़़ रुपए होगी.

जेटली ने कहा कि ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर ऑपरेशन ग्रीन्‍स प्रारंभ करने का सरकार का प्रस्‍ताव है. इसके प्रयोजनार्थ 500 करोड़ रुपए की राशि आबंटित की गई. उन्‍होंने कहा कि 86 प्रतिशत से ज्‍यादा लघु और सीमांत किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए मौजूदा 22 हजार ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाजारों के रूप में विकसित तथा उन्‍नत किया जाएगा. 22 हजार ग्रामीण कृषि बाजारों तथा 585 एपीएमसी में कृषि विपणन अवसंरचना के विकास के लिए दो हजार करोड़ रुपए की स्‍थाई निधि से एक कृषि बाजार अवसंरचना कोष की स्‍थापना की जाएगी. वित्‍त मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष ई-नैम को सुदृढ करने और इसे 585 एपीएमसी तक पहुंचाने के संबंध में घोषणा की गई थी. इनमें से 470 को ई-नैम नेटवर्क से जोर दिया गया है शेष को 2018 तक जोड़ दिया जाएगा. वित्‍त मंत्री ने संगठित कृषि एवं संबद्ध उद्योग को सहायता के प्रयोजनार्थ 200 करोड़ रुपए की राशि आबंटित करने का प्रस्‍ताव दिया. वित्‍त मंत्री ने कहा कि बांस हरित सोना है. उन्‍होंने इस क्षेत्र को संपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए 1290 करोड़ रुपए के परिव्‍यय के साथ एक पुनर्गठित राष्‍ट्रीय बांस मिशन को शुरू करने का प्रस्‍ताव दिया. वित्‍त मंत्री ने कृषि उत्‍पादों के निर्यात की संभावना को देखते हुए 42 मेगाफूड पार्कों में अत्‍याधुनिक परीक्षण सुविधाएं स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव दिया. उन्‍होंने हरियाणा, पंजाब, उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में प्रदूषण की समस्‍या से निपटने के लिए सरकारों के प्रयासों को सहायता देने की एक विशेष योजना की भी घोषणा की.

वित्‍त मंत्री ने कहा की महिलाओं के स्‍वयं सहायता समूहों के ऋण को पिछले वर्ष के मुकाबले 37 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में लगभग 42,500 करोड़ रुपए किया था. 2019 तक यह ऋण राशि बढ़ाकर 75 हजार करोड़ रुपए कर दी जाएगी. 2018-19 राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के लिए 5750 करोड़ रुपए का प्रस्‍ताव दिया गया. निम्‍न और मध्‍यम वर्ग के लिए उठाए गए कदमों का उल्‍लेख करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि उज्‍जवला योजना के अंतर्गत आठ करोड़ गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्‍शन दिए जाएंगे. सोभाग्‍य योजना के अंतर्गत 16 हजार करोड़ रुपए के परिव्‍यय से 4 करोड़ गरीब परिवारों को बिजली के कनेक्‍शन प्रदान किये जा रहे है. 2022 तक सभी को आवास का लक्ष्‍य पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 2019 तक एक करोड़ से ज्‍यादा आवासों का निर्माण किया जाएगा इसके अलावा स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत छह करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है.

शिक्षा, और सामाजिक सुरक्षा  

वित्‍त मंत्री ने कहा कि 2018-19 के लिए स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर बजटीय व्‍ययों का अनुमान 2017-18 के 1.22 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 1.38 लाख करोड़़ रुपए है. शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष 2022 तक खेल और कौशल विकास में प्रशिक्षण प्रदान करने के अलावा 50 प्रतिशत से ज्‍यादा की अनुसूचित जनजाति आबादी वाले प्रत्‍येक ब्‍लॉक में एकलव्‍य मॉडल आवासीय विद्यालय की स्‍थापना की घोषणा की. वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकार सामाजिक-आर्थिक जातीय जनगणना के अनुसार वृ‍द्धों, विधवाओं, बेसहारा बच्‍चों, दिव्‍यांगजनों और वंचित लोगों के प्रत्‍येक परिवार तक पहुंचने के लिए एक व्‍यापक सामाजिक सुरक्षा तथा संरक्षण कार्यक्रम कार्यांवित कर रही है. राष्‍ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के लिए वर्ष 2018-19 में 9975 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. वर्ष 2022 तक शिक्षा में आधारभूत सुविधाओं और प्रणालियों को पुन: मजबूत बनाने के लिए अगले चार वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है. प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्‍येता पहल के तहत श्रेष्‍ठ संस्‍थानों से हर वर्ष एक हजार उत्‍कृष्‍ट बीटैक छात्रों की पहचान की जाएगी और उन्‍हें आईआईटी, आईआईएससी में पीएचडी करने के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी.

मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्योग एवं रोजगार सृजन
मध्‍यम लघु तथा सूक्ष्‍म उद्यम एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बजट में 3794 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं. अप्रैल 2015 में मुद्रा योजना का शुभारंभ किया गया. जिसके तहत 10.38 करोड़ रुपए के मुद्रा लोन दिए गए. इनमें से 76 प्रतिशत ऋण खाते महिलाओं के जबकि 50 प्रतिशत से ज्‍यादा अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्‍य पिछड़े वर्ग के हैं. 2018-19 के लिए मुद्रा के अंतर्गत तीन लाख करोड़ रुपए के ऋण का लक्ष्‍य रखा गया है. उन्होंने कहा की रोजगार सृजन की प्राथमिकता सरकार की नीतियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं. वित्‍त मंत्री ने एक स्‍वतंत्र अध्‍ययन का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष 70 लाख औपचारिक रोजगारों का सृजन किया जाएगा. पिछले तीन वर्षों के दौरान रोजगार सृजन की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्‍लेख करते हुए वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार अगले तीन वर्षों में सभी क्षेत्रों के लिए ईपीएफ में नए कर्मचारियों के वेतन का 12 प्रतिशत का योगदान करेगी. 2018-19 में टैक्‍सटाइल क्षेत्र में 7148 करोड़ रुपए परिव्‍यय का प्रसताव है. रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए परिधान उद्योग में धारा 80 जेजेएए के अंतर्गत दी जाने वाली 30 प्रतिशत की कटौती को चमड़े तथा जूते उद्योग में भी लागू किया जाएगा. कॉरपोरेट टैक्स को चरणबद्ध तरीके से कम करने के प्रयास के तहत 250 करोड़ रुपए तक की टर्नओवर वाले कंपनियों को 25 प्रतिशत के कर दायरे में रखा गया है. इससे 99 प्रतिशत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को लाभ होगा. इससे वित्त वर्ष 2018-19 में 7,000 करोड़ रुपए की राजस्व हानि होगी.

वित्तीय प्रबंधन  एंव डिजिटल अर्थव्यवस्था

बजट में परिव्यय का संशोधित अनुमान 2017-18 के लिए 21.57 लाख करोड़ रुपए है, जबकि बजट का आकलन 21.47 लाख करोड़ रुपए का था. वित्त मंत्री ने 2018-19 के लिए बजट घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया. संशोधित वित्तीय घाटे का अनुमान वर्ष 2017-18 के लिए 5.95 लाख करोड़ रुपए का है, जो जीडीपी 3.5 प्रतिशत है। प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों के अंतर्गत वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में नकदी के उपयोग को कम करने तथा कर दायरा बढ़ाने से फायदा हुआ है. प्रत्यक्ष करों की वृद्धि दर 2016-17 में 12.6 प्रतिशत और 2017-18 में 18.7 प्रतिशत रही है. कर दाताओं की संख्या जो 2014-15 में 6.47 करोड़ थी, बढ़कर 2016-17 में 8.27 करोड़ हो गई है. आयकर प्रदाताओं के लिए वर्तमान में परिवहन भत्ते तथा अन्य चिकित्सा व्यय की परिपूर्ति के बदले 40,000 रुपए की मानक कटौती का प्रावधान किया गया है. दिव्यांगजनों को बढ़े दर पर मिलने वाला परिवहन भत्ता आगे भी जारी रहेगा. इससे 2.5 करोड़ वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों को लाभ हो. गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों तथा ग्रामीण परिवारों की शिक्षा और स्वास्थ्य जरूरतों के लिए बजट में व्यक्तिगत आयकर तथा निगम कर पर 4 प्रतिशत अधिशेष की व्यवस्था की गई है. नये अधिशेष को स्वास्थ्य व शिक्षा उपकर के नाम से जाना जाएगा. प्रत्यक्ष कर संग्रहण के लिए 2016 में प्रयोग के आधार पर ई-निर्धारण प्रारंभ किया गया था. 2017 में इसका विस्तार 102 नगरों में किया गया है.


बैंकों तथा डाकघरों में जमा राशि पर ब्याज आय में छूट 10 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए की गई है तथा आयकर धारा 194ए के तहत स्रोत पर आयकर की कटौती नहीं की जाएगी. यह लाभ सावधि जमा योजनाओं तथा आवर्ती जमा योजनाओं में प्राप्त होने वाले ब्याज के लिए भी उपलब्ध होगा. वित्त मंत्री ने कहा कि धारा 80डी के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या चिकित्सा व्यय हेतु कटौती सीमा को 30 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है. अब सभी वरिष्ठ नागरिक किसी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम या किसी चिकित्सा के संदर्भ में 50 हजार रुपए प्रतिवर्ष तक कटौती के लाभ का दावा कर सकेंगे. वित्त मंत्री ने धारा 80डीडीबी के अंतर्गत गंभीर बीमारी से संदर्भ में चिकित्सा खर्च के लिए कटौती सीमा को वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 60 हजार रुपए से और अति वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 80 हजार रुपए से बढ़ाकर सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक लाख रुपए का प्रस्ताव किया. इन रियायतों से वरिष्ठ नागरिकों को 4 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर लाभ प्राप्त होगा. टैक्स रियायतों के अतिरिक्त वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को मार्च 2020 तक बढ़ाया गया है. इस योजना के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा 8 प्रतिशत निश्चित प्रतिलाभ प्रदान किया जाता है. इस योजना के तहत प्रति वरिष्ठ नागरिक 7.5 लाख रुपए की मौजूदा निवेश सीमा को बढ़ाकर 15 लाख रुपए किया जा रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र (आईएफएससी) में स्थित स्टॉक एक्सचेंज में व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से आईएफएससी के लिए दो अन्य रियायतों का प्रस्ताव है. अनिवासी भारतीयों द्वारा डेरिवेटिव और कुछ प्रतिभूतियों के हस्तांतरण को पूंजीगत लाभ में रियायत की घोषणा की है. अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में कार्य करने वाले गैर-कॉरपोरेट कर प्रदाताओं पर 9 प्रतिशत का वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) लगेगा, जो कॉरपोरेट पर लगने वाले न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) के समान होगा. निर्धारण वर्ष 2017-18 के लिए सूचीबद्ध शेयरों और यूनिटों से छूट प्राप्त पूंजी लाभ की राशि लगभग 3,67,000 करोड़ रुपए है. श्री जेटली ने कहा कि मैं एक लाख रुपए से अधिक के ऐसे दीर्घावधिक पूंजी लाभों पर किसी सूचकांक के बिना 10 प्रतिशत की दर से कर लगाने का प्रस्ताव करता हूं.

अप्रत्यक्ष कर के संदर्भ में वस्तु और सेवा कर लागू होने के पश्चात यह पहला बजट है. बजट के प्रावधान सीमा शुल्क के संबंध में है. सीमा शुल्क में बदलाव से देश में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा तथा खाद्य प्रसंस्करण इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहनों का पुर्जा निर्माण, जूते तथा फर्नीचर जैसे क्षेत्रों में मेक-इन-इंडिया को बढ़ावा मिलेगा. इसलिए मोबाइल फोन पर सीमा शुल्क को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तथा मोबाइल व टीवी के कलपुर्जों के लिए सीमा शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है. काजू प्रसंस्करण उद्योग के लिए कच्चे काजू पर सीमा शुल्क 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है. आयातित वस्तुओं पर लगने वाले शिक्षा उपकर तथा उच्च शिक्षा उपकर को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया गया है. इसके स्थान पर आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत की दर से एक सामाजिक कल्याण उपकर लगाया जाएगा. जिन आयातित वस्तुओं को शिक्षा उपकर से छूट मिली हुई है, वह जारी रहेगी. जीएसटी लागू होने के पश्चात केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड-सीबीईसी का नाम बदलकर केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड करने का प्रस्ताव किया गया है.
बांड बाजार से कोषों के निर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए वित्‍त मंत्री ने नियामकों से निवेश वैद्यता के लिए एए से ए रेटिंग की ओर बढ़़ने की अपील की. उन्‍होंने कहा कि सरकार भारत में अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍त सेवा केंद्र में सभी वित्‍तीय सेवाओं को नियमित करने के लिए एकीकृत प्राधिकरण की स्‍थापना करेगी. वित्त मंत्री ने कहा कि नीति आयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम की शुरूआत करेगा. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग रोबोर्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल उत्पादन, डाटा विश्लेषण और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिए एक मिशन की शुरूआत करेगा. डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के लिए बजट-2018-19 में धन राशि आबंटन को दोगुना करके 3073 करोड़ रुपए किया गया है. 5 करोड़ ग्रामीणों को नेट कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए सरकार 5 लाख वाई-फाई हॉट स्पॉट का निर्माण करेगी. वित्त मंत्री ने इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपए की धनराशि का आबंटन किया है.


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