मासिक करेंट अफेयर्स

23 February 2018

वैश्विक भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक में भारत 81वें स्थान पर

भारत भ्रष्टाचार के मामले में हर साल नई सीढ़ियां चढ़ रहा है. दुनिया के भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक भ्रष्टाचार में भारत का स्थान हर साल बढ़ता जा रहा है. 2016 में यह 79वें स्थान पर था और अब 81वें नंबर पर पहुंच गया है. 2017 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 180 देशों में सर्वे किया है, जिसमें भारत का नंबर 81वां है. जबकि 2016 में 176 देशों के बीच यह सर्वे किया गया था और तब भारत का स्थान 79वां था। इसके एक साल पहले 2015 में 76वां स्थान था. हालांकि 2013-14 में भारत का स्कोर बेहतर हुआ था. 2015 के 38 अंकों के मुकाबले भारत को इस बार भी 40 अंक मिले हैं, जो पिछले कई वर्षों से इसी स्थान पर बना हुआ है. वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत के मुकाबले थोड़ा कम भ्रष्टाचारी है. पाकिस्तान ने भ्रष्टाचार इंडेक्स में 100 में से 32 अंक प्राप्त किए हैं वहीं बांग्लादेश को 28 अंक मिले हैं. जबकि चीन भ्रष्टाचार के मामले में भारत से 1 अंक ज्यादा प्राप्त किया है और उसकी रैंकिग 41 है.

करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स बर्लिन स्थित संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल हर साल यह रिपोर्ट जारी करती है. संस्था के मुताबिक, यह एक जटिल इंडेक्स है जिसमें अलग अलग संस्थानों के जरिये जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर भ्रष्टाचार का अनुमान लगाया जाता है.  इन्होंने अपनी रिपोर्ट में भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रेस स्वतंत्रता के मामले में “सबसे खराब अपराधियों” वाले देश की सूची में रखा. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी इस सूचकांक में कुल 180 देश और प्रदेशों को उनके सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कथित स्तरों के अनुसार रैंक दिया गया है. जिसमें भारत को 81वां स्थान मिला. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने कहा की एशिया प्रशांत क्षेत्र के कुछ देशों में, पत्रकार, एक्टिविस्ट, विपक्ष नेता और कानून स्थापित करने वाली संस्था या वॉचडॉग एजेंसियों को धमकाया जाता है, यहां तक की उनकी हत्या भी कर दी जाती है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल  के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामले में जो तीन देश सबसे आगे माने जाते हैं वो फिलिस्तीन, भारत और मालदीव्स हैं. यहां सबसे खराब अपराधी रहते हैं. यहां पर प्रेस के पास सीमित स्वतंत्रता है और पत्रकारों की मौत की मामले भी यही पर सबसे ज्यादा सामने आते हैं.

No comments:

Post a comment