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15 February 2018

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्र को शर्मसार होने से बचाया सेना के मेजर पर दर्ज एफआईआर पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एक पिता और सेना की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है. शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस भी जारी करते हुए दो दिन में जवाब देने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के पिता की याचिका पर सुनावाई के दौरान साफ निर्देश दिए कि सेना के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. मेजर आदित्य के पिता कर्नल कर्मवीर की ओर से पेश वकील वकील एश्वर्या भाटी ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नोटिस जारी किया है. याचिका की एक कॉपी को ऑटार्नी जनरल को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए है. कोर्ट ने एजीआई से कहा है कि दो हफ्ते के अंदर मामले पर केंद्र सरकार अपना पक्ष रखें.' वकील एश्वर्या भाटी ने आगे कहा, हमारी प्रार्थना पर न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज किए जाने के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.'

बता दें कि मेजर आदित्य के खिलाफ शोपियां में 27 जनवरी को एफआइआर दर्ज की गई थी. श्रीनगर के शोपियां में गत 27 जनवरी को सेना के काफिले पर हिंसक भीड़ का हमला और पत्थरबाजी रोकने के लिए सेना द्वारा की गई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में जम्मू कश्मीर पुलिस ने सैन्य काफिले की अगुवाई कर रहे मेजर आदित्य के खिलाफ रणवीर पैनल कोड की धारा 336, 307 और 302 के तहत एफआईआर दर्ज की. सेना पर एफआइआर के मामले में मेजर आदित्य के पिता लेफ्टीनेंट कर्नल कर्मवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से बेटे आदित्य के खिलाफ दर्ज एफआइआर रद करने की मांग की थी. मेजर आदित्य के पिता ने कहा है कि उनके सैन्य अधिकारी बेटे ने जो भी किया वो अपने कर्तव्य निर्वाहन में सरकारी संपत्ति और सैन्य अधिकारियों की रक्षा के लिए किया. राज्य सरकार द्वारा उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज किया जाना गलत है, उसे निरस्त किया जाए. वहीं मुंबई में शोपियां में भीड़ पर फायरिंग के आरोप में सेना के मेजर आदित्य कुमार पर दर्ज एफआईआर के खिलाफ पूर्व सैन्यकर्मियों ने प्रदर्शन किया.

आर्मी अधिकारी कर्मवीर ने अपनी याचिका में कहा है कि वे अपने बेटे और सैन्य अधिकारी के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट आए हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को बचाने के लिए और जान की बाज़ी लगाने वाले भारतीय सेना के जवानों के मनोबल की रक्षा की जानी चाहिए. जिस तरह से राज्य में राजनीतिक नेतृत्व द्वारा FIR का दर्ज कराई गई है, इससे लगता है कि राज्य में विपरीत स्थिति है. यह उनके बेटे उनके लिए समानता के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है. मेजर के पिता का कहना है कि 10 गढ़वाल राइफल्स में तैनात उनके बेटे मेजर आदित्य का नाम गलत और मनमाने ढंग से एफआइआर में शामिल किया गया है. यह घटना सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफस्पा) के तहत आने वाले इलाके में हुई थी. वहां हिंसक भीड़ ने सेना के काफिले पर हमला कर दिया था. मेजर आदित्य अपनी ड्यूटी का निर्वाह कर रहे थे. उनका मकसद सैन्य अधिकारियों और सरकारी संपत्ति की रक्षा करना था. बर्बरता की हदें पार करती भीड़ जब सेना के एक जूनियर अफसर को अपने कब्जे मे लेकर घसीटने लगी और उसकी हत्या पर आमादा हो गई तब हिंसक भीड़ को खदेड़ने के लिए चेतावनी स्वरूप कुछ गोलियां दागी गई थीं.

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