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06 February 2018

कुसुम योजना के तहत देश के तीन करोड़ पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने की घोषणा

आम बजट 2018-19 में हुई तमाम घोषणाओं के बीच एक योजना ऐसी भी है, जो आने वाले दिनों में गेम चेंजर’ साबित हो सकती है. इस योजना के तहत देश में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी पंपों को सोलर आधारित बनाया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की. योजना का नाम होगा किसान ऊर्जा सुरक्षा व उत्थान महाअभियान (कुसुम). योजना के तहत 2022 तक देश में तीन करोड़ पंपों को बिजली या डीजल की जगह सौर ऊर्जा से चलाया जाएगा. कुसुम योजना पर कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी. इसमें केंद्र सरकार 48 हजार करोड़ रुपये योगदान करेगी, जबकि इतनी ही राशि राज्य सरकारें देंगी. किसानों को कुल लागत का सिर्फ 10 फीसद ही उठाना होगा, जबकि लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम बैंक लोन से किया जाएगा.

बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा कि योजना का प्रस्ताव कैबिनेट को भेज दिया गया है. पहले चरण में उन पंप को शामिल किया जाएगा जो डीजल से चल रहे हैं. इस तरह के 17.5 लाख सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने की व्यवस्था की जाएगी. इससे डीजल की खपत कम होगी. यह योजना किसानों को दो तरह से फायदा पहुंचाएगी. एक तो उन्हें मुफ्त में सिंचाई के लिए बिजली मिलेगी और दूसरा अगर वह अतिरिक्त बिजली बना कर ग्रिड को भेजते हैं तो उसके बदले कीमत भी मिलेगी. योजना का विस्तृत प्रस्ताव सचिवों की समिति को भेजा गया है. उसके बाद कैबिनेट इसे मंजूरी देगा. इसे आगामी वित्त वर्ष से ही लागू किया जाएगा.

सरकार की योजना कहती है कि अगर देश के सभी सिंचाई पंपों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने लगे तो न सिर्फ मौजूदा बिजली की बचत होगी बल्कि 28 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी संभव होगा. कुसुम योजना के अगले चरण में सरकार किसानों को उनके खेतों के ऊपर या खेतों की मेड़ों पर सोलर पैनल लगा कर सौर ऊर्जा बनाने की छूट देगी. यह किसानों को आय का एक अतिरिक्त जरिया देगा. साथ ही इस योजना के पूरी तरह से लागू होने से कृषि क्षेत्र में बिजली देने की मौजूदा सारी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी, क्योंकि किसानों को इसकी जरूरत नहीं होगी. इसका एक असर होगा कि किसानों को मुफ्त बिजली दे कर शहरी उपभोक्ताओं से बिजली शुल्क वसूलने की मौजूदा राजनीति का भी समापन हो जाएगा.

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