मासिक करेंट अफेयर्स

10 February 2018

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी और निगरानी के लिए परामर्शी समिति गठित की

देश की रक्षा परियोजनाएं अब तेजी से पूरी होती दिखेंगी. सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में तेजी और निगरानी के लिए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 13 सदस्यीय परामर्शी समिति गठित की है. सरकार के पूर्व सचिव विनय शील ओबेराय समिति के अध्यक्ष होंगे. इनका कार्यकाल इस साल अगस्त तक रहेगा. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस समिति पर स्वतंत्र रूप से समीक्षा करने की जिम्मेदारी है. साथ ही 500 करोड़ रुपये अधिक लागत वाली चल रही महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थिति की जांच करेगी. समिति यह भी पता लगाएगी कि कहां बाधाएं आ रही हैं और देरी के लिए कौन से कारण जिम्मेदार हैं. समिति उन दुश्वारियों से निपटने के उपाय भी सुझाएगी. देरी के कारणों को खत्म करने के लिए क्या आधुनिक तरीके अपनाए जाएं, यह भी बताएगी.
समिति परियोजनाओं की शुरुआती स्थिति रिपोर्ट मार्च तक रक्षा मंत्री को सौंप देगी. इस रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल के अंत तक पहली और जुलाई के अंत तक दूसरी फॉलोअप रिपोर्ट सौंपी जाएगी. समिति इसके लिए मंत्रालय, रक्षा उपक्रमों के साथ-साथ रक्षा बलों के प्रमुखों से भी बातचीत करेगी. समिति के अन्य सदस्यों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन आरके त्यागी, आर्डिनेंस फैक्ट्रीज बोर्ड के पूर्व सदस्य आरके जैन, केपीएमजी के एयरोस्पेस के पार्टनर हेड और रक्षा डिवीजन के अंबर दुबे और अर्नस्ट एंड यंग के विशेष सलाहकार एलएलपी आर आनंद भी हैं.

बीते दिनों संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सेना के पास सैन्य साज सामान और गोलाबारूद की कमी है. जिसकी वजह उन्होंने रक्षा मंत्रालय को पर्याप्त फंड न मिलने को बताया. समीति ने सेना की ऑपरेशनल कमजोरियों को दूर करने और रक्षा खरीद को चुस्त न बनाने को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी. फंड के कारण रक्षा तैयारियों पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सैन्य समाना और गोलाबारूद की कमी का खामियाजा युद्ध जैसी स्थिति में उठाना पड़ सकता है.
 सैन्य खरीद के लिए करीब 26 लाख रुपयों की आवश्यकता है. 13वें रक्षा प्लैन (2017-22) में पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरों और भारत के भू -रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए भारतीय सेनाओं ने सरकार से 26.84 लाख करोड़ रुपए आगामी पांच सालों के लिए मांगे हैं. जिसके बाद वित्त मंत्री ने आश्वस्त किया कि सेना के आधुनिकीकरण की आवश्यकता को प्राथमिकता मिलेगी.

No comments:

Post a comment