मासिक करेंट अफेयर्स

20 February 2018

पुरातत्वविद् और इतिहासकार अरविंद पी.जमखडेकर होंगे भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद के अगले अध्यक्ष

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने महाराष्ट्र के इतिहासकार और पुरातत्वविद् अरविंद जमखेडकर को भारतीय ऐतिहासिक शोध परिषद (ICHR) के नए चेयरमैन पद के लिए चुना है. जमखेडकर प्रोफेसर वाई. सुदर्शन राव की जगह लेंगे. वर्तमान में वह पुणे डेक्कन कॉलेज में बतौर चांसलर अपनी सेवा दे रहे हैं. भारतीय ऐतिहासिक शोध परिषद के नए चेयरमैन अरविंद पी. जमखेडकर ने शनिवार को कहा कि वो भारत के इतिहास को समझने के लिए विभिन्न विषयों के बीच एक संयुक्त दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करेंगे. जमखेडकर ने कहा कि वह भारतीय ऐतिहासिक शोध परिषद के सलाहकार बोर्ड के साथ चर्चा करेंगे, ताकि भारतीय अतीत के पुनर्निर्माण के लिए प्रोत्साहन को लेकर काम शुरू किया जा सके.

उन्होंने कहा, "आईसीएचआर प्रमुख के तौर पर मुझे ऐतिहासिक अध्ययन को बढ़ावा देने का काम सौंपा गया है. जहां तक संभव हो मैं वैचारिक, मानव विज्ञान, पुरातात्विक और ऐतिहासिक विषयों को समझने की कोशिश करूंगा. इतिहास के इन पहलुओं को समझे बिना, कोई भी अतीत का पुनर्निर्माण नहीं कर सकता है." उन्होंने कहा, "मेरा बैकग्राउंड पारंपरिक वैचारिक विषयों पर स्टडी का रहा है, जो भाषाओं और सांस्कृतिक अध्ययन पर आधारित है. इससे मुझे इतिहास को बेहतर तरीके से समझने और उसका पुनर्निर्माण करने में मदद मिलेगी.

बता दें कि अरविंद जमखेडकर ने 1966 में पुणे यूनिवर्सिटी से संस्कृत में मास्टर की डिग्री ली थी. इसके बाद उन्होंने डेक्कन कॉलेज से 1966 में प्राचीन भारतीय इतिहास में डॉक्टरेट की उपाधि ली. जमखेडकर का रिसर्च 'जैन प्राकृत के विषय वसुदेव हिंदी' पर था. वह 2007 से 2013 के दौरान मुंबई के एशियाटिक सोसाइटी के उप सभापति भी रहे. जमखेडकर मुंबई के एशियाटिक सोसाइटी के संपादक भी रहे हैं. एक पुरातत्वविद् के तौर पर जमखेडकर ने 19 साइट्स में खुदाई कराई थी. जामखेडकर देश के सबसे बड़े स्तूप की खोज में प्रोफेसर जगपति जोशी की टीम में भी शामिल रहे हैं. इसके अलावा अरविंद जमखेडकर ने प्रोटो पुरातत्वविद् के तौर पर भी काम किया है और महाराष्ट्र के पुरातात्विक के निदेशक भी रह चुके हैं. जमखडेकर को 1984 में विश्व अनुदान आयोग द्वारा पुरातत्व में नेशनल लेक्चरर के रूप में भी चुना जा चुका है.

No comments:

Post a comment