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04 March 2018

पूर्वोत्तर में भगवा का वर्चस्व, त्रिपुरा में 25 साल बाद लाल गढ़ ध्वस्त

त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में शनिवार को विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद पूर्वोत्तर में भगवा का वर्चस्व कायम हो गया. भाजपा ने त्रिपुरा में 25 साल से सत्ता पर काबिज वाम दलों के लाल गढ़ को ध्वस्त करने में कामयाबी हासिल की है. नगालैंड में भी पार्टी सरकार बनाने की तैयारी कर रही है. मेघालय में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है लेकिन यहां भी भाजपा को सरकार बनाने की उम्मीद है. भाजपा गठबंधन अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर में पहले से काबिज है. जबकि त्रिपुरा और नगालैंड के नतीजों ने इन राज्यों में उसके सत्तारूढ़ होने का रास्ता साफ कर दिया है. भाजपा के अश्वमेध के घोड़े को रोकना फिलहाल किसी के लिए संभव नहीं है. वामदल के गढ़ त्रिपुरा की फतह और क्षेत्रीय दलों की सनक पर चलने वाले नगालैंड में मजबूत भाजपा के साथ राजग सरकार गठन के संकेत ने यह सिद्ध कर दिया है कि भाजपा की विचारधारा के प्रभाव से कांग्रेस ही नहीं वाम भी नहीं बच सकता है. पहली सीधी लड़ाई में ही वाम चित हो गया है. वहीं मेघालय में त्रिशंकु विधानसभा ने फिर से कांग्रेस को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि वह जनता की अपेक्षाओं को समझने में नाकाम हो रही है. 

त्रिपुरा में एनडीए को स्पष्ट बहुमत : त्रिपुरा में शनिवार को हुई मतगणना के बाद भाजपा ने वहां स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जिससे प्रदेश में 25 साल से काबिज वाम मोर्चे का सत्ता से बाहर जाना तय हो गया. भाजपा गठबंधन ने 60  में से 43 सीटें हासिल की हैं. इनमें 35 सीटें अकेले भाजपा की हैं. जबकि पिछले चुनाव में सहयोगियों समेत 50  सीट जीतने वाले वाम मोर्चा को सिर्फ 16 सीटों पर जीत से संतोष करना पड़ा है. साल 2013 में यहां बीजेपी खाता भी नहीं खोल पाई थी और कई सीटों पर पार्टी की जमानत भी जब्त हो गई थी. लेकिन इस बड़ी और ऐतिहासिक जीत के साथ मोदी मैजिक अब तक बरकरार है ये संदेश बीजेपी ने दे दिया है. त्रिपुरा की बात करें तो यहां पिछले ढाई दशक से सीपीएम+ की सरकार थी. 20 साल से माणिक सरकार मुख्यमंत्री थे. त्रिपुरा में माणिक सरकार बेहद लोकप्रिय रहे हैं. माणिक सरकार बेहद सादगी से जीवन जीने वाले मुख्यमंत्री हैं.


नगालैंड में भी एनडीए सरकार : नगालैंड में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया. नागालैंड में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. हालांकि बीजेपी गठबंधन वहां सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है. राज्य की 60 विधानसभा सीटों में सरकार बनाने के लिए 31 सीटें चाहिए बीजेपी और एनडीपीपी (नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी) को 29 सीटें मिली है. जबकि सत्ताधारी नागा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ) को 25 सीटें मिली हैं. 6 सीटें अन्य के खाते में गई है. एक निर्दलीय और एक जदयू ने बीजेपी को समर्थन दिया है जिससे एनडीए की संख्या 31 हो गई है. नागालैंड में कांग्रेस और एनसीपी का खाता भी नहीं खुला है. विधानसभा चुनावों से ठीक पहले बीजेपी ने एनपीएफ से अलग होकर एनडीपीपी से गठबंधन किया था. इन चुनावों में तय हुआ था कि नेफियो रियो की नई नवेली पार्टी (NDPP) 40 और बीजेपी 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.


मेघालय में सरकार गठन की संभावनाएं तलाश रही भाजपा : मेघालय में भाजपा गठबंधन का प्रदर्शन त्रिपुरा और नगालैंड की तरह नहीं रहा. वहां सत्तारूढ़ कांग्रेस भी स्पष्ट जनादेश नहीं पा सकी. मेघालय में मई 2009 से सत्तारूढ़ कांग्रेस बहुमत हासिल करने में विफल रही, लेकिन 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. शरद पवार की राकांपा ने एक सीट जीती है. मेघालय में भाजपा महज दो सीट हासिल कर पायी है, लेकिन इसकी नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की है. तेरह सीट जीतनेवाले छोटे दल तथा तीन निर्दलीय सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभायेंगे.

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