मासिक करेंट अफेयर्स

15 March 2018

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में निधन

व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे ब्रह्मांड की जटिल गुत्थियां सुलझाने, ब्लैक होल और सापेक्षता के सिद्धांत के क्षेत्र में अपने अनुसंधान से महान योगदान देने वाले भौतिकीविद और ब्रह्मांड विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग का निधन हो गया. कैंब्रिज विश्वविद्यालय के निकट अपने घर में 76 वर्षीय हॉकिंग ने अंतिम सांस ली. इसी जगह उन्होंने ब्लैक होल और सापेक्षता पर अपना अनूठा काम किया. हॉकिंग ने 1970 में रॉजर पेनरोज के साथ मिलकर पूरे ब्रह्मांड पर ब्लैक होल के गणित को लागू किया और दिखाया कि कैसे हमारे निकट अतीत में एक सिंगुलैरिटी मौजूद थी. ब्रह्मांड के निर्माण का बिग-बैंग सिद्धांत यही है. हॉकिंग को असली प्रसिद्धी उनकी पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ से मिली. पुस्तक का पहला संस्करण 1988 में प्रकाशित हुआ और लगातार 237 सप्ताह तक संडे टाइम्स का बेस्ट सेलर रहने के कारण इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में शामिल किया गया. इस पुस्तक की एक करोड़ प्रति बिकी हैं और 40 अलग-अलग भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है.

हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में आठ जनवरी, 1942 को हुआ. इसी दिन महान खगोलविद गैलीलियो गैलीली की 300वीं पुण्यतिथि थी. हॉकिंग को स्नायु संबंधी बीमारी (एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिस) थी, जिसमें व्यक्ति कुछ ही वर्ष जीवित रह पाता है. उन्हें यह बीमारी 21 वर्ष की आयु में 1963 में हुई और शुरूआत में डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ ही वर्ष जीवित रह सकेंगे. जुझारू हॉकिंग अपनी बीमारी का पता लगने के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ने चले गये और अल्बर्ट आइंस्टीन के बाद वह दुनिया के सबसे महान भौतिकीविद बने. इस बीमारी के कारण हॉकिंग का शरीर लकवाग्रस्त हो गया था और उनका शरीर पूरी तरह से व्हीलचेयर पर सिमट कर रह गया, लेकिन उनका दिमाग ब्रह्मांड की गुत्थियां सुलझाने में व्यस्त रहता. यह महान वैज्ञानिक अपनी बीमारी के कारण सिर्फ एक हाथ की कुछ उंगलियां ही हिला सकते थे, बाकी का पूरा शरीर हिल नहीं पाता था. वह अपने रोजमर्रा के कार्यों नहाने, खाने, कपड़े पहनने और यहां तक कि बोलने के लिए भी लोगों और तकनीक पर निर्भर थे. इन तमाम कठिनाई के बावजूद अपनी जिजिविषा और बोलने के अनोखे अंदाज ने हॉकिंग को दुनिया भर के लिए प्रेरणा का स्रोत बना दिया.
 
हॉकिंग को अल्बर्ट आइंस्टिन पुरस्कार, वुल्फ पुरस्कार, कोप्ले मेडल और फंडामेंटल फिजिक्स पुरस्कार से नवाजा गया. हालांकि इस महान वैज्ञानिक को नोबेल सम्मान प्राप्त नहीं हुआ. ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्ष 2009 में हॉकिंग को अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम’ से नवाजा. दुनिया के सबसे प्रसिद्ध भौतिकीविद और ब्रह्मांड विज्ञानी पर 2014 में ‘‘थ्योरी ऑफ एवरीथिंग’’ नामक फिल्म भी बन चुकी है. हॉकिंग ने एक बार कहा था, ''मैं दुनिया को दिखाना चाहता हूं कि शारीरिक विकलांगता लोगों को तब तक अक्षम नहीं बना सकती, जब तक वह खुद को ऐसा ना मान लें.’’ 
 

No comments:

Post a comment