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19 March 2018

पीएम ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए देश के किसानों के लिए ‘जैविक खेती पोर्टल’ लांच किया

देश में जैविक खेती/ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधान मंत्री जी ने पुरे देश में एक पोर्टल लांच किया है. इस पोर्टल का नाम जैविक खेती पोर्टल होगा. इस पोर्टल के द्वारा रसायन मुक्त भारत की सोच को बढ़ावा दिया जायेगा और खेती में अच्छी फसलों के लिए रासायनिक खादों के प्रयोग को प्रतिबंधित किया जायेगा. इस पोर्टल पर केंद्र सरकार की योजनाओं, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY), परंपरागत कृषि विकास योजना माइक्रो इरीगेशन और एमआईडीएच आदि की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके द्वारा किसान और व्यापारी खेतों में मृदा की स्थिति अच्छी रखने के लिए ऑनलाइन तरीके सिख पायेंगे, जिसमे फसलों, पशु अपशिष्टो और फसल अपशिष्टो का प्रयोग किया जायेगा. इस प्रकार इस तरह से मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करने के लिए जैविक पदार्थो और सुक्ष्म जीवो का प्रयोग किया जाता है.

यह पोर्टल खेती के नये और पारंपरिक तरीको का एक मिश्रण होगा. इसके अलावा यहां किसान अपनी फसल सही दाम पर बेच भी सकतें है और यहाँ से व्यापारी भी कृषि उपजों को सीधे किसानों से खरीद सकतें है. इस तरह से यह पोर्टल कई सुविधाये प्रदान करेगा. इसमे रजिस्ट्रेशन करने के लिए यूजर को सर्वप्रथम इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा. जब आप यहा पहुँच जातें है तो आपको यहाँ ऊपर की ओर दायें साइड में मौजूद रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करना होता है. यहाँ पर आवेदक एक किसान की तरह या व्यापारी की तरह भी रजिस्ट्रेशन कर सकता है. अगर कोई व्यापारी अपने सामान को बेचने के लिए यहाँ अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहता है तो उसे Register as Other User ऑपशन को चुनना होगा और किसान को अपने लिए Register as Farmer ऑपशन को चुनना होगा. आवेदक किसान या अन्य विकल्प को चुनता है तो उसके लिए संबंधित फॉर्म यहाँ उपलब्ध हो जाता है. अब आवेदक को इस फॉर्म में उपलब्ध सारी जानकारी को अच्छे से पढ़कर इसे भर देना चाहिये. जब यह आवेदक यह फॉर्म भर लेता है तो वह सबमिट बटन पर क्लिक करके अपना फॉर्म सबमिट कर सकता है.

जैविक खेती में रासायनिक उत्पादों जैसे उर्वरक, कीटनाशक, खरपतवार नाशक आदि के प्रयोग को प्रतिबंधित किया जाता है. जैविक खेती में मुख्य रूप से फसलों को अदल बदल कर बोना, फसलों के अवशेष, पशु अवशेषों सुक्ष्म जीवों आदि के द्वारा फसलों को उर्वरकता प्रदान की जाती है. खेतों में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों आदि के उपयोग को समाप्त करने की जरुरत है. इसी के साथ किसानों को रासायनिक रूप से तैयार बीजो और जीएमओ प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी बंद करना होगा. इसके लिए किसानों को कृषि के परंपरागत तरीको जैसे एक खेत में अलग – अलग फसल लगाना या फसलों को अदल बदल के लगाना, जैविक खादों का प्रयोग आदि को अपनाना चाहियें. इसके अलावा किसान को अपने खेत के लिए खाद स्वयं तैयार करना चाहियें और इसके लिए वह पशु अपशिष्टो और कृषि अपशिष्टो का प्रयोग भी कर सकता है. किसानों को खेतो में फसलों में जैविक उर्वरक जैविक कीटनाशक आदि का प्रयोग ही करना चाहियें.
 
पशु पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन और पक्षियों के लिए भी एंटीबायोटिक इंजेक्शन या अन्य किसी रासायनिक पदार्थ का प्रयोग नहीं करना चाहियें. किसानों को बाजार में उपलब्ध रासायनिक तरीको से तैयार किये गये बीजों की अपेक्षा फसलों के लिए खुद के द्वारा तैयार किये गये बीजों का इस्तेमाल करना चाहियें. किसान को खेत में मेढ़ में विशेष प्रकार के पेड़ लगाना चाहियें. जिसके द्वारा पवन बाधा, कम्पोस्ट सोर्स और बफर जोन को कवर किया जा सकता है. इसके अलावा किसानों को पीजीएस इंडिया सर्टिफिकेट मुफ्त में बनाकर दिया जायेगा. इस सब तरीको को फॉलो करने के बाद किसान की खेती जैविक खेती में परिवर्तित हो पायेगी. जो कि हमारे जीवन और अन्य जीवों के लिए लाभप्रद होगा.

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