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22 March 2018

नंद बहादुर पुन बने नेपाल के उपराष्ट्रपति

सत्तारूढ़ गठबंधन एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की स्थायी समिति के नेता नंद बहादुर पुन नेपाल के नये उपराष्ट्रपति चुने गए हैं. पुन ने शनिवार को उप राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र दायर किया था, लेकिन उनके खिलाफ किसी ने भी अपनी उम्मीदवारी पेश नहीं की और वे निर्विरोध एक बार फिर से नेपाल के उप राष्ट्रपति बन गए. नेपाल के निर्वाचन आयोग ने देश के उपराष्ट्रपति के रूप में उनका पुन: नाम घोषित कर दिया, यह कहते हुए कि अपने पद की जिम्मेदारी को जारी रखने के लिए चुनाव की आवश्यकता नहीं है. जाहिर है कि पुन के खिलाफ
राष्ट्रपति पद की दौड़ में कोई भी उम्मीदवार शामिल नहीं हुआ, ऐसे में चुनाव की स्थिति ही नहीं बनी. पुन का जन्म नेपाल के रोल्पा जिले के रांगसी गांव में 23 अक्टूबर, 1965 को हुआ था. जिले के कॉलेज से ही मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने करीब एक दशक तक शिक्षक के तौर पर सेवा दी. इसके साथ ही उन्होंने वामपंथी राजनीति में भी हाथ आजमाया.

चुनाव आयोग ने रविवार को कहा था, 'राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के चुनाव कानून के अनुसार, 2074 धारा 24 के तहत नंद बहादुर पुन को फिर से उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया.' रिलीज में कहा गया, 'राष्ट्रपति व उप राष्ट्रपति चुनाव के अनुसार एकमात्र उम्मीदवार (सामने कोई प्रतिद्वंदी न हो) की स्थिति में उसे पद से सम्मानित किया जाता है.' पिछले साल अक्टूबर में नेपाल ने राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के चुनाव के लिए नए चुनावी कानून का समर्थन किया था, जिसने पद के लिए मैदान में खड़े होने के लिए संसद या किसी भी राज्य विधानसभा से बाहर किसी को भी बाध्य किया था और एक लाख की सुरक्षा जमा का प्रावधान खत्म कर दिया था और राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के उम्मीदवारों के लिए नामांकन नि: शुल्क दाखिल करने के लिए 75 हजार कर दिए थे, लेकिन मैदान में खड़े होने के लिए प्रत्येक पांच समर्थकों और प्रस्तावकों को अनिवार्यता है.


नए अनुमोदित बिल में 45 वर्ष से कम उम्र की आयु सीमा भी नहीं है और नेपाली नागरिकता को चुनाव के लिए खड़ा करने के लिए देशीयकृत बनाया गया है. इसके अलावा उन लोगों के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है जिन्हें भ्रष्टाचार, मानव तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी, फौजदारी के आरोपों में 20 से अधिक वर्षों के लिए जेल की सजा या जेल में बंद किया गया हो. लेकिन किसी ऐसे अपराधों और अन्य इसी तरह के मामलों में शामिल व्यक्ति अपनी रिहाई के छह महीने बाद चुनाव लड़ सकता है अगर उसने 20 साल से कम की जेल की सजा पूरी कर ली है तो. ब्लैकलिस्ट लोग इस लिस्ट से नाम हट जाने के बाद चुनाव लड़ सकते हैं. विधेयक में समान लिंग या समान जातीय समुदाय को राज्य के प्रमुख के पद के लिए खड़े होने की अनुमति नहीं है.

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