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09 March 2018

प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय पोषण मिशन और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के पैन इंडिया विस्तार का शुभारम्भ किया

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) का शुभारंभ किया और राजस्थान के झुनझुनू में हुए मेगा आयोजन में देश के सभी 640 जिलों को कवर करने वाली बेटी बचाओ बेटी पढाओ (बीबीबीपी) का पैन इंडिया विस्तार शुरू किया है. एनएनएम को 2017-18 से 9046.17 करोड़ रुपये के तीन साल के बजट के साथ स्थापित किया गया है. एनएनएम देश के पोषण स्तर को युद्ध के स्तर पर बढ़ाने की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण है. प्रधान मंत्री ने 10 जिलों को प्रभावी सामुदायिक व्यस्तता, पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम लागू करने और लड़कियों की शिक्षा को सक्षम करने के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया. इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा दुनिया में 100 साल से भी अधिक समय से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है. आज पूरा देश झुंझनूं के साथ जुड़ गया है. देश झुंझुनूं के इस भव्य दृश्य को देख रहा है. बेटी बोझ नहीं है. बेटी पूरे परिवार की आन, बान शान है. उन्होंने कहा मैं झुंझुनूं ऐसे ही नहीं आया हूं. बहुत सोच-विचार करके आया हूं. आया क्या आपने मुझे खिंच लिया है. आपने मुझे आने के लिए मजबूर कर दिया है.

पीएम ने कहा कि स्त्री-पुरुष की समानता से ही समाज का चक्र चलता है. कई दशकों से बेटियों को नकारते रहे, मारते रहे, उसी का नतीजा है कि समाज में असंतुलन पैदा हुआ है. एक काल पीढ़ी में यह सुधार नहीं होता है, चार-पांच पीढ़ियों की बुराईयां आज एकत्र हुई हैं. पर अब हम तय करें कि जितने बेटे पैदा होंगे उतनी ही बेटियां पैदा होंगी. बेटा-बेटी दोनों एक समान, इस भाव को लेकर चलेंगे तो जो चार-पांच पीढ़ी का नुकसान हुआ है उसे हम 2-3 पीढ़ी में ठीक कर सकते हैं. लेकिन उसकी पहली शर्त है कि अभी जो बच्चे पैदा होंगे उनमें कोई असंतुलन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक सास नेतृत्व नहीं संभालती है इस काम को वक्त ज्यादा लगेगा.
 
मोदी ने कहा कि जिस देश की महान संस्कृति, महान परंपरा, वेद से लेकर विवेकानंद तक महान हैं, वहां कौन सी बुराई घर कर गई कि आज हमें अपने ही घर में बेटी बचाने के लिए हाथ पैर जोड़ने पड़ रहे हैं, समझाना पड़ रहा है, बजट से धन खर्च करना पड़ रहा है. किसी भी समाज के लिए इससे बड़ी कोई पीड़ा नहीं हो सकती. मोदी ने कहा कि यह पुरानी सोच है कि बेटी बोझ होती है, आज घटनाएं बताती हैं कि बेटी बोझ नहीं बल्कि पूरे परिवार की आन बान शान है. उन्होंने कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि बेटा है तो बुढ़ापे में काम आएगा. उन्होंने पता होना चाहिए कि अब स्थितियां अलग हैं. पीएम ने कहा कि मैंने ऐसे परिवार देखें हैं जहां बूढ़े मां बाप हैं, चार चार बेटे हैं, जिनके बंगले हैं गाड़ियों की भरमार है, लेकिन बूढ़े मां बाप आश्रम में अपना वक्त गुजार रहे हैं. जबकि ऐसे परिवार भी हैं कि जहां बेटियां अपने बूढ़े मां बाप की देखभाल कर रही हैं, शादी तक नहीं कर रही.

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