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11 April 2018

विश्व होम्योपैथी दिवस, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने वैज्ञानिक कन्वेंशन का उद्घाटन किया

10 अप्रैल, 2018 को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ (World Homeopathy Day) मनाया गया. यह दिवस होम्योपैथी के संस्थापक जर्मनी के डॉ. क्रिश्चिन फ्रेडरिक सैमुएल हैनीमैन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. इस अवसर पर 10 से 11 अप्रैल, 2018 के मध्य केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में दो दिवसीय विज्ञान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस सम्मेलन का मुख्य विषय (Theme) है नवाचार, विकास और प्रगतिः चालीस वर्षों से विज्ञान की खोज’’ (Innovate, Evolve, Progress:
Exploring Science Since 40 years). ध्यान रहे कि प्रतिवर्ष की तरह 10 अप्रैल से विश्व होम्योपैथी सप्ताह भी मनाया जा रहा है जिसका समापन 16 अप्रैल, 2018 को होगा. इस सप्ताह का मुख्य विषय ‘गर्भावस्था एवं बच्चे के जन्म के लिए होम्योपैथी’ (Homeopathy for Pregnancy and Child birth) निर्धारित किया गया है.

 इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नई दिल्ली में एक वैज्ञानिक सम्मेलन का उद्घाटन किया. नायडू ने कहा है कि स्वच्छ भारत से स्वस्थ भारत और समृद्ध भारत बनेगा. उपराष्ट्रपति ने सबका आह्वान किया कि होम्योपैथी को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाया जाए ताकि सीमित संसाधनों के कारण जिन लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है, उन्हें होम्योपैथी के जरिये स्वास्थ्य लाभ दिया जा सके. उन्होंने कहा कि होम्योपैथी 18वीं शताब्दी की महानतम खोज है और मानव जाति इसकी खोज करने वाले के प्रति कृतज्ञ है. होम्योपैथी सस्ती उपचार प्रणाली है और इसके सेवन का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता. इस उपचार प्रणाली से स्वास्थ्य के क्षेत्र में संसाधनों की कमी से निपटा जा सकता है.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि होम्योपैथी को और प्रभावशाली तथा कारगर बनाने के लिए वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य शोधकर्ताओं को अपने प्रयासोंं में तेजी लानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र और औषधि विज्ञान के वैज्ञानिक होम्योपैथी के अनजाने तथ्यों को सामने लाने के लिए काम कर रहे हैं. विज्ञान न तो किसी का मित्र होता है और न किसी का शत्रु. उसे केवल प्रयोग और प्रमाण की आवश्यकता होती है. उपराष्ट्रपति ने होम्योपैथी के छात्रों और भावी चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे होम्योपैथी को सुगम्य बनाएं. यह अपेक्षाकृत अभिनव विज्ञान है और पूरी दुनिया में 80 से अधिक देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है.

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