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18 April 2018

विश्व हैमोफिलिया दिवस

विश्व हीमोफीलिया दिवस (World Hemophilia Day) प्रत्येक वर्ष 17 April को मनाया जाता है. यह दिवस World Federation of Hemophilia (WFH) की देखरेख में मनाया जाता है. यह संगठन इस दिन लोगों को हीमोफीलिया व दूसरे रक्त से जुडी हुई बीमारियों के बारे में जागरुक किया जाता है. 'शाही बीमारी' कहे जाने वाले रोग
'हीमोफ़ीलिया' का पता सर्वप्रथम उस वक्त चला था, जब ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के वंशज एक के बाद एक इस बीमारी की चपेट में आने लगे. शाही परिवार के कई सदस्यों के हीमोफ़ीलिया से पीड़ित होने के कारण ही इसे 'शाही बीमारी' कहा जाने लगा था. पुरुषों में इस बीमारी सम्भावना सबसे अधिक होती है. इस समय विश्वभर में लगभग 50 हज़ार से ज़्यादा लोग इस रोग से पीड़ित हैं.

पूरे विश्व में इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरुकता लाने के लिए 17 अप्रैल को 'विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस' मनाया जाता है. 'विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस' का लक्ष्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना और सभी के लिए उपचार उपलब्ध कराना है. हीमोफ़ीलिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जो महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक होती है. इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति में ख़ून के थक्के आसानी से नहीं बन पाते हैं. ऐसे में जरा-सी चोट लगने पर भी रोगी का बहुत सारा ख़ून बह जाता है. दरअसल, इस बीमारी की स्थिति में ख़ून के थक्का जमने के लिए आवश्यक प्रोटीनों की कमी हो जाती है. इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 1989 से 'विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस' मनाने की शुरुआत की गई. तब से हर साल 'वर्ल्ड फ़ेडरेशन ऑफ़ हीमोफ़ीलिया' (डब्ल्यूएफएच) के संस्थापक फ्रैंक कैनेबल के जन्मदिन 17 अप्रैल के दिन 'विश्व हीमोफ़ीलिया दिवस मनाया जाता है. फ्रैंक की 1987 में संक्रमित ख़ून के कारण एड्स होने से मौत हो गई थी.

 डब्ल्यूएफएच एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जो इस रोग से ग्रस्त मरीजों का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में काम करता है. हीमोफ़ीलिया रक्त से जुड़ी ख़तरनाक बीमारी है. इस बीमारी में चोट लगने या किसी अन्य वजह से रक्त का बहना शुरू तो हो जाता है, लेकिन फिर उसे रोकना मुश्किल हो जाता है. अलग-अलग मरीजों में रोग की गंभीरता में अंतर होता है. कुछ मरीजों में रक्त के जमने की क्षमता कम होती है, जबकि बीमारी बिगड़ने पर यह बिल्कुल समाप्त हो जाती है. यह बीमारी लाइलाज जरूर है, पर सही इलाज द्वारा नियंत्रित की जा सकती है. इस रोग का एक कारण रक्त प्रोटीन की कमी बताई जाती है, जिसे 'क्लॉटिंग फैक्टर' कहा जाता है. इस फैक्टर के कारण ही बहते हुए रक्त का थक्का जमता है और ख़ून बहना रुकता है.

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